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Shahjahanpur News: खेतों की मिट्टी बीमार, पोषक तत्वों की कमी
Tue, 20 May 2025 01:17 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Tue, 20 May 2025 01:17 AM IST
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खुटार के एक खेत से मृदा का नमूना लेती कृषि विभाग की टीम। फाइल फोटो
- फोटो : samba news
शाहजहांपुर। खेतों की मिट्टी बीमार है। इसमें पोषक तत्व मानक से काफी कम मिले हैं। इसका खुलासा मृदा नमूनों की रिपोर्ट से हुआ है। जिले में सबसे ज्यादा खराब हालत मिर्जापुर, कलान और जलालाबाद क्षेत्र की है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों को बगैर आराम दिए लगातार उत्पादन, फसल चक्र न अपनाने, पराली जलाने और जैविक खेती से मुंह मोड़ने से ऐसा हो रहा है। मिट्टी में जीवांश कार्बन, नत्रजन, फास्फेट, पोटाश की मात्रा समुचित नहीं है। बता दें कि शासन के निर्देश पर प्रति वर्ष जिले के सभी 15 ब्लॉक क्षेत्र के खेतों से लक्ष्य के अनुरूप मिट्टी के नमूने लिए जाते हैं। लैब में परीक्षण कर मृदा के पोषक तत्वों की स्थिति का पता लगाया जाता है। इनमें 70 प्रतिशत नमूने खरीफ और 30 प्रतिशत रबी के सीजन में लिए जाते हैं। वर्ष 2025-26 के लिए जिले को 30 हजार नमूने संग्रह का लक्ष्य मिला है। सभी ब्लॉकों से 21 हजार नमूने लिए जा चुके हैं।
वर्ष 2024-25 में हर ब्लॉक से एक-एक हजार नमूने लिए गए थे। इसकी लैब रिपोर्ट में मृदा में पोषक तत्वों की कमी सामने आई है। वर्ष 2023-24 में भी हर ब्लॉक से छह सौ मृदा नमूने लिए गए थे। इसकी रिपोर्ट में भी सभी ब्लॉकों में जीवांश कार्बन न्यून और नाइट्रोजन अति न्यून था। सभी ब्लॉकों में पोटेशियम का स्तर मध्यम पाया गया था। पुवायां, खुटार, सिंधौली और जलालाबाद में फास्फेट अति न्यून और शेष में न्यून था।
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मौजूदा साल में भावलखेड़ा, ददरौल, कांट, मदनापुर, तिलहर, जैतीपुर, खुदागंज, निगोही, पुवायां, सिंधौली, बंडा, खुटार ब्लॉक में जीवांश कार्बन की मात्रा न्यून है। पुवायां, सिंधौली, बंडा, खुटार में नत्रजन की मात्रा भी अति न्यून श्रेणी में है। बाकी ब्लॉकों में ये न्यून है। भावलखेड़ा, ददरौल, कांट में फास्फेट की मात्रा मध्यम है। बाकी ब्लॉक में यह न्यून श्रेणी में है। पोटाश की मात्रा अधिकतर ब्लॉकों में ठीक है। जलालाबाद, मिर्जापुर, कलान में जीवांश कार्बन, नत्रजन और फास्फेट की मात्रा अति न्यून मिली है। पोटाश की मात्रा जलालाबाद और कलान में न्यून, जबकि मिर्जापुर में मध्यम श्रेणी में मिली है। जलालाबाद और कलान तहसील में हर वर्ष बाढ़ आना भी इसका एक कारण है। संवाद
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फसल पर ये पड़ेगा असर
जीवांश कार्बन से मृदा में ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है। इससे पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। यूरिया डालने पर पौधा नाइट्रोजन को तभी ग्रहण करेगा, जब कार्बनिक जीवांश उससे क्रिया करेंगे। नाइट्रोजन से हरी पत्तियों और तनों के विकास में मदद मिलती है। फास्फोरस जड़ों के विकसित होने और फूल उत्पादन में सहायक होता है। पोटेशियम पौधों को बीमारियों, तनाव और कठोर मौसम की स्थिति से बचाने में मदद करता है।
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ऐसे कर सकते हैं सुधार
जिला कृषि अधिकारी विकास किशोर ने बताया कि किसान लगातार तीनों सीजन में फसल पैदा कर रहे हैं, जबकि सिर्फ धान-गेहूं की फसल करने की जगह बदल-बदलकर फसल उत्पादन करना चाहिए। गेहूं के बाद दलहनी फसल कर लेना खेत के लिए फायदेमंद होता है। हरी खाद, ढैंचा, सनई, मूंग खेत में लगानी चाहिए। 45 दिन की ढैंचा की फसल करें। उसे खेत में पलट दें। इससे कार्बन जीवांश की स्थिति सुधरती है। गोबर खाद, वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल खेत में करें। जीवांश कार्बन जितना बेहतर होगा, फसल का उत्पादन और मिट्टी की उर्वरकता उतनी ही बढ़ेगी। पराली बिलकुल न जलाएं। इससे मृदा का जीवांश नष्ट हो जाता है।
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मिट्टी के नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद किसानों को कार्ड बांटे जाएंगे। उन्हें जागरूक भी किया जाएगा कि फसल चक्र अपनाएं। पराली न जलाकर समय-समय पर मृदा परीक्षण कराने के साथ ही आवश्यक उपाय अपनाते रहें। विकास किशोर, जिला कृषि अधिकारी
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विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों को बगैर आराम दिए लगातार उत्पादन, फसल चक्र न अपनाने, पराली जलाने और जैविक खेती से मुंह मोड़ने से ऐसा हो रहा है। मिट्टी में जीवांश कार्बन, नत्रजन, फास्फेट, पोटाश की मात्रा समुचित नहीं है। बता दें कि शासन के निर्देश पर प्रति वर्ष जिले के सभी 15 ब्लॉक क्षेत्र के खेतों से लक्ष्य के अनुरूप मिट्टी के नमूने लिए जाते हैं। लैब में परीक्षण कर मृदा के पोषक तत्वों की स्थिति का पता लगाया जाता है। इनमें 70 प्रतिशत नमूने खरीफ और 30 प्रतिशत रबी के सीजन में लिए जाते हैं। वर्ष 2025-26 के लिए जिले को 30 हजार नमूने संग्रह का लक्ष्य मिला है। सभी ब्लॉकों से 21 हजार नमूने लिए जा चुके हैं।
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वर्ष 2024-25 में हर ब्लॉक से एक-एक हजार नमूने लिए गए थे। इसकी लैब रिपोर्ट में मृदा में पोषक तत्वों की कमी सामने आई है। वर्ष 2023-24 में भी हर ब्लॉक से छह सौ मृदा नमूने लिए गए थे। इसकी रिपोर्ट में भी सभी ब्लॉकों में जीवांश कार्बन न्यून और नाइट्रोजन अति न्यून था। सभी ब्लॉकों में पोटेशियम का स्तर मध्यम पाया गया था। पुवायां, खुटार, सिंधौली और जलालाबाद में फास्फेट अति न्यून और शेष में न्यून था।
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मौजूदा साल में भावलखेड़ा, ददरौल, कांट, मदनापुर, तिलहर, जैतीपुर, खुदागंज, निगोही, पुवायां, सिंधौली, बंडा, खुटार ब्लॉक में जीवांश कार्बन की मात्रा न्यून है। पुवायां, सिंधौली, बंडा, खुटार में नत्रजन की मात्रा भी अति न्यून श्रेणी में है। बाकी ब्लॉकों में ये न्यून है। भावलखेड़ा, ददरौल, कांट में फास्फेट की मात्रा मध्यम है। बाकी ब्लॉक में यह न्यून श्रेणी में है। पोटाश की मात्रा अधिकतर ब्लॉकों में ठीक है। जलालाबाद, मिर्जापुर, कलान में जीवांश कार्बन, नत्रजन और फास्फेट की मात्रा अति न्यून मिली है। पोटाश की मात्रा जलालाबाद और कलान में न्यून, जबकि मिर्जापुर में मध्यम श्रेणी में मिली है। जलालाबाद और कलान तहसील में हर वर्ष बाढ़ आना भी इसका एक कारण है। संवाद
फसल पर ये पड़ेगा असर
जीवांश कार्बन से मृदा में ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है। इससे पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है। यूरिया डालने पर पौधा नाइट्रोजन को तभी ग्रहण करेगा, जब कार्बनिक जीवांश उससे क्रिया करेंगे। नाइट्रोजन से हरी पत्तियों और तनों के विकास में मदद मिलती है। फास्फोरस जड़ों के विकसित होने और फूल उत्पादन में सहायक होता है। पोटेशियम पौधों को बीमारियों, तनाव और कठोर मौसम की स्थिति से बचाने में मदद करता है।
ऐसे कर सकते हैं सुधार
जिला कृषि अधिकारी विकास किशोर ने बताया कि किसान लगातार तीनों सीजन में फसल पैदा कर रहे हैं, जबकि सिर्फ धान-गेहूं की फसल करने की जगह बदल-बदलकर फसल उत्पादन करना चाहिए। गेहूं के बाद दलहनी फसल कर लेना खेत के लिए फायदेमंद होता है। हरी खाद, ढैंचा, सनई, मूंग खेत में लगानी चाहिए। 45 दिन की ढैंचा की फसल करें। उसे खेत में पलट दें। इससे कार्बन जीवांश की स्थिति सुधरती है। गोबर खाद, वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल खेत में करें। जीवांश कार्बन जितना बेहतर होगा, फसल का उत्पादन और मिट्टी की उर्वरकता उतनी ही बढ़ेगी। पराली बिलकुल न जलाएं। इससे मृदा का जीवांश नष्ट हो जाता है।
मिट्टी के नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद किसानों को कार्ड बांटे जाएंगे। उन्हें जागरूक भी किया जाएगा कि फसल चक्र अपनाएं। पराली न जलाकर समय-समय पर मृदा परीक्षण कराने के साथ ही आवश्यक उपाय अपनाते रहें। विकास किशोर, जिला कृषि अधिकारी