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रेलवे स्टेशन-बस स्टैंड समेत सरकारी दफ्तरों में आग बुझाने के इंतजाम नाकाफी
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शाहजहांपुर। लखनऊ के होटल में आग लगने के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर अग्निशमन विभाग अस्पताल, मॉल और होटलों की जांच कर रहा है। लेकिन सरकारी भवनों की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। यहां पर मानक तक पूरे नहीं हो रहे हैं। सरकारी दफ्तरों में आग बुझाने के पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। नगर निगम, विकास भवन, एसपी दफ्तर, रेलवे स्टेशन, रोडवेज बस स्टैंड आदि में आग बुझाने के इंतजाम जरूरत पड़ने पर नाकाफी साबित हो सकते हैं। इन जगहों पर रोजाना सैकड़ों लोगों की भीड़ पहुंचती है।
आग बुझाने वाली बाल्टियों में पनप रहे मच्छर
रेलवे स्टेशन पर कई बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। कोरोना काल से पहले जीआरपी थाने के आगे पेड़ के नीचे छह बाल्टियों में रेता भरकर रखी गईं थीं। अब ये बाल्टियां पार्सल कार्यालय के कोने में पड़ी हैं जिनमें पानी भरे होने से मच्छर पनप रहे। कुछ बाल्टियों को लोगों ने थूकदान बना दिया है। रेलवे स्टेशन पर अलग-अलग विभागों में अग्निशमन यंत्र लगे हैं। इन्हें चलाने का प्रशिक्षण कर्मचारियों को नहीं दिया गया। पूर्वोत्तर रेलवे पर ट्रेनों का संचालन शुरू होने के बाद भी आग से बचाव के लिए इंतजाम नहीं हैं।
रोडवेज बस अड्डे की व्यवस्थाएं भी फेल
107 सरकारी व 80 अनुबंधित बसों का संचालन कराने वाला शाहजहांपुर डिपो अपने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सतर्क नहीं है। रोडवेज बस अड्डे पर एक भी अग्निशमन यंत्र नहीं लगा है। यहां पर ऐसी व्यवस्था भी नहीं है, जिससे आग लगने पर पानी डालकर बुझाया जा सकें। परिसर में लगे नल तक पर्याप्त पानी नहीं देते हैं। वहीं, दूसरी तरफ रोडवेज की कुछेक बसों को छोड़कर अधिकतर में अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं।
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विकास भवन में अग्निशमन यंत्र एक्सपायर
विकास भवन सभागार में बने हॉल में आए दिन मंत्री और विधायक और जिलास्तरीय अधिकारियों की बैठक होती है। सीडीओ समेत करीब 20 अफसरों के कार्यालय होने के चलते फरियादी भी बड़ी संख्या में आते हैं। भवन के तीनों फ्लोरों में आठ-आठ अग्निशमन यंत्र लगे हैं। इनकी रीफलिंग की तिथि निकल चुकी है। छह जनवरी 2020 से छह जनवरी 2021 तक की स्लिप अग्निशमन यंत्रों पर लगी हैं।
एसपी आफिस : आग बुझाने के लिए रखीं बाल्टियों में जम गई बालू
एसपी आफिस में कार्यालय के मुख्य गेट पर तीन बालू भरी बाल्टियां रखी हैं। उसकी रेत तक जम गई। आग लगने पर पहले जमी बालू को खोदना पड़ेगा। इसी तरह अग्निशमन यंत्र भवन में लगे हैं, लेकिन उसकी तिथि स्पष्ट नहीं है। यंत्रों पर धूल जरूर जमी है।
नगर निगम दफ्तर: आग बुझाने के इंतजाम नहीं, रास्ते भी संकरे
नगर निगम के कार्यालय में नगर आयुक्त कार्यालय के बगल में हॉल में अपर नगर आयुक्त, सहायक नगर आयुक्त आदि बैठते हैं। हॉल भी बना है, जहां पर दाखिल खारिज से लेकर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र समेत कई काम होते हैं। उस हॉल के लिए दो रास्ते हैं और दोनों ही काफी संकरे हैं। आग लगने पर यहां से कर्मचारियों व आम लोगों का निकलना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा पूरे हॉल व आसपास अग्निशमन यंत्र तक नहीं लगाए हैं। इमरजेंसी रास्ते का इंतजाम भी नहीं किया गया है।
