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Shahjahanpur News: इक्के पर डुगडुगी बजाकर शाहजहांपुर में गूंजा था भारत छोड़ो का नारा

Sat, 08 Aug 2026 12:28 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 08 Aug 2026 12:28 AM IST
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The 'Quit India' slogan echoed in Shahjahanpur, proclaimed to the beat of a small drum from a horse-drawn carriage.
शाहजहांपुर। आठ अगस्त 1942 की रात... मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान से महात्मा गांधी ने अंग्रेजों से भारत छोड़ने का आह्वान किया। रेडियो पर इसकी खबर शाहजहांपुर पहुंची तो कांग्रेस कार्यकर्ता सक्रिय हो गए। अगले ही दिन शहर की गलियों में एक इक्का दौड़ने लगा। उस पर डुगडुगी बज रही थी और आवाज गूंज रही थी- खल्क खुदा की, मुल्क हिंदुस्तानियों का, हुक्म कांग्रेस कमेटी का...भारत छोड़ो आंदोलन छेड़ दिया गया है। बाजार बंद करो, अंग्रेजों के खिलाफ एकजुट हो जाओ।
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एसएस कालेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. विकास खुराना ने बताया कि एक इक्के पर मुन्नालाल गुप्ता और गौरी शंकर सवार थे। वे शहर में घूम-घूमकर लोगों को आंदोलन का संदेश दे रहे थे। जिस रास्ते से इक्का गुजरता, वहां लोगों में जोश भर जाता। सदर बाजार से कुछ पुलिसकर्मी भी इसके पीछे लग गए। सुनहरी मस्जिद के आगे जैसे ही इक्का कोतवाली गेट तक पहुंचा, पुलिस ने उसे रोक लिया।
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इस मामले में मुन्नालाल गुप्ता, गौरी शंकर अग्रवाल और मणिलाल खन्ना को गिरफ्तार कर लिया गया। गुदड़ी बाजार की दुकानें बंद कराने के आरोप में बाबूराम मुनीम को भी पुलिस ने पकड़ लिया।
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गांधीजी समेत बड़े नेताओं को किया गिरफ्तार
अगले ही दिन जब महात्मा गांधी और कांग्रेस के बड़े नेताओं की गिरफ्तारी की सूचना शाहजहांपुर पहुंची तो आंदोलन और उग्र हो गया। रोजा तक रेल लाइन उखाड़ दी गई। शहर से गुजरने वाली टेलीग्राफ लाइनों को भी ध्वस्त कर दिया गया। तत्कालीन जिलाधिकारी टीएन कौल ने अपनी पुस्तक माई ईयर थ्रू राज टू स्वराज में लिखा है कि उस समय ऐसा लगने लगा था, मानो सरकार का नामोनिशान ही मिट गया हो। नौ अगस्त को तलाउआ के मैदान पर विशाल जनसभा हुई। पंडित गोविंद बल्लभ पंत के दौरे ने आंदोलन में नया उत्साह भर दिया। दस अगस्त को छात्रों ने शहर में जुलूस निकाले। बसंत लाल खन्ना के नेतृत्व में निकाले गए एक जुलूस पर बहादुरगंज में पुलिस ने लाठीचार्ज भी किया।

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महिलाओं ने भी संभाली आंदोलन की कमान
भारत छोड़ो आंदोलन में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही। पुवायां तहसील के रहदेवा गांव निवासी झाऊलाल की पत्नी उमादेवी ने आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई। बाद में ब्रिटिश सरकार ने उन्हें तीन माह के कठोर कारावास की सजा दी।
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