फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   The mother regrets... if she had taken the children along, perhaps they wouldn't have died

Shahjahanpur News: मां को पछतावा... बच्चों को साथ ले जाती तो शायद उनकी जान न जाती

Fri, 28 Mar 2025 12:53 AM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर Updated Fri, 28 Mar 2025 12:53 AM IST
विज्ञापन
The mother regrets... if she had taken the children along, perhaps they wouldn't have died
शाहजहांपुर। चार बच्चों और पति को खोने के बाद कौशल्या को इस बात का पछतावा है कि जाते समय वह बच्चों को साथ क्यों नहीं ले गई? साथ ले जाती तो शायद उनकी जान न जाती। उसने इसकी पूरी कोशिश भी की थी। घर से निकलते वक्त बेटे को गोद में उठाया तो राजीव ने छीन लिया। उसे 20 रुपये का नोट और खिलौने देकर पुचकारने लगा था।
विज्ञापन

कौशल्या अपनी बेटी कीर्ति को लेने उसके स्कूल पहुंची तो उसने परीक्षाओं का हवाला देकर साथ आने से मना कर दिया था। बोली थी- मम्मी आप चली जाओ... पापा हमको मार थोड़ी न डालेंगे। मैं छोटे भाई को भी संभाल लूंगी। हालांकि, सनकी राजीव ने सभी के भरोसे को तोड़ दिया।
विज्ञापन

पोस्टमॉर्टम हाउस पहुंची कौशल्या ने बिलखते हुए बताया कि जिन बच्चों को पालने के लिए उसने खुद कभी चप्पल तक नहीं पहनी, राजीव ने ही उनका कत्ल कर दिया। दोपहर में उसने दाल-चावल बनाया था। राजीव ने उसे बेवजह पीटना शुरू कर दिया। इससे वह बेहोश हो गई थी। बच्चों को छोड़कर जाने का मन नहीं था, लेकिन पति के गुस्से से बचने के लिए वह मायके चली गई थीं। बच्चों को छोड़कर जाने के लिए वह खुद को दोषी मानती रहीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बच्चों की याद में रातभर सो नहीं पाई
कौशल्या ने बताया कि बच्चों के बिना उसका मायके में मन नहीं लग रहा था। रातभर उसे नींद नहीं आई। उसने ससुर को कॉल करके कहा था कि बच्चों को देखते रहना। उसने ससुर से इसकी शिकायत भी की। इस पर ससुर पृथ्वीराज बोले- दिनभर मजदूरी करने के बाद घर आए थे। रात 12 बजे तक कई बार घर में झांककर देखा था। बच्चों और राजीव को सोते देखकर वह खुद भी अपनी झोपड़ी में जाकर सो गए। सुबह तक सबकुछ खत्म हो गया था।
मुझे भी मार दो... इसी चीरघर में आएगी मेरी लाश
कौशल्या बोलीं कि हमें भी मार दो। नहीं मारोगे तो फंदे से लटककर जान दे दूंगी। इसी चीरघर में मेरी भी लाश आएगी। अब मैं जिंदा रहकर क्या करूंगी? पोस्टमॉर्टम हाउस पर वह चीखती रही और परिजन उसे संभालते रहे। महिला पुलिसकर्मियों ने भी उसे सांत्वना देने की कोशिश की।

बच्चों को पालने के लिए तैयार थे रिश्तेदार, पर राजीव को नहीं था मंजूरपरिवार की गरीबी और राजीव की मानसिक स्थिति को देखते हुए रिश्तेदार उनके बच्चों को पालने के लिए तैयार थे, पर राजीव को यह मंजूर नहीं था। कुछ समय पहले राजीव का बहनोई राजकुमार उसकी बेटी कीर्ति को अपने शाहबाद स्थित घर ले गया था। इस पर राजीव ने उसे कई बार कॉल की। कहा कि बेटी को वापस छोड़ जाओ, वरना तुम्हारे घर में आग लगा देंगे। इसके बाद राजकुमार कीर्ति को घर छोड़ गए थे।
कहता था राजीव... सबको मारकर मर जाऊंगा
हादसे से पहले 14 साल तक राजीव पत्नी और बच्चों के साथ गरीबी के बावजूद हंसी-खुशी बसर करता था। कौशल्या के मुताबिक, पहले वह बच्चों को बहुत चाहता था। हादसे के बाद उसका खुद पर नियंत्रण नहीं रह गया था। वह अचानक हिंसक हो जाता था। कई बार पुलिस भी बुलानी पड़ी थी। स्थिति को देखते हुए पुलिस भी समझा-बुझाकर लौट जाती थी। अक्सर कहता था कि सबको मारकर वह खुद मर जाएगा। हालांकि, वह ऐसा कर ही देगा, इसका बिल्कुल यकीन नहीं था।

सल्फाॅस की गोलियां भी लाया था
राजीव के दिमाग में आत्मघाती विचार काफी समय से चल रहे थे। एक बार वह सल्फाॅस की गोलियां भी ले आया था। कौशल्या ने किसी तरह उनकाे तालाब में फेंक दिया था। यह बात पता चलने पर उसने कौशल्या को पीटा भी था। उसने कहा था कि कितनी बार फेंकोगी? तुम्हें मार डालूंगा और जेल चला जाऊंगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed