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‘पच्चीस महातत्वों से हुई सृष्टि की रचन्रा
शाहजहांपुर
Updated Fri, 13 Mar 2015 12:17 AM IST
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के तीसरे दिन कथा व्यास डॉ. दामोदर दीक्षित ने सृष्टि के उद्वभव के बारे
में बताया। कहा कि सृष्टि की रचना 25 महातत्वों से मिलकर हुई है। इसमें मन,
बुद्घि, चित्त, अहंकार, पंचतत्व, रूप, रस, गंध आदि शामिल हैं। इसके बाद
उन्होंने ब्रह्मा जी नाभि से कमल के द्वारा सृष्टि के उत्पन्न होने की कथा
सुनाई।
दीक्षित ने कहा कि यदि मनुष्य में यह धारणा रखे कि सब कुछ ईश्वर ने ही बनाया है, तो अहंकार से दूर रह सकता है। इसके बाद उन्होंने वृंदावन में बिदुर और उद्घव के मिलन के बारे में बताया। इससे पहले आचार्य रामानंद दीक्षित ने भगवान के स्वभाव का वर्णन किया। रामदुलारे त्रिगुणायत ने राम राज्य की विशेषताओं के बारे में बताया।
रमेश त्रिपाठी और रामबली ने भजन गाए। जिज्ञासु दीक्षित ने गीता के प्रथम अध्याय का सस्वर पाठ किया। इस मौके पर कमलेश खन्ना, धीरू खन्ना, रागिनी खन्ना, सरला खन्ना, ओम खन्ना, राघव खन्ना, राज खन्ना आदि मौजूद रहे।
दीक्षित ने कहा कि यदि मनुष्य में यह धारणा रखे कि सब कुछ ईश्वर ने ही बनाया है, तो अहंकार से दूर रह सकता है। इसके बाद उन्होंने वृंदावन में बिदुर और उद्घव के मिलन के बारे में बताया। इससे पहले आचार्य रामानंद दीक्षित ने भगवान के स्वभाव का वर्णन किया। रामदुलारे त्रिगुणायत ने राम राज्य की विशेषताओं के बारे में बताया।
रमेश त्रिपाठी और रामबली ने भजन गाए। जिज्ञासु दीक्षित ने गीता के प्रथम अध्याय का सस्वर पाठ किया। इस मौके पर कमलेश खन्ना, धीरू खन्ना, रागिनी खन्ना, सरला खन्ना, ओम खन्ना, राघव खन्ना, राज खन्ना आदि मौजूद रहे।