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गोसदन में तीन दिन में तीन गायों की मौत
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
Updated Mon, 17 Apr 2017 12:17 AM IST
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खुटार के गांव सिमरा वीरान स्थित राजकीय गोसदन में रविवार को भी एक गाय की मौत हो गई। गोसदन में तीन दिन में तीन गायों की मौत हो चुकी है। दो गाय गंभीर रूप से बीमार हैं, लेकिन डॉक्टर गायों के बीमार होने से इंकार कर रहे हैं।
विनोवा भावे के भूदान यज्ञ आंदोलन से प्रभावित होकर खुटार के चौहान राजपरिवार की रानी ताजकुंवरि ने 383 उकछ़ जमीन दान में दे दी थी। बाद में इस जमीन पर राजकीय गोसदन बन गया। गोसदन की प्रबंध समिति के अध्यक्ष डीएम और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सचिव होते हैं। गोसदन की लगभग डेढ़ सौ एकड़ जमीन प्रति वर्ष 18 से 20 लाख रुपये के ठेके पर दी जाती है, इसके अलावा नतेल आदि की नीलामी से भी 20 से 25 हजार रुपये की आय होती है। गोसदन के बैंक और डाकघर के खाते में एफडी सहित 50 लाख रुपये से अधिक जमा हैं। 383 एकड़ जमीन और लाखों की नगदी के बाद भी गोसदन में गायों की दशा बदतर है।
तीन दिन पूर्व गोसदन में एक गाय की मौत हो गई थी। इसी रात एक और गाय ने दम तोड़ दिया। रविवार को भी एक गाय की मौत हो गई। गोसदन के पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. विवेक शुक्ला ने बताया कि एक गाय शुक्रवार को मरी थी और एक रविवार को मरी है। गाय बीमारी के कारण मरी हैं। अब कोई भी गाय बीमार नहीं है।
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गायों की मौत बीमारी के कारण हुई है। गायों के इलाज के लिए गोसदन में डॉक्टर मौजूद रहते हैं। यदि कोई गाय बीमार है तो उसका समुचित इलाज कराया जाएगा।
डॉ. इंद्रमनि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी शाहजहांपुर
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गोसदन के जंगल से पशु तस्करी करा रहा सिपाही
0 गोसदन में पशु नहीं लेने पर जंगल में छोड़ जाते हैं लोग
पुवायां। गोसदन में पशुपालकों औैर पुलिस के पकड़े गए पशु नहीं लिए जाते हैं। संसाधन सीमित होने की बात कहते हुए पशुओं को लेने से इंकार कर दिया जाता है।
गोसदन में हमेशा पशुओं की संख्या सौ सवा सौ के आसपास ही रहती है। पुलिस पशुओं से भरा ट्रक आदि पकड़कर गोसदन लाती है तो गोसदन के अधिकारी, कर्मचारी पशु लेने से इंकार कर देते हैं, जिस पर पुलिस पशुओं को लोगों को सुपुर्दगी में दे देती है और सुपुर्दगी में लेने वाले लोग पशुओं को बेच देते हैं। इसके अलावा यदि कोई पशुपालक पशु को गोसदन को देना चाहे तो इंकार कर दिया जाता है, ऐसे में लोग पशु को गोसदन के पास छोड़कर चले जाते हैं। यह पशु पास के जंगल में चले जाते हैं।
तस्कर जंगल से पशुओं को पकड़कर वाहनों से बाहर ले जाते हैं। चर्चा है कि खुटार थाने का एक सिपाही तस्करों का संरक्षणदाता है। यह पशुओं को बाहर भिजवाने में तस्करों की मदद करता है। सीवीओ डॉ. इंद्रमनि का कहना है कि गोसदन में क्षमता के अनुरूप ही पशु रखे जाते हैं। खुटार एसओ इफ्तेखार अहमद का कहना है कि पशुओं की तस्करी की बात निराधार है।
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विनोवा भावे के भूदान यज्ञ आंदोलन से प्रभावित होकर खुटार के चौहान राजपरिवार की रानी ताजकुंवरि ने 383 उकछ़ जमीन दान में दे दी थी। बाद में इस जमीन पर राजकीय गोसदन बन गया। गोसदन की प्रबंध समिति के अध्यक्ष डीएम और मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सचिव होते हैं। गोसदन की लगभग डेढ़ सौ एकड़ जमीन प्रति वर्ष 18 से 20 लाख रुपये के ठेके पर दी जाती है, इसके अलावा नतेल आदि की नीलामी से भी 20 से 25 हजार रुपये की आय होती है। गोसदन के बैंक और डाकघर के खाते में एफडी सहित 50 लाख रुपये से अधिक जमा हैं। 383 एकड़ जमीन और लाखों की नगदी के बाद भी गोसदन में गायों की दशा बदतर है।
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तीन दिन पूर्व गोसदन में एक गाय की मौत हो गई थी। इसी रात एक और गाय ने दम तोड़ दिया। रविवार को भी एक गाय की मौत हो गई। गोसदन के पशुधन प्रसार अधिकारी डॉ. विवेक शुक्ला ने बताया कि एक गाय शुक्रवार को मरी थी और एक रविवार को मरी है। गाय बीमारी के कारण मरी हैं। अब कोई भी गाय बीमार नहीं है।
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गायों की मौत बीमारी के कारण हुई है। गायों के इलाज के लिए गोसदन में डॉक्टर मौजूद रहते हैं। यदि कोई गाय बीमार है तो उसका समुचित इलाज कराया जाएगा।
डॉ. इंद्रमनि मुख्य पशु चिकित्साधिकारी शाहजहांपुर
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गोसदन के जंगल से पशु तस्करी करा रहा सिपाही
0 गोसदन में पशु नहीं लेने पर जंगल में छोड़ जाते हैं लोग
पुवायां। गोसदन में पशुपालकों औैर पुलिस के पकड़े गए पशु नहीं लिए जाते हैं। संसाधन सीमित होने की बात कहते हुए पशुओं को लेने से इंकार कर दिया जाता है।
गोसदन में हमेशा पशुओं की संख्या सौ सवा सौ के आसपास ही रहती है। पुलिस पशुओं से भरा ट्रक आदि पकड़कर गोसदन लाती है तो गोसदन के अधिकारी, कर्मचारी पशु लेने से इंकार कर देते हैं, जिस पर पुलिस पशुओं को लोगों को सुपुर्दगी में दे देती है और सुपुर्दगी में लेने वाले लोग पशुओं को बेच देते हैं। इसके अलावा यदि कोई पशुपालक पशु को गोसदन को देना चाहे तो इंकार कर दिया जाता है, ऐसे में लोग पशु को गोसदन के पास छोड़कर चले जाते हैं। यह पशु पास के जंगल में चले जाते हैं।
तस्कर जंगल से पशुओं को पकड़कर वाहनों से बाहर ले जाते हैं। चर्चा है कि खुटार थाने का एक सिपाही तस्करों का संरक्षणदाता है। यह पशुओं को बाहर भिजवाने में तस्करों की मदद करता है। सीवीओ डॉ. इंद्रमनि का कहना है कि गोसदन में क्षमता के अनुरूप ही पशु रखे जाते हैं। खुटार एसओ इफ्तेखार अहमद का कहना है कि पशुओं की तस्करी की बात निराधार है।