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Shahjahanpur News: बरकतों वाला महीना नजदीक... खरीदारी ने पकड़ी रफ्तार
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सैयद सैफ हसन, शहर काजी।
शाहजहांपुर। बरकतों और रहमतों वाला महीना रमजान नजदीक आ गया है। 19 फरवरी से रमजान शुरू होने की संभावना है। मुकद्दस महीने के नजदीक आने पर बाजार में खरीदारी शुरू हो गई है। सूत-फेनी, सेंवई की दुकानें भी सज गईं हैं। कई तरह की खजूरों ने बाजार में दस्तक दी है।
रमजान को देखते हुए आम दिनों की अपेक्षा चहल-पहल ज्यादा रही। नौकरीपेशा लोगों ने रोजा रखने के लिए खरीदारी शुरू की। बहादुरगंज, लाल इमली चौराहा समेत कई स्थानों पर सेंवई-सूतफेनी की दुकानों पर भीड़ रही। व्यापारी इमरान ने बताया कि सेंवई 70 रुपये किलो और सूत-फेनी 140 रुपये किलो बिक रही है।
इसी तरह खजूर की मांग भी बढ़ गई है। खजूर व्यापारी जिया उल्ला खान ने बताया कि सुगई खजूर काफी स्वादिष्ट होता है। यह 550 से प्रारंभ होकर 750 रुपये किलो तक है। इसी तरह कलमी खजूर का दाम 500 से 800 रुपये किलो है। अजबा खजूर 1400 से 1800 रुपये में उपलब्ध है। जबकि कीमिया खजूर के दाम में भी उछाल आया है। इसका पैकेट 350 रुपये का है। रमजान को देखते हुए खजूर की कई तरह की वैरायटी बाजार में आई हैं।
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मस्जिदों में भी तैयारी शुरू
रमजान के चलते एक ओर बाजार में चहल-पहल बढ़ गई है। दूसरी ओर मस्जिदों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के साथ ही नमाजियों के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। टाउन हॉल मस्जिद, मदीना मस्जिद जलालनगर, तलैया वाली मस्जिद, गंज शहीदों वाली मस्जिद, ऊंची मस्जिद, महुआ वाली मस्जिद, लाल इमली वाली मस्जिद समेत कई जगहों पर तरावीह नमाज पढ़ाने के लिए हाफिजों को जिम्मेदारी दी गई है। शहर काजी सैयद सैफ के अनुसार, चांद के दीदार होने पर रात में तरावीह नमाज शुरू हो जाएगी।
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मदरसों में बच्चों की छुट्टी की गई
खुदागंज। रमजान के महीने को देखते हुए मस्जिदों की साफ-सफाई और रंग-रोगन शुरू कर दिया है। गौसिया मस्जिद, जामा मस्जिद और नूरी मस्जिद में पूरे दिन तैयारी चलती रही। मदरसों में रमजान को देखते हुए बच्चों का अवकाश घोषित कर दिया है। मदरसा एहसानुल बरकात अकबरी के प्रबंधक हाजी हसनैन खान, मदरसा सूफी इकतदार आलम की प्रबंधक गजाला फातिमा व मदरसा ख्वाजा हसन के प्रबंधक फैजान हसन लियाकती ने रमजान की फजीलत पर प्रकाश डाला। संवाद
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रोजा नफ्स की पाकीजगी का जरिया है। रमजान उल मुबारक बरकतों और रहमतों का महीना है। इस महीने में अल्लाह तआला अपनी खास रहमतों की बारिश करता है। रमजान में शैतान को कैद कर इंसान के लिए जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। इस मुबारक महीने में रोजेदार के दिल में दूसरों के लिए हमदर्दी और मदद का खास जज्बा पैदा हो जाता है।
-सैयद सैफ हसन, शहर काजी
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रमजान को देखते हुए आम दिनों की अपेक्षा चहल-पहल ज्यादा रही। नौकरीपेशा लोगों ने रोजा रखने के लिए खरीदारी शुरू की। बहादुरगंज, लाल इमली चौराहा समेत कई स्थानों पर सेंवई-सूतफेनी की दुकानों पर भीड़ रही। व्यापारी इमरान ने बताया कि सेंवई 70 रुपये किलो और सूत-फेनी 140 रुपये किलो बिक रही है।
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इसी तरह खजूर की मांग भी बढ़ गई है। खजूर व्यापारी जिया उल्ला खान ने बताया कि सुगई खजूर काफी स्वादिष्ट होता है। यह 550 से प्रारंभ होकर 750 रुपये किलो तक है। इसी तरह कलमी खजूर का दाम 500 से 800 रुपये किलो है। अजबा खजूर 1400 से 1800 रुपये में उपलब्ध है। जबकि कीमिया खजूर के दाम में भी उछाल आया है। इसका पैकेट 350 रुपये का है। रमजान को देखते हुए खजूर की कई तरह की वैरायटी बाजार में आई हैं।
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मस्जिदों में भी तैयारी शुरू
रमजान के चलते एक ओर बाजार में चहल-पहल बढ़ गई है। दूसरी ओर मस्जिदों में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के साथ ही नमाजियों के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। टाउन हॉल मस्जिद, मदीना मस्जिद जलालनगर, तलैया वाली मस्जिद, गंज शहीदों वाली मस्जिद, ऊंची मस्जिद, महुआ वाली मस्जिद, लाल इमली वाली मस्जिद समेत कई जगहों पर तरावीह नमाज पढ़ाने के लिए हाफिजों को जिम्मेदारी दी गई है। शहर काजी सैयद सैफ के अनुसार, चांद के दीदार होने पर रात में तरावीह नमाज शुरू हो जाएगी।
मदरसों में बच्चों की छुट्टी की गई
खुदागंज। रमजान के महीने को देखते हुए मस्जिदों की साफ-सफाई और रंग-रोगन शुरू कर दिया है। गौसिया मस्जिद, जामा मस्जिद और नूरी मस्जिद में पूरे दिन तैयारी चलती रही। मदरसों में रमजान को देखते हुए बच्चों का अवकाश घोषित कर दिया है। मदरसा एहसानुल बरकात अकबरी के प्रबंधक हाजी हसनैन खान, मदरसा सूफी इकतदार आलम की प्रबंधक गजाला फातिमा व मदरसा ख्वाजा हसन के प्रबंधक फैजान हसन लियाकती ने रमजान की फजीलत पर प्रकाश डाला। संवाद
रोजा नफ्स की पाकीजगी का जरिया है। रमजान उल मुबारक बरकतों और रहमतों का महीना है। इस महीने में अल्लाह तआला अपनी खास रहमतों की बारिश करता है। रमजान में शैतान को कैद कर इंसान के लिए जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं। इस मुबारक महीने में रोजेदार के दिल में दूसरों के लिए हमदर्दी और मदद का खास जज्बा पैदा हो जाता है।
-सैयद सैफ हसन, शहर काजी

सैयद सैफ हसन, शहर काजी।