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भू माफिया ने साजिशन गायब करा दीं मऊ रसूलपुर की खसरा-खतौनियां

Tue, 22 Sep 2020 01:56 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2020 01:56 AM IST
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The land mafia has disappeared the measles-letters of Mau Rasulpur
जलालाबाद/अल्हागंज। तहसील के राजस्व रिकॉर्ड से ग्राम पंचायत मऊ रसूलपुर की खसरा-खतौनियां करीब डेढ़ दशक से गायब हैं। इस कारण गांव के करीब दो सौ गरीब परिवारों को केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है। गांव में तमाम परिवार झोपड़ियों में गुजर-बसर कर रहे हैं, लेकिन जमीनों के अभिलेख नहीं मिलने से उन्हें आवास स्वीकृत नहीं हुए। इसी तरह तमाम वृद्ध, दिव्यांग और विधवाएं पेंशन से वंचित हैं। गांव में तमाम लघु-सीमांत किसान हैं, लेकिन वह सम्मान निधि के लिए आवेदन नहीं कर सके। यही नहीं, गांव के किसान गेहूं, धान जैसी उपज का समर्थन मूल्य भी हासिल नहीं कर पा रहे हैं। ग्राम प्रधान का कहना है कि कुछ दबंग भू माफिया ने सरकारी जमीनों पर किया गया कब्जा बरकरार रखने को राजस्व कर्मियों की सांठगांठ से साजिशन अभिलेख गायब करा दिए।
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जेल जा चुके दो लेखपाल, चकबंदी में रुकावट
अल्हागंज। कस्बे के विवेकानंद इंटर कॉलेज की काफी जमीन मऊ रसूलपुर में है, लेकिन उस पर भूमाफिया ने कब्जा जमा रखा है। इसी तरह ग्राम पंचायत की अन्य जमीनें भी अवैध कब्जों के शिकंजे में हैं। सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2006 में इन्हीं भूमाफिया ने गांव के राजस्व अभिलेख और नक्शा गायब करा दिया ताकि उनके कब्जे की जमीनों पर कोई हक नहीं जता सके। कॉलेज की प्रबंध समिति के अध्यक्ष राहुल मिश्रा के अनुसार गाटा संख्या 327/1 और 404/1 पर कॉलेज की जमीन दर्ज है। कागजात नहीं मिलने से चकरोड की पैमाइश और रास्ते के विवाद सुलझ नहीं रहे। बताते हैं कि वर्ष 2010 में मऊ रसूलपुर समेत मऊ शाहजहांपुर और हुल्लापुर में चकबंदी कार्य शुरू होने पर तीनों गांवों की खसरा-खतौनियां चकबंदी विभाग ने इकट्ठा कराईं, लेकिन उसी दौरान मऊ रसूलपुर के अभिलेख गायब हो गए। इस मामले में तत्कालीन राजस्व अधिकारियों द्वारता दर्ज कराई गई एफआईआर पर पुलिस ने चकबंदी लेखपाल अमित यादव और हल्का लेखपाल रामसिंह को जेल भेज दिया था। तब से इन तीनों गांवों में चकबंदी भी नहीं हो सकी। गत शनिवार को यह मामला थाना समाधान दिवस में चर्चा मेें आया, जब क्षेत्र के सपा नेता रामवीर सोमवंशी ने अधिकारियों से गांव की नई खसरा-खतौनियां तैयार कराने का अनुरोध किया।
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हमारे खेत में तिल की फसल खड़ी थी, जिसे गांव के दबंग पिता-पुत्र जबरन जोतकर नष्ट कर दिया। गत 18 अगस्त को एसडीएम से शिकायत की, लेकिन नक्शा और खसरा खतौनी न होने से विवाद का निस्तारण नहीं हो सका। गांव के हाफिज, भोला कश्यप, अनवार खां आदि की जमीनों पर माफिया ने अवैध कब्जे कर रखे हैं।
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- गुलाब सिंह, मऊ रसूलपुर
गांव में सामुदायिक शौचालय का निर्माण होना है। इसके लिए पुराने हो चुके भवन को ढहाकर वहां निर्माण कराने की योजना है, लेकिन खसरा-खतौनी की कमी भूमि के चिन्हांकन में आड़े आ रही है। इसीलिए शासन से धनराशि नहीं मिल पा रही है। दस साल पहले दो लेखपाल जेल जा चुके हैं। करीब डेढ़ साल पहले राजस्व परिषद में रिकॉर्ड गायब होने की शिकायत की। तत्कालीन डीएम ने जलालाबाद के तहसीलदार का जवाब तलब किया, लेकिन बाद में कुछ नहीं हुआ। उर्दू में तैयार गांव का नजरी नक्शा माल खाने में है, लेकिन उसे हिंदी में तैयार नहीं कराया जा रहा।
- शांताराम वर्मा, प्रधान, मऊ रसूलपुर
गांव के राजस्व अभिलेख नहीं मिलने के कारण वहां केे सभी कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस समस्या के निस्तारण के लिए कई बार अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं हो सकी है।

- अशोक कुमार, कानूनगो, अल्हागंज
समस्या के निस्तारण को राजस्व परिषद से कई बार पत्राचार किया जा चुका है। गांव का नया नक्शा बनवाने के लिए अभिलेखागार से पुरानी खतौनी निकलवाकर रुड़की भिजवाई गई, लेकिन अभी नक्शा नहीं बन पाया है। कुछ समय पहले भी राजस्व परिषद को रिमाइंडर भेजा जा चुका है।
- अजय कुमार, तहसीलदार, जलालाबाद
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