सीएमओ आफिस : व्यवस्थाएं दुरुस्त पर धूल फांक रहे यंत्र
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में आग से बचाव के लिए इंतजाम काफी बेहतर हैं। इन उपकरणों पर धूल जम गई। जून में आग से बुझाने के लिए मॉकड्रिल होने पर ही शायद पाइप को खोला गया था। कार्यालय में आपातकालीन द्वार तक नहीं बना है। भवन में एक मात्र गेट है, जिसे पूरा नहीं खोला जाता है।
दो महीने पहले ही कराया था निरीक्षण
जिले के सरकारी भवनों का दो महीने पहले ही निरीक्षण कराया था। तब अग्निशमन यंत्र चलते हुए पाए थे। अन्य उपकरण जैसे रील, अलार्म, डिटेक्टर आदि कुछ भवनों में नहीं मिले थे। उसके लिए विभाग अपने कार्यालय से फंड की मांग करते हैं। अग्निशमन यंत्र पर लगी चिट कंपनियां अपने स्तर से लगाती हैं। रेहान अली, सीएफओ
-20 से 25 आग की घटनाएं महीने में जिले में होती हैं।
-800 लगभग आग के मामले पूरे साल में दर्ज होते हैं।
-अप्रैल और मई महीने में सबसे ज्यादा आग की घटनाएं होती हैं।
ये इंतजाम होने चाहिए
-आग बुझाने के लिए पानी का टैंक छत पर या अंडरग्राउंड होना चाहिए।
-फायर के पंप, जिसमें प्रेशर से पानी निकलता हो।
-हौज रील होना भी जरूरी है।
-अलार्म और डिटेक्टर भी लगे होने चाहिए।
-अग्निशमन यंत्र भी लगे होने चाहिए।
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आग बुझाने वाली बाल्टियों में पनप रहे मच्छर
रेलवे स्टेशन पर कई बार आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। कोरोना काल से पहले जीआरपी थाने के आगे पेड़ के नीचे छह बाल्टियों में रेता भरकर रखी गईं थीं। अब ये बाल्टियां पार्सल कार्यालय के कोने में पड़ी हैं जिनमें पानी भरे होने से मच्छर पनप रहे। कुछ बाल्टियों को लोगों ने थूकदान बना दिया है। रेलवे स्टेशन पर अलग-अलग विभागों में अग्निशमन यंत्र लगे हैं। इन्हें चलाने का प्रशिक्षण कर्मचारियों को नहीं दिया गया। पूर्वोत्तर रेलवे पर ट्रेनों का संचालन शुरू होने के बाद भी आग से बचाव के लिए इंतजाम नहीं हैं।
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रोडवेज बस अड्डे की व्यवस्थाएं भी फेल
107 सरकारी व 80 अनुबंधित बसों का संचालन कराने वाला शाहजहांपुर डिपो अपने यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सतर्क नहीं है। रोडवेज बस अड्डे पर एक भी अग्निशमन यंत्र नहीं लगा है। यहां पर ऐसी व्यवस्था भी नहीं है, जिससे आग लगने पर पानी डालकर बुझाया जा सकें। परिसर में लगे नल तक पर्याप्त पानी नहीं देते हैं। वहीं, दूसरी तरफ रोडवेज की कुछेक बसों को छोड़कर अधिकतर में अग्निशमन यंत्र नहीं लगे हैं।
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विकास भवन में अग्निशमन यंत्र एक्सपायर
विकास भवन सभागार में बने हॉल में आए दिन मंत्री और विधायक और जिलास्तरीय अधिकारियों की बैठक होती है। सीडीओ समेत करीब 20 अफसरों के कार्यालय होने के चलते फरियादी भी बड़ी संख्या में आते हैं। भवन के तीनों फ्लोरों में आठ-आठ अग्निशमन यंत्र लगे हैं। इनकी रीफलिंग की तिथि निकल चुकी है। छह जनवरी 2020 से छह जनवरी 2021 तक की स्लिप अग्निशमन यंत्रों पर लगी हैं।
एसपी आफिस : आग बुझाने के लिए रखीं बाल्टियों में जम गई बालू
एसपी आफिस में कार्यालय के मुख्य गेट पर तीन बालू भरी बाल्टियां रखी हैं। उसकी रेत तक जम गई। आग लगने पर पहले जमी बालू को खोदना पड़ेगा। इसी तरह अग्निशमन यंत्र भवन में लगे हैं, लेकिन उसकी तिथि स्पष्ट नहीं है। यंत्रों पर धूल जरूर जमी है।
नगर निगम दफ्तर: आग बुझाने के इंतजाम नहीं, रास्ते भी संकरे
नगर निगम के कार्यालय में नगर आयुक्त कार्यालय के बगल में हॉल में अपर