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एफसीआई के अटसलिया डिपो में मिले तेदुएं जैसे पदचिन्ह
रोजा।
Updated Wed, 06 Jan 2016 11:23 PM IST
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तीन दिन से इलाके में तेदुंआ देखे जाने के बाद लोगों में दहशत बरकरार है। वन विभाग की टीमें उसकी निगहबानी के लिए जुटी हैं, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया। अलबत्ता बुधवार को अटसलिया के एफसीआई डिपो में तेदुएं से मिलते जुलते पदचिन्ह मिले हैं, जिनको वन विभाग के कर्मियों ने जांच के लिए भेजा है।
बता दें कि तीन जनवरी की शाम करीब सात बजे रोडवेज के बस चालक यात्रियों सहित कुछ और राहगीरों ने रोजा ओवरब्रिज पर तेदुएं के होने की खबर पुलिस को दी थी, तब से पुलिस और वन विभाग के रेंजर आरपी सिंह सहित कई जवान उसकी तलाश में लगे हुए हैैं।
बुधवार को अटसलिया डिपो में करीब तीन किमी वर्ग क्षेत्रफल में फैले जंगलनुमा परिसर में तेदुएं की आहट पाकर वन विभाग के रेंजर आरपी सिंह की अगुवाई में सर्च अभियान चलाया गया। टीम को तेदुएं के पैरों की तरह मिलते जुलते पदचिन्ह मिले हैं। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि इलाके में तेदुंआ है या नहीं।
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रेंजर आरपी सिंह की नजरों ये मात्र अफवाह है, लेकिन फिर भी वन विभाग इसे गंभीरता से ले रहा है। श्री सिंह का मानना है कि तेदुंआ होता तो चार दिन भूखा नहीं रह सकता वह मवेशी अथवा मनुष्य पर हमला जरूर करता? ऐसी कोई जानकारी पिछले कई दिनों से सामने नहीं आई है। हो सकता है जो तेदुएं देखने के प्रत्यक्षदर्शियों को अन्य जानवर देखकर तेदुंआ होने का भ्रम हुआ हो।
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बता दें कि तीन जनवरी की शाम करीब सात बजे रोडवेज के बस चालक यात्रियों सहित कुछ और राहगीरों ने रोजा ओवरब्रिज पर तेदुएं के होने की खबर पुलिस को दी थी, तब से पुलिस और वन विभाग के रेंजर आरपी सिंह सहित कई जवान उसकी तलाश में लगे हुए हैैं।
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बुधवार को अटसलिया डिपो में करीब तीन किमी वर्ग क्षेत्रफल में फैले जंगलनुमा परिसर में तेदुएं की आहट पाकर वन विभाग के रेंजर आरपी सिंह की अगुवाई में सर्च अभियान चलाया गया। टीम को तेदुएं के पैरों की तरह मिलते जुलते पदचिन्ह मिले हैं। अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि इलाके में तेदुंआ है या नहीं।
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रेंजर आरपी सिंह की नजरों ये मात्र अफवाह है, लेकिन फिर भी वन विभाग इसे गंभीरता से ले रहा है। श्री सिंह का मानना है कि तेदुंआ होता तो चार दिन भूखा नहीं रह सकता वह मवेशी अथवा मनुष्य पर हमला जरूर करता? ऐसी कोई जानकारी पिछले कई दिनों से सामने नहीं आई है। हो सकता है जो तेदुएं देखने के प्रत्यक्षदर्शियों को अन्य जानवर देखकर तेदुंआ होने का भ्रम हुआ हो।