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किसानों के लिए मजाक बनी शासन की मदद
शाहजहांपुर।
Updated Sat, 01 Aug 2015 08:46 PM IST
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रबी सीजन में बेमौसम की बरसात और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को प्रशासन द्वारा दी गई राहत राशि तमाम किसानों के लिए मजाक बनकर रह गई है। हालांकि, गत अप्रैल से अब तक 2.10 लाख किसानों को करीब 60.70 करोड़ रुपये से अधिक सहायता दी जा चुकी है। बावजूद इसके फसली नुकसान सहने वाले तमाम गांवों के हजारों किसान पैसा और पहुंच के अभाव में अफसरों की चौखट नाप रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं। जिन किसानों को चेक मिले भी, वह नुकसान की तुलना में काफी कम धनराशि के हैं।
60 हजार से ज्यादा किसान राहत पाने से रह गए वंचित
जिले में विभिन्न श्रेणियों के करीब 3.75 लाख किसान हैं। कृषि विभाग का मानना है कि गेहूं की फसल में नुकसान सभी किसानों को उठाना पड़ा, लेकिन प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए कम जोत वाले लघु और सीमान्त कृषक। बड़े फार्मरों ने गेहूं के खेत खाली करके अपनी पूंजी से खरीफ सीजन की तैयारी शुरू कर दी। इसके विपरीत छोटे किसानों ने गेहूं बेंचकर धान की पौध तैयार करने का इरादा कर रखा था। ऐसे किसान हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं क्योंकि कृषि निवेश मद में मिली आर्थिक सहायता रबी सीजन पर चढ़ा कर्ज उतारने की भेंट चढ़ गई। करीब 60 हजार ऐसे किसान हैं जो फसली नुकसान उठाने के बावजूद अभी तक आर्थिक सहायता मिलने की राह तक रहे हैं।
तहसीलवार राहत चेक वितरण: एक नजर
---------------------------
तहसील किसान धनराशि करोड़ रुपये
0 सदर 63502 15.94
0 तिलहर 55731 12.16
0 पुवायां 53023 20.70
0 जलालाबाद 37852 11.89
अब नौगवां बरनई के किसानों ने मांगा मुआवजा
जिले की विभिन्न तहसीलों से किसानों द्वारा मुआवजा मांगें जाने की आवाज लगातार उठ रही है। इसी कड़ी में सदर तहसील के गांव नौगवां बरनई निवासी महेश चंद्र, ईशपाल, अहिबरन लाल, देवकुमार, ओमकार, मलिखान, दाताराम, दयाराम, मीरा देवी, अवधेश, धनपाल आदि किसानों ने डीएम के नाम ज्ञापन देकर आर्थिक सहायता दिलाने की गुहार की है। ज्ञापन में कहा गया है कि गेहूं की फसल नष्ट होने के बदले आर्थिक सहायता के चेक क्षेत्र के लेखपाल ने अभी तक उपलब्ध नहीं कराए हैं।
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सभी प्रभावित किसानों को मिलेगी आर्थिक सहायता
ÒȤसली नुकसान से प्रभावित कोई भी किसान शासन से कृषि निवेश मद में दी जा रही आर्थिक सहायता पाने से वंचित नहीं रखा जाएगा। राजस्व विभाग से मिली प्रभावित फसल रकबा की रिपोर्ट के आधार पर शासन को 121 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी गई थी। इस मद में शासन स्तर से बिना किसी रुकावट के धनराशि लगातार प्राप्त हो रही है। आर्थिक सहायता का वितरण शासन के दिशा निर्देशों के अनुरूप कराया जा रहा है।Ó
- पीके श्रीवास्तव, आपदा राहत प्रभारी/एडीएम वित्त एवं राजस्व
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60 हजार से ज्यादा किसान राहत पाने से रह गए वंचित
जिले में विभिन्न श्रेणियों के करीब 3.75 लाख किसान हैं। कृषि विभाग का मानना है कि गेहूं की फसल में नुकसान सभी किसानों को उठाना पड़ा, लेकिन प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए कम जोत वाले लघु और सीमान्त कृषक। बड़े फार्मरों ने गेहूं के खेत खाली करके अपनी पूंजी से खरीफ सीजन की तैयारी शुरू कर दी। इसके विपरीत छोटे किसानों ने गेहूं बेंचकर धान की पौध तैयार करने का इरादा कर रखा था। ऐसे किसान हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं क्योंकि कृषि निवेश मद में मिली आर्थिक सहायता रबी सीजन पर चढ़ा कर्ज उतारने की भेंट चढ़ गई। करीब 60 हजार ऐसे किसान हैं जो फसली नुकसान उठाने के बावजूद अभी तक आर्थिक सहायता मिलने की राह तक रहे हैं।
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तहसीलवार राहत चेक वितरण: एक नजर
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तहसील किसान धनराशि करोड़ रुपये
0 सदर 63502 15.94
0 तिलहर 55731 12.16
0 पुवायां 53023 20.70
0 जलालाबाद 37852 11.89
अब नौगवां बरनई के किसानों ने मांगा मुआवजा
जिले की विभिन्न तहसीलों से किसानों द्वारा मुआवजा मांगें जाने की आवाज लगातार उठ रही है। इसी कड़ी में सदर तहसील के गांव नौगवां बरनई निवासी महेश चंद्र, ईशपाल, अहिबरन लाल, देवकुमार, ओमकार, मलिखान, दाताराम, दयाराम, मीरा देवी, अवधेश, धनपाल आदि किसानों ने डीएम के नाम ज्ञापन देकर आर्थिक सहायता दिलाने की गुहार की है। ज्ञापन में कहा गया है कि गेहूं की फसल नष्ट होने के बदले आर्थिक सहायता के चेक क्षेत्र के लेखपाल ने अभी तक उपलब्ध नहीं कराए हैं।
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सभी प्रभावित किसानों को मिलेगी आर्थिक सहायता
ÒȤसली नुकसान से प्रभावित कोई भी किसान शासन से कृषि निवेश मद में दी जा रही आर्थिक सहायता पाने से वंचित नहीं रखा जाएगा। राजस्व विभाग से मिली प्रभावित फसल रकबा की रिपोर्ट के आधार पर शासन को 121 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी गई थी। इस मद में शासन स्तर से बिना किसी रुकावट के धनराशि लगातार प्राप्त हो रही है। आर्थिक सहायता का वितरण शासन के दिशा निर्देशों के अनुरूप कराया जा रहा है।Ó
- पीके श्रीवास्तव, आपदा राहत प्रभारी/एडीएम वित्त एवं राजस्व