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अल्लाह की बारगाह में अमन-चैन को उठे हजारों हाथ
शाहजहांपुर
Updated Sat, 18 Jul 2015 11:48 PM IST
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शनिवार की सुबह शाहजहांपुर में घर से निकलते ही मुस्लिम समाज का हर व्यक्ति एक ही दिशा में जाता दिखाई दिया। मानों पूरा शहर ही एक ही दिशा में बहा चला जा रहा हो। क्या बच्चा और क्या बूढ़ा, युवा या अधेड़ सभी लकालक कपड़ों से सजा सिर पर टोपी लगाए अल्लाह की बारगाह में पहुंचने को बेताब दिखाई दे रहा था। बड़े खुतबे यानी ईदगाह तक की दूरी कुछ अधिक थी, सो ईद की नमाज के समय (सुबह आठ बजे) तक पहुंचना मुश्किल लगा रहा था। रोजेदारों के उसी रेले में हमने भी अपने को छोड़ दिया और बहते हुए उस जगह के करीब पहुंच गए, जहां नमाज अदा की जाने वाली थी। तभी उद्घोषणा हुई कि नमाज शुरू होने में तीन-चार मिनट ही शेष रह गए हैं, इसलिए सभी अपनी जगह सुनिश्चित कर लें।
फिर क्या था जिसे जो जगह मिली वह उसी स्थान पर चटाई-चादर या फिर गमछा बिछाकर बैठने लगा। देखते ही देखते ईदगाह क्षेत्र का बहुत बड़ा हिस्सा रोजेदारों से भर गया। सड़कें भी पूरी तरह भर चुकी थीं। उधर से निकलना मुश्किल ही नहीं, बल्कि असंभव था। बड़े-बुजुर्गों के बीच में तीन-चार तक की उम्र के बच्चे भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। वैसे बच्चों को खुदा या ईश्वर का ही रूप माना जाता है, लेकिन ये बच्चे दूसरों को देखकर जिस मासूमियत से ईद की नमाज पढ़ रहे थे, उससे बहुत कुछ सीखा भी जा सकता था। जिधर नजर जा रही थी उधर नमाजी ही नमाजी दिखाई दे रहे थे।
शहर पेश इमाम मौलाना हुजूर अहमद मंजरी ने मुस्लिम भाइयों से अल्लाह के बताए नेक रास्ते पर चलने का संदेश देते हुए मुल्क और कौम की तरक्की के लिए नमाज अदा करानी शुरू की तो हजारों हाथ अल्लाह तआला से दुआएं मांगने को उठ गए। शांत भाव से करीब 25 मिनट तक नमाज और दुआ का दौर चला। इसके बाद वहां मौजूद डीएम-एसपी समेत जनप्रतिनिधियों को ईद की मुबारकबाद देने और उनकी शुभकामनाएं लेने को हर खास-ओ-आम दौड़ पड़ा। कुछ ने गले मिलकर इन यादगार लमहों को कैमरों और मोबाइल में कैद भी किया।
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जगह नहीं मिलने पर दुकानों पर पढ़ी नमाज
ईद की नमाज पढ़ने के लिए जिसे जहां जगह मिली वह वहीं व्यवस्था में जुट गया। कुछ ने ठेले तो किसी ने वहां लगी दुकानों पर ही नमाज अदा की। इन लोगों को यह मतलब नहीं था कि वह किस जगह बैठे हैं, आखिर इससे मतलब भी क्या था, बात तो अल्लाह को याद करने की ही थी।
बहुत याद आए मुश्शन खां
बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के सदस्य मुश्ताक अली खां उर्फ मुश्शन खां बहुत याद किए गए। वैसे उनकी याद तो अलविदा की नमाज के वक्त जामा मस्जिद में की गई, लेकिन ईद की नमाज के दौरान खास तौर पर उन्हें याद किया गया। बता दें कि मुश्शन खां तेेज-तर्रारी के कारण हमेशा ही याद किए जाते रहेंगे। वह प्रशासन से हमेशा चेतावनी भरे लहजे में ही बात करते थे, दो टूक बात कहने के कारण उनकी पहचान खास लोगों में हुआ करती थी। कुछ दिन पहले ही उनका इंतकाल हो गया था।
मजारों पर चढ़ाईं गुलाब की पंखुडिय़ां
ईद की नमाज के बाद लोगों ने गुलाब की पंखुड़ियों को कब्रिस्तान में बनी मजारों पर चढ़ाना शुरू किया। कब्रिस्तान के अलावा आसपास के क्षेत्र में जिस जगह भी मजारें बनी थीं, वहां उन पर फूल चढ़े दिखाई दिए। इसके अलावा लोगों ने मजारों पर अगरबत्तियां भी जलाईं।
बच्चियों ने डीएम-एसपी को भेंट किए गुलाब
ईद की नमाज के बाद जब लोग डीएम-एसपी समेत अन्य अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तथा राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों से गले मिलने की होड़ में थे, तब कुछ लोग छोटी बच्चियों को गोद में लेकर वहां पहुंच गए। बच्चों ने डीएम शुभ्रा सक्सेना और एसपी बबलू कुमार को गुलाब के फूूल भेंट किए। अधिकारियों ने भी बड़े लाड़-प्यार से उन्हें ईद की मुबारकबाद दी।
कब्रिस्तान की दीवार बनी बाधा
बड़े खुतबे के समीप कब्रिस्तान की चहारदीवारी ईद की नमाज में बहुत बड़ी बाधा बनी रही। दीवार के कारण कब्रिस्तान की खाली जमीन पर कोई नमाजी नहीं पहुंच सका, जिहाजा उन्हें सड़क पर नमाज पढ़ने को मजबूर होना पड़ा। खास बात यह भी थी कि चहारदीवारी में एक छोटा गेट ही लगाया गया है। अंदर की ओर सपा, बसपा और कांग्रेस के टेंट लगे थे। इनमें मौजूद जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों से मिलने के लिए भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने चेयरमैन तनवीर खां से अगले बार से कम से कम तीन गेट खुलवाने की मांग की है।
दलबल के साथ डटे रहे डीएम-एसपी
ईदगाह में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए स्वयं डीएम शुभ्रा सक्सेना और एसपी बबलू कुमार डटे रहे। उनके साथ एसपी सिटी राजेश कुमार, सीओ सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल यादव, एडीएम सदर एपी श्रीवास्तव, मुख्य अग्निशमन अधिकारी तेजवीर सिंह, नगर पालिका ईओ मुनेंद्र सिंह आदि व्यवस्था को दुरुस्त करने में लगे रहे। पीएसी जवानों नेे मेला क्षेत्र में मुस्तैद रहकर जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
राजनीतिक दलों के लगे पंडाल, पदाधिकारियों ने दी मुबारकबाद
शाहजहांपुर। ईदगाह पर मुस्लिमों से गले मिलकर उन्हें मुबारकबाद देने के लिए सपा, बसपा और कांग्रेस के पंडाल लगाए गए।
सपा के पंडाल में जिलाध्यक्ष एवं चेयरमैन तनवीर खां, महासचिव रणंजय सिंह यादव, पूर्व सांसद मिथिलेश कुमार, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप पांडेय, पंकज वर्मा, संजीव वर्मा, नौशाद कुरैशी, हफीज अंसारी, गुलजार कुरैशी, इमरान खान, अतीक अहमद, मो. निहाल, मुशीर खां, अतहर अली आदि लोगों से गले मिल रहे थे। वहीं, बसपा के पंडाल में नगर विधानसभा के जिलाध्यक्ष उदयवीर सिंह, पूर्व प्रत्याशी रहे नवाब फैजान अली, महासचिव महेश सागर, मो. असलम खां, राजीव गौतम, शमशुद्दीन, नरेंद्र गौतम, रमेश बाबू आदि ने लोगों से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। इसी तरह कांग्रेस के पंडाल में जिलाध्यक्ष कौशल मिश्रा, तसनीम अली खां, विनीत मिश्र, अनूप वर्मा, रामनाथ बघेला, रोहित सिंह, अजय मिश्रा उर्फ रिंकू आदि ने ईद पर लोगों से गले मिलकर मुबारकबाद दी।
जादू शो और ड्रैगन-झूलों से किया मनोरंजन
शाहजहांपुर। ईदगाह पर नमाज के बाद बच्चों और युवाओं ने मेले की ओर रुख किया। यहां सर्कस के लिए तैयार किए गए मैदान में इस बार मेला लगाया गया। इमरान खान की देखरेख में मेले की सुरक्षा के लिए दो गेट लगाए गए। मैदान में आइसक्रीम और अन्य खानपान के स्टाल और दुकानों के अलावा मनोरंजन की लिहाज से जादू शो, ड्रैगन और हवाई झूले के अलावा बच्चों के लिए कई तरह के छोटे झूले, कोलंबस (नाव) लगाई गई है। वहीं सड़क के किनारे हलवा-पराठा, खेल-खिलौनों, पोस्टर्स, चाट-पकौड़ी, गुब्बारों के स्टाल लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। बच्चों ने झूलों और आइसक्रीम आदि का खूब लुत्फ लिया। मेले के कारण इस मार्ग को यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।
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फिर क्या था जिसे जो जगह मिली वह उसी स्थान पर चटाई-चादर या फिर गमछा बिछाकर बैठने लगा। देखते ही देखते ईदगाह क्षेत्र का बहुत बड़ा हिस्सा रोजेदारों से भर गया। सड़कें भी पूरी तरह भर चुकी थीं। उधर से निकलना मुश्किल ही नहीं, बल्कि असंभव था। बड़े-बुजुर्गों के बीच में तीन-चार तक की उम्र के बच्चे भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे। वैसे बच्चों को खुदा या ईश्वर का ही रूप माना जाता है, लेकिन ये बच्चे दूसरों को देखकर जिस मासूमियत से ईद की नमाज पढ़ रहे थे, उससे बहुत कुछ सीखा भी जा सकता था। जिधर नजर जा रही थी उधर नमाजी ही नमाजी दिखाई दे रहे थे।
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शहर पेश इमाम मौलाना हुजूर अहमद मंजरी ने मुस्लिम भाइयों से अल्लाह के बताए नेक रास्ते पर चलने का संदेश देते हुए मुल्क और कौम की तरक्की के लिए नमाज अदा करानी शुरू की तो हजारों हाथ अल्लाह तआला से दुआएं मांगने को उठ गए। शांत भाव से करीब 25 मिनट तक नमाज और दुआ का दौर चला। इसके बाद वहां मौजूद डीएम-एसपी समेत जनप्रतिनिधियों को ईद की मुबारकबाद देने और उनकी शुभकामनाएं लेने को हर खास-ओ-आम दौड़ पड़ा। कुछ ने गले मिलकर इन यादगार लमहों को कैमरों और मोबाइल में कैद भी किया।
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जगह नहीं मिलने पर दुकानों पर पढ़ी नमाज
ईद की नमाज पढ़ने के लिए जिसे जहां जगह मिली वह वहीं व्यवस्था में जुट गया। कुछ ने ठेले तो किसी ने वहां लगी दुकानों पर ही नमाज अदा की। इन लोगों को यह मतलब नहीं था कि वह किस जगह बैठे हैं, आखिर इससे मतलब भी क्या था, बात तो अल्लाह को याद करने की ही थी।
बहुत याद आए मुश्शन खां
बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के सदस्य मुश्ताक अली खां उर्फ मुश्शन खां बहुत याद किए गए। वैसे उनकी याद तो अलविदा की नमाज के वक्त जामा मस्जिद में की गई, लेकिन ईद की नमाज के दौरान खास तौर पर उन्हें याद किया गया। बता दें कि मुश्शन खां तेेज-तर्रारी के कारण हमेशा ही याद किए जाते रहेंगे। वह प्रशासन से हमेशा चेतावनी भरे लहजे में ही बात करते थे, दो टूक बात कहने के कारण उनकी पहचान खास लोगों में हुआ करती थी। कुछ दिन पहले ही उनका इंतकाल हो गया था।
मजारों पर चढ़ाईं गुलाब की पंखुडिय़ां
ईद की नमाज के बाद लोगों ने गुलाब की पंखुड़ियों को कब्रिस्तान में बनी मजारों पर चढ़ाना शुरू किया। कब्रिस्तान के अलावा आसपास के क्षेत्र में जिस जगह भी मजारें बनी थीं, वहां उन पर फूल चढ़े दिखाई दिए। इसके अलावा लोगों ने मजारों पर अगरबत्तियां भी जलाईं।
बच्चियों ने डीएम-एसपी को भेंट किए गुलाब
ईद की नमाज के बाद जब लोग डीएम-एसपी समेत अन्य अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तथा राजनीतिक दलों के पदाधिकारियों से गले मिलने की होड़ में थे, तब कुछ लोग छोटी बच्चियों को गोद में लेकर वहां पहुंच गए। बच्चों ने डीएम शुभ्रा सक्सेना और एसपी बबलू कुमार को गुलाब के फूूल भेंट किए। अधिकारियों ने भी बड़े लाड़-प्यार से उन्हें ईद की मुबारकबाद दी।
कब्रिस्तान की दीवार बनी बाधा
बड़े खुतबे के समीप कब्रिस्तान की चहारदीवारी ईद की नमाज में बहुत बड़ी बाधा बनी रही। दीवार के कारण कब्रिस्तान की खाली जमीन पर कोई नमाजी नहीं पहुंच सका, जिहाजा उन्हें सड़क पर नमाज पढ़ने को मजबूर होना पड़ा। खास बात यह भी थी कि चहारदीवारी में एक छोटा गेट ही लगाया गया है। अंदर की ओर सपा, बसपा और कांग्रेस के टेंट लगे थे। इनमें मौजूद जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों से मिलने के लिए भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। लोगों ने चेयरमैन तनवीर खां से अगले बार से कम से कम तीन गेट खुलवाने की मांग की है।
दलबल के साथ डटे रहे डीएम-एसपी
ईदगाह में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए स्वयं डीएम शुभ्रा सक्सेना और एसपी बबलू कुमार डटे रहे। उनके साथ एसपी सिटी राजेश कुमार, सीओ सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल यादव, एडीएम सदर एपी श्रीवास्तव, मुख्य अग्निशमन अधिकारी तेजवीर सिंह, नगर पालिका ईओ मुनेंद्र सिंह आदि व्यवस्था को दुरुस्त करने में लगे रहे। पीएसी जवानों नेे मेला क्षेत्र में मुस्तैद रहकर जिम्मेदारी का निर्वहन किया।
राजनीतिक दलों के लगे पंडाल, पदाधिकारियों ने दी मुबारकबाद
शाहजहांपुर। ईदगाह पर मुस्लिमों से गले मिलकर उन्हें मुबारकबाद देने के लिए सपा, बसपा और कांग्रेस के पंडाल लगाए गए।
सपा के पंडाल में जिलाध्यक्ष एवं चेयरमैन तनवीर खां, महासचिव रणंजय सिंह यादव, पूर्व सांसद मिथिलेश कुमार, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रदीप पांडेय, पंकज वर्मा, संजीव वर्मा, नौशाद कुरैशी, हफीज अंसारी, गुलजार कुरैशी, इमरान खान, अतीक अहमद, मो. निहाल, मुशीर खां, अतहर अली आदि लोगों से गले मिल रहे थे। वहीं, बसपा के पंडाल में नगर विधानसभा के जिलाध्यक्ष उदयवीर सिंह, पूर्व प्रत्याशी रहे नवाब फैजान अली, महासचिव महेश सागर, मो. असलम खां, राजीव गौतम, शमशुद्दीन, नरेंद्र गौतम, रमेश बाबू आदि ने लोगों से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी। इसी तरह कांग्रेस के पंडाल में जिलाध्यक्ष कौशल मिश्रा, तसनीम अली खां, विनीत मिश्र, अनूप वर्मा, रामनाथ बघेला, रोहित सिंह, अजय मिश्रा उर्फ रिंकू आदि ने ईद पर लोगों से गले मिलकर मुबारकबाद दी।
जादू शो और ड्रैगन-झूलों से किया मनोरंजन
शाहजहांपुर। ईदगाह पर नमाज के बाद बच्चों और युवाओं ने मेले की ओर रुख किया। यहां सर्कस के लिए तैयार किए गए मैदान में इस बार मेला लगाया गया। इमरान खान की देखरेख में मेले की सुरक्षा के लिए दो गेट लगाए गए। मैदान में आइसक्रीम और अन्य खानपान के स्टाल और दुकानों के अलावा मनोरंजन की लिहाज से जादू शो, ड्रैगन और हवाई झूले के अलावा बच्चों के लिए कई तरह के छोटे झूले, कोलंबस (नाव) लगाई गई है। वहीं सड़क के किनारे हलवा-पराठा, खेल-खिलौनों, पोस्टर्स, चाट-पकौड़ी, गुब्बारों के स्टाल लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे थे। बच्चों ने झूलों और आइसक्रीम आदि का खूब लुत्फ लिया। मेले के कारण इस मार्ग को यातायात के लिए बंद कर दिया गया है।