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डस्टबिन बनी रोडवेज बसों की शिकायत पेटिकाएं
ब्यूरो शाहजहांपुर।
Updated Wed, 27 Apr 2016 12:34 AM IST
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रोडवेज बस
- फोटो : अमर उजाला
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पेटिकाओं से निकल रहे रद्दी कागज, पुराने अखबार और पॉलीथीन बैग
अफसरों को छह माह से नहीं मिली कोई शिकायत अथवा सुझाव
रोडवेज बसों के संचालन से जुड़ी शिकायतें यात्रियों से संकलित करके उसी के अनुरूप सुधार के लिए बसों में शिकायत पेटिकाएं लगाई गईं थीं। मगर अब ये पेटिकाएं केवल डस्टबिन बनकर रह गई हैं। अब यात्री अपनी शिकायत पेटी में चिट्ठी डालने के बजाय टेलीफोन या ई-मेल के जरिए भेज रहे हैं। पिछले छह महीने में पेटिकाओं में एक भी शिकायत या सुझाव संबंधी पत्र नहीं मिला। इन पेटिकाओं में शिकायत के बजाय कागज के टुकड़े, पुराने अखबार और पॉलिथीन निकल रहे हैं।
यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों को जानने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लोकल रूट और लंबी दूरी सभी बसों मेें शिकायत एवं सुझाव पेटिकाएं लगी हैं। स्थानीय डिपो के बेड़े में शामिल निगम की 105 और अनुबंधित सभी 58 बसों में शिकायत पेटिकाएं लगी हैं। उनमें लगा ताला खोलने की जिम्मेदारी स्टेशन प्रबंधक और वर्कशॉप फोरमैन की है।
नई बसों में दिख रहे फर्स्ट एड बॉक्स
सफर के दौरान दुर्घटना होने पर घायल यात्रियों को उपचार की प्राथमिक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए फर्स्ट एड बॉक्स गिनी-चुनी नई बसों में दिख रहे हैं। फर्स्ट एड बॉक्स में कॉटन, बैंडेज, स्प्रिट, एंटीसेप्टिक लोशन, दर्द निवारक दवाएं आदि होनी चाहिए। पुरानी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स के केवल ढांचे दिखाई देते हैं, उनमें होता कुछ नहीं है।
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जमाना बदल चुका है। चिट्ठी-पत्री के दौर में शिकायत और सुझाव के लिए बस में पेटिकाओं की जरूरत थी। अब यात्रा के दौरान कोई असुविधा होने पर यात्री मोबाइल या ई-मेल करके अपनी शिकायत दर्ज करा देते हैं। इसके लिए बसों में टोल फ्री या अफसरों के सीयूजी नंबर लिखवा दिए हैं। शिकायतें मिलने की निश्चित संख्या नहीं हैं। महीने में औसतन आठ-दस शिकायतें अन्य माध्यमों से मिल रही हैं। - सुशील त्रिवेदी, स्टेशन प्रबंधक, शाहजहांपुर डिपो
अफसरों को छह माह से नहीं मिली कोई शिकायत अथवा सुझाव
रोडवेज बसों के संचालन से जुड़ी शिकायतें यात्रियों से संकलित करके उसी के अनुरूप सुधार के लिए बसों में शिकायत पेटिकाएं लगाई गईं थीं। मगर अब ये पेटिकाएं केवल डस्टबिन बनकर रह गई हैं। अब यात्री अपनी शिकायत पेटी में चिट्ठी डालने के बजाय टेलीफोन या ई-मेल के जरिए भेज रहे हैं। पिछले छह महीने में पेटिकाओं में एक भी शिकायत या सुझाव संबंधी पत्र नहीं मिला। इन पेटिकाओं में शिकायत के बजाय कागज के टुकड़े, पुराने अखबार और पॉलिथीन निकल रहे हैं।
यात्रा के दौरान होने वाली परेशानियों को जानने और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लोकल रूट और लंबी दूरी सभी बसों मेें शिकायत एवं सुझाव पेटिकाएं लगी हैं। स्थानीय डिपो के बेड़े में शामिल निगम की 105 और अनुबंधित सभी 58 बसों में शिकायत पेटिकाएं लगी हैं। उनमें लगा ताला खोलने की जिम्मेदारी स्टेशन प्रबंधक और वर्कशॉप फोरमैन की है।
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नई बसों में दिख रहे फर्स्ट एड बॉक्स
सफर के दौरान दुर्घटना होने पर घायल यात्रियों को उपचार की प्राथमिक सुविधा उपलब्ध कराने के लिए फर्स्ट एड बॉक्स गिनी-चुनी नई बसों में दिख रहे हैं। फर्स्ट एड बॉक्स में कॉटन, बैंडेज, स्प्रिट, एंटीसेप्टिक लोशन, दर्द निवारक दवाएं आदि होनी चाहिए। पुरानी बसों में फर्स्ट एड बॉक्स के केवल ढांचे दिखाई देते हैं, उनमें होता कुछ नहीं है।
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जमाना बदल चुका है। चिट्ठी-पत्री के दौर में शिकायत और सुझाव के लिए बस में पेटिकाओं की जरूरत थी। अब यात्रा के दौरान कोई असुविधा होने पर यात्री मोबाइल या ई-मेल करके अपनी शिकायत दर्ज करा देते हैं। इसके लिए बसों में टोल फ्री या अफसरों के सीयूजी नंबर लिखवा दिए हैं। शिकायतें मिलने की निश्चित संख्या नहीं हैं। महीने में औसतन आठ-दस शिकायतें अन्य माध्यमों से मिल रही हैं। - सुशील त्रिवेदी, स्टेशन प्रबंधक, शाहजहांपुर डिपो