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अब हिमंचलपुर में सरकारी नलकूप के पास पहुंचा बाघ
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खुटार। बरवटपुर में कुत्ते को मारने के बाद बाघ एक किलोमीटर दूर हिमंचलपुर क्षेत्र में सरकारी नलकूप के पास पहुंच गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को सूचना देने के बाद भी छानबीन के लिए नहीं आया। इधर, बाघ के दहशत से ग्रामीण परेशान हैं।
खुटार के मोहल्ला देवीस्थान निवासी नेता ने बताया कि वह बलवीर सिंह के फार्म मजदूरी करते हैं। बलवीर सिंह का खेत जंगल के किनारे है। वह रात को खेत पर रुककर फसल की रखवाली करते हैं। रविवार रात करीब नौ बजे गांव रसवां कलां के मजरा हिमचंलपुर में सरकारी नलकूप संख्या 17 के पास बलवीर सिंह और तरसेम सिंह के खेत के पास बाघ देखकर उनके होश उड़ गए। वह किसी तरह मौके से भाग निकले और घर जाकर लोगों को सरकारी नलकूप के पास बाघ होने की सूचना दी।
नेता ने बताया कि उनको आशंका है कि बाघ ने नलकूप के पास गन्ने के खेत में ठिकाना बना लिया है। गत वर्ष भी बाघ ने इसी गन्ने के खेत में ठिकाना बनाया था और कई दिन तक गन्ने में रहकर दो गायों को मार डाला था। गन्ने के पास नलकूप होने से पानी की उपलब्धता बनी रहती है, जिस कारण आवारा पशु भी पानी पीने आते रहते हैं। इस कारण बाघ नलकूप के पास ही रहता है। बाघ को पानी के साथ ही शिकार भी आसानी से मिल जाता है। किसानों ने बताया कि बारिश नहीं होने के कारण नलकूप से सिंचाई करने के लिए उन लोगों को रात में भी नलकूप पर जाना पड़ता है, ऐसे में बाघ किसानों पर हमला कर सकता है। बाघ को गन्ने से जंगल की ओर खदेड़ा जाना चाहिए।
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नलकूप के पास बाघ होने की जानकारी नहीं मिली है। जानकारी कराई जाएगी। किसान रात के समय नलकूप के पास न जाएं। दिन में भी खेत पर काम करते समय सावधानी बरतें।
- डीएस यादव, रेंजर खुटार
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खुटार के मोहल्ला देवीस्थान निवासी नेता ने बताया कि वह बलवीर सिंह के फार्म मजदूरी करते हैं। बलवीर सिंह का खेत जंगल के किनारे है। वह रात को खेत पर रुककर फसल की रखवाली करते हैं। रविवार रात करीब नौ बजे गांव रसवां कलां के मजरा हिमचंलपुर में सरकारी नलकूप संख्या 17 के पास बलवीर सिंह और तरसेम सिंह के खेत के पास बाघ देखकर उनके होश उड़ गए। वह किसी तरह मौके से भाग निकले और घर जाकर लोगों को सरकारी नलकूप के पास बाघ होने की सूचना दी।
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नेता ने बताया कि उनको आशंका है कि बाघ ने नलकूप के पास गन्ने के खेत में ठिकाना बना लिया है। गत वर्ष भी बाघ ने इसी गन्ने के खेत में ठिकाना बनाया था और कई दिन तक गन्ने में रहकर दो गायों को मार डाला था। गन्ने के पास नलकूप होने से पानी की उपलब्धता बनी रहती है, जिस कारण आवारा पशु भी पानी पीने आते रहते हैं। इस कारण बाघ नलकूप के पास ही रहता है। बाघ को पानी के साथ ही शिकार भी आसानी से मिल जाता है। किसानों ने बताया कि बारिश नहीं होने के कारण नलकूप से सिंचाई करने के लिए उन लोगों को रात में भी नलकूप पर जाना पड़ता है, ऐसे में बाघ किसानों पर हमला कर सकता है। बाघ को गन्ने से जंगल की ओर खदेड़ा जाना चाहिए।
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नलकूप के पास बाघ होने की जानकारी नहीं मिली है। जानकारी कराई जाएगी। किसान रात के समय नलकूप के पास न जाएं। दिन में भी खेत पर काम करते समय सावधानी बरतें।
- डीएस यादव, रेंजर खुटार