{"_id":"61672aad5c3d7673b0709929","slug":"today-last-farewell-to-shaheed-saraj-singh-will-be-given-in-akhtyarpur-dhaukal-shahjahanpur-news-bly462821596","type":"story","status":"publish","title_hn":"आज अखत्यारपुर धौकल में दी जाएगी शहीद सारज सिंह को अंतिम विदाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आज अखत्यारपुर धौकल में दी जाएगी शहीद सारज सिंह को अंतिम विदाई
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पुवायां (शाहजहांपुर)। शहीद सारज सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार शाम सात बजे शाहजहांपुर लाया गया। इस दौरान सेना के जवानों के साथ डीएम व अन्य अफसर भी मौजूद रहे। शहीद सारज सिंह के परिजन भी पहुंच गए। बृहस्पतिवार सुबह पार्थिव शरीर गांव ले जाया जाएगा। जहां उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।
सोमवार को कश्मीर में आतंकी हमले में बंडा के गांव अख्तयारपुर धौकल के निवासी सैनिक सारज सिंह शहीद हो गए थे । मंगलवार सुबह उनका पार्थिव शरीर कश्मीर से दिल्ली लाया गया। यहां से फ्लाइट से पार्थिव शरीर बरेली लाया गया। जहां से सेना के वाहन में जवानों के साथ पार्थिव शरीर बरेली से शाम करीब सात बजे शाहजहांपुर लाया गया। यहां आर्डिनेंस क्लोदिंग फैक्ट्री के अस्पताल में पार्थिव शरीर को रखा गया। पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार सुबह पैतृक गांव ले जाया जाएगा जहां पूर्ण सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा। इस दौरान डीएम इंद्र विक्रम सिंह, एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी, सीएमओ डॉ. ओपी गौतम, कैंट बोर्ड के सदस्य अवधेश दीक्षित और शहीद के परिजन मौजूद रहे। पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार सुबह पैतृक गांव ले जाया जाएगा जहां पूर्ण सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा।
अवकाश पर आए सैनिक भी पहुंचे सारज सिंह के घर
पुवायां (शाहजहांपुर)। सारज सिंह के शहीद होने की जानकारी पाकर मंगलवार और बुधवार को अवकाश पर घर आए कई सैनिक पहुंचे और परिवार के लोगों को सांत्वना दी। कहा कि, सारज सिंह ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है, जिसकी सेना के तमाम अधिकारियों ने प्रशंसा की है।
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सिंधौली के गांव मुड़िया पवार के अंकित सिंह सेना में सिपाही हैं। इन दिनों वह छुट्टी पर घर आए हुए हैं। सारज सिंह के शहीद होने की जानकारी पाकर बुधवार को वह गांव अखत्यारपुर धौकल पहुंचे और शहीद के परिवार के लोगों से मिलकर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश के जांबाज सैनिक सारज सिंह की शहादत का बदला लेने में जुटे हुए हैं और सेना ने घेराबंदी कर सात आतंकियों का सफाया कर दिया है। सारज सिंह सहित पांचों जवानों की शहादत पर पूरे देश को गर्व है।
अंकित सिंह के साथ कई युवा भी सारज सिंह के घर पहुंचे। ये युवा सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं। युवाओं ने भी सारज सिंह के भाई सुखबीर सिंह और पिता विचित्र सिंह से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की। युवाओं ने कहा कि सारज सिंह की शहादत से उनका सेना में भर्ती होने का संकल्प और मजबूत हुआ है। सेना में जाकर देश सेवा करने का मौका मिलना सौभाग्य की बात है।
पाकिस्तान से जंग में शहीद हुए थे अजोधापुर के नायक अनोख सिंह
पुवायां। शहीद सारज सिंह के गांव अखत्यारपुर धौकल से पांच किमी दूर गांव अजोधापुर के सेना में तैनात नायक अनोख सिंह वर्ष 1971 में पाकिस्तान से युद्ध में देश सेवा करते हुए शहीद हो गए थे। उनका पार्थिव शरीर भी घर नहीं लाया जा सका था, केवल वर्दी और जूते ही परिवार के लोगों को मिल सके थे।
1947 के भारत-पाक बंटवारे में पाकिस्तान के सियालकोट से निकल कर ईशर सिंह और मां लाभ कौर के साथ आकर अनोख सिंह का परिवार बंडा के अजोधापुर में बसा था। आर्थिक स्थिति खराब होने पर अनोख सिंह ने पंजाब के जालंधर में बहन प्यार कौर के यहां रहकर प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की और वहीं से पंजाब रेजीमेंट में भर्ती हो गए थे। वर्ष 1971 में शहादत से कुछ दिन पूर्व ही नायक अनोख सिंह अपनी तीन वर्ष की बेटी दलजीत कौर और डेढ़ वर्ष के बेटे कश्मीर सिंह को छोड़कर ड्यूटी पर गए थे।
नायक अनोख सिंह के शहीद होने की जानकारी परिवार के लोगों को तब हो सकी थी, जब पंजाब रेजीमेंट के उनके साथी अनोख सिंह की वर्दी, जूते और अन्य सामान लेकर गांव अजोधापुर पहुंचे थे। तब सबको पता लगा कि अनोख सिंह देश की खातिर शहीद हो गए हैं। परिवार वालों को शहीद के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन तक नहीं हो सके थे। पुत्र कश्मीर सिंह ने बताया कि पिता अनोख सिंह पाकिस्तान से जंग में शहीद हुए थे। मैंने तो उन्हें देखा तक नहीं। घर पर उनके जूते और वर्दी आई थी। अनोख सिंह को खोने के बाद उनकी पत्नी गुरमीत कौर ने गृहस्थी का भार अपने ससुर ईशर सिंह और सास लाभ कौर के सहारे वीर नारी की तरह संभाला। गुरमीत कौर की अप्रैल 2021 में मृत्यु हो चुकी है।
51वीं बरसी पर पत्नी को किया गया था सम्मानित
पुवायां। 1971 में पाकिस्तान से हुए युद्ध में शहीद हुए अनोख सिंह की 51वीं बरसी पर 14 फरवरी 2021 को मेजर राहुल व्यास के नेतृत्व में पहुंची सेना की टीम ने शहीद की पत्नी गुरमीत कौर और उनके परिवार को सम्मानित किया था। अनोख सिंह के घर वर्तमान में पुत्र कश्मीर सिंह, पुत्रवधू रंजीत कौर, पौत्र गगनदीप सिंह, जोतप्रीत सिंह और पौत्रवधू कमलदीप कौर हैं।
शहीद परिवार को मिली उपेक्षा
पुवायां। तिरंगे की शान में बलिदान देने वाले नायक अनोख सिंह की पत्नी गुरमीत कौर को सरकार से उपेक्षा ही मिली। शहादत के बदले अतिरिक्त सुविधाओं के नाम पर उनको कुछ नहीं मिला। कच्ची गृहस्थी छोड़ देशसेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले नायक की याद में प्रशासन ने उनकी मूर्ति लगवाना तो दूर, उनके घर के लिए अच्छे रास्ते तक की व्यवस्था नहीं की। गुरमीत कौर को पति की नौकरी वाली पेंशन के अलावा कभी कोई लाभ नहीं मिला।
जंगलपुर के मलूक सिंह 1965 में हुए थे शहीद
पुवायां। गांव जंगलपुर के मलूक सिंह 1965 में पाकिस्तान से जंग में शहीद हुए थे। उनके घर पर भी पार्थिव शरीर नहीं आ सका था। घर पर केवल जूते और वर्दी ही भेजी गई थी।
पुत्र बलदेव सिंह बताते हैं कि पिता के शहीद होने के समय वह केवल दो साल के थे और उनको अपने पिता का चेहरा तक याद नहीं है। पिता के शहीद होने के समय उनकी मां बलवीर कौर की आयु मात्र 22 साल थी। उनके पिता पंजाब के फिरोजपुर से सेना में भर्ती हुए थे। जब वह शहीद हुए तो सबसे पहले घर पर तार आया, तब पिता के शहीद होने का पता चल सका। बाद में पिता की वर्दी, जूते और बिस्तर घर आया था। पता की पार्थिव देह घर नहीं आई थी, जिस कारण वे लोग पिता के अंतिम दर्शन नहीं कर सके।
सेना ने शहीद सैनिकों की पत्नियों को वीर नारी का दर्जा दे रखा है। जिले में आठ वीर नारी हैं। उनकी मां बलवीर कौर वास्तव में वीर नारी हैं और पिता के शहीद होने के बाद उन्होंने परिवार को बेहतर तरीके से पाला पोसा। उनकी मां इस समय 85 वर्ष की हैं और उनको सेना की ओर केवल पेंशन मिलती है। सेना की ओर से मां को समय-समय पर सम्मानित किया जाता रहता है।
बलदेव सिंह ने बताया कि उनके घर से काफी दूर तक सड़क नहीं थी। अब भी घर से पांच सौ मीटर दूर तक सड़क नहीं है। उनके पिता की याद में न कोई स्मारक बना न सड़क। वह कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, विधायक चेतराम और आर्मी को भी पत्र लिखा चुके हैं, लेकिन अभी तक सड़क नहीं बन सकी है। उन्होंने पिता के नाम पर शहीद गेट बनवाने के लिए भी नेताओं को पत्र लिखे, लेकिन आज तक शहीद द्वार नहीं बनवाया जा सका।
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सपा जिलाध्यक्ष भी पहुंचे शहीद के घर
पुवायां। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष तनवीर खां, पुवायां विधानसभा क्षेत्र प्रभारी उपेंद्र पाल बुधवार को शहीद सारज सिंह के घर पहुंचे और परिवार के लोगों से मिलकर दुख साझा किया। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि समाजवादी पार्टी इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ है। उनके साथ पुवायां विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष गोपाल अग्निहोत्री, जिला महासचिव रणंजय सिंह यादव, प्रदीप तिवारी, ब्रह्मानन्द मिश्रा, जगजीत सिंह टांडे, रामकुमार यादव, अजय कुमार, सुबोध कनौजिया, रोहित यादव, सचिन दीक्षित सहित कई लोगों ने भी शहीद के परिवार को सांत्वना दी।
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सोमवार को कश्मीर में आतंकी हमले में बंडा के गांव अख्तयारपुर धौकल के निवासी सैनिक सारज सिंह शहीद हो गए थे । मंगलवार सुबह उनका पार्थिव शरीर कश्मीर से दिल्ली लाया गया। यहां से फ्लाइट से पार्थिव शरीर बरेली लाया गया। जहां से सेना के वाहन में जवानों के साथ पार्थिव शरीर बरेली से शाम करीब सात बजे शाहजहांपुर लाया गया। यहां आर्डिनेंस क्लोदिंग फैक्ट्री के अस्पताल में पार्थिव शरीर को रखा गया। पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार सुबह पैतृक गांव ले जाया जाएगा जहां पूर्ण सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा। इस दौरान डीएम इंद्र विक्रम सिंह, एडीएम प्रशासन रामसेवक द्विवेदी, सीएमओ डॉ. ओपी गौतम, कैंट बोर्ड के सदस्य अवधेश दीक्षित और शहीद के परिजन मौजूद रहे। पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार सुबह पैतृक गांव ले जाया जाएगा जहां पूर्ण सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा।
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अवकाश पर आए सैनिक भी पहुंचे सारज सिंह के घर
पुवायां (शाहजहांपुर)। सारज सिंह के शहीद होने की जानकारी पाकर मंगलवार और बुधवार को अवकाश पर घर आए कई सैनिक पहुंचे और परिवार के लोगों को सांत्वना दी। कहा कि, सारज सिंह ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है, जिसकी सेना के तमाम अधिकारियों ने प्रशंसा की है।
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सिंधौली के गांव मुड़िया पवार के अंकित सिंह सेना में सिपाही हैं। इन दिनों वह छुट्टी पर घर आए हुए हैं। सारज सिंह के शहीद होने की जानकारी पाकर बुधवार को वह गांव अखत्यारपुर धौकल पहुंचे और शहीद के परिवार के लोगों से मिलकर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि देश के जांबाज सैनिक सारज सिंह की शहादत का बदला लेने में जुटे हुए हैं और सेना ने घेराबंदी कर सात आतंकियों का सफाया कर दिया है। सारज सिंह सहित पांचों जवानों की शहादत पर पूरे देश को गर्व है।
अंकित सिंह के साथ कई युवा भी सारज सिंह के घर पहुंचे। ये युवा सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं। युवाओं ने भी सारज सिंह के भाई सुखबीर सिंह और पिता विचित्र सिंह से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त की। युवाओं ने कहा कि सारज सिंह की शहादत से उनका सेना में भर्ती होने का संकल्प और मजबूत हुआ है। सेना में जाकर देश सेवा करने का मौका मिलना सौभाग्य की बात है।
पाकिस्तान से जंग में शहीद हुए थे अजोधापुर के नायक अनोख सिंह
पुवायां। शहीद सारज सिंह के गांव अखत्यारपुर धौकल से पांच किमी दूर गांव अजोधापुर के सेना में तैनात नायक अनोख सिंह वर्ष 1971 में पाकिस्तान से युद्ध में देश सेवा करते हुए शहीद हो गए थे। उनका पार्थिव शरीर भी घर नहीं लाया जा सका था, केवल वर्दी और जूते ही परिवार के लोगों को मिल सके थे।
1947 के भारत-पाक बंटवारे में पाकिस्तान के सियालकोट से निकल कर ईशर सिंह और मां लाभ कौर के साथ आकर अनोख सिंह का परिवार बंडा के अजोधापुर में बसा था। आर्थिक स्थिति खराब होने पर अनोख सिंह ने पंजाब के जालंधर में बहन प्यार कौर के यहां रहकर प्राथमिक शिक्षा ग्रहण की और वहीं से पंजाब रेजीमेंट में भर्ती हो गए थे। वर्ष 1971 में शहादत से कुछ दिन पूर्व ही नायक अनोख सिंह अपनी तीन वर्ष की बेटी दलजीत कौर और डेढ़ वर्ष के बेटे कश्मीर सिंह को छोड़कर ड्यूटी पर गए थे।
नायक अनोख सिंह के शहीद होने की जानकारी परिवार के लोगों को तब हो सकी थी, जब पंजाब रेजीमेंट के उनके साथी अनोख सिंह की वर्दी, जूते और अन्य सामान लेकर गांव अजोधापुर पहुंचे थे। तब सबको पता लगा कि अनोख सिंह देश की खातिर शहीद हो गए हैं। परिवार वालों को शहीद के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन तक नहीं हो सके थे। पुत्र कश्मीर सिंह ने बताया कि पिता अनोख सिंह पाकिस्तान से जंग में शहीद हुए थे। मैंने तो उन्हें देखा तक नहीं। घर पर उनके जूते और वर्दी आई थी। अनोख सिंह को खोने के बाद उनकी पत्नी गुरमीत कौर ने गृहस्थी का भार अपने ससुर ईशर सिंह और सास लाभ कौर के सहारे वीर नारी की तरह संभाला। गुरमीत कौर की अप्रैल 2021 में मृत्यु हो चुकी है।
51वीं बरसी पर पत्नी को किया गया था सम्मानित
पुवायां। 1971 में पाकिस्तान से हुए युद्ध में शहीद हुए अनोख सिंह की 51वीं बरसी पर 14 फरवरी 2021 को मेजर राहुल व्यास के नेतृत्व में पहुंची सेना की टीम ने शहीद की पत्नी गुरमीत कौर और उनके परिवार को सम्मानित किया था। अनोख सिंह के घर वर्तमान में पुत्र कश्मीर सिंह, पुत्रवधू रंजीत कौर, पौत्र गगनदीप सिंह, जोतप्रीत सिंह और पौत्रवधू कमलदीप कौर हैं।
शहीद परिवार को मिली उपेक्षा
पुवायां। तिरंगे की शान में बलिदान देने वाले नायक अनोख सिंह की पत्नी गुरमीत कौर को सरकार से उपेक्षा ही मिली। शहादत के बदले अतिरिक्त सुविधाओं के नाम पर उनको कुछ नहीं मिला। कच्ची गृहस्थी छोड़ देशसेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले नायक की याद में प्रशासन ने उनकी मूर्ति लगवाना तो दूर, उनके घर के लिए अच्छे रास्ते तक की व्यवस्था नहीं की। गुरमीत कौर को पति की नौकरी वाली पेंशन के अलावा कभी कोई लाभ नहीं मिला।
जंगलपुर के मलूक सिंह 1965 में हुए थे शहीद
पुवायां। गांव जंगलपुर के मलूक सिंह 1965 में पाकिस्तान से जंग में शहीद हुए थे। उनके घर पर भी पार्थिव शरीर नहीं आ सका था। घर पर केवल जूते और वर्दी ही भेजी गई थी।
पुत्र बलदेव सिंह बताते हैं कि पिता के शहीद होने के समय वह केवल दो साल के थे और उनको अपने पिता का चेहरा तक याद नहीं है। पिता के शहीद होने के समय उनकी मां बलवीर कौर की आयु मात्र 22 साल थी। उनके पिता पंजाब के फिरोजपुर से सेना में भर्ती हुए थे। जब वह शहीद हुए तो सबसे पहले घर पर तार आया, तब पिता के शहीद होने का पता चल सका। बाद में पिता की वर्दी, जूते और बिस्तर घर आया था। पता की पार्थिव देह घर नहीं आई थी, जिस कारण वे लोग पिता के अंतिम दर्शन नहीं कर सके।
सेना ने शहीद सैनिकों की पत्नियों को वीर नारी का दर्जा दे रखा है। जिले में आठ वीर नारी हैं। उनकी मां बलवीर कौर वास्तव में वीर नारी हैं और पिता के शहीद होने के बाद उन्होंने परिवार को बेहतर तरीके से पाला पोसा। उनकी मां इस समय 85 वर्ष की हैं और उनको सेना की ओर केवल पेंशन मिलती है। सेना की ओर से मां को समय-समय पर सम्मानित किया जाता रहता है।
बलदेव सिंह ने बताया कि उनके घर से काफी दूर तक सड़क नहीं थी। अब भी घर से पांच सौ मीटर दूर तक सड़क नहीं है। उनके पिता की याद में न कोई स्मारक बना न सड़क। वह कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, विधायक चेतराम और आर्मी को भी पत्र लिखा चुके हैं, लेकिन अभी तक सड़क नहीं बन सकी है। उन्होंने पिता के नाम पर शहीद गेट बनवाने के लिए भी नेताओं को पत्र लिखे, लेकिन आज तक शहीद द्वार नहीं बनवाया जा सका।
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सपा जिलाध्यक्ष भी पहुंचे शहीद के घर
पुवायां। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष तनवीर खां, पुवायां विधानसभा क्षेत्र प्रभारी उपेंद्र पाल बुधवार को शहीद सारज सिंह के घर पहुंचे और परिवार के लोगों से मिलकर दुख साझा किया। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि समाजवादी पार्टी इस दुख की घड़ी में परिवार के साथ है। उनके साथ पुवायां विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष गोपाल अग्निहोत्री, जिला महासचिव रणंजय सिंह यादव, प्रदीप तिवारी, ब्रह्मानन्द मिश्रा, जगजीत सिंह टांडे, रामकुमार यादव, अजय कुमार, सुबोध कनौजिया, रोहित यादव, सचिन दीक्षित सहित कई लोगों ने भी शहीद के परिवार को सांत्वना दी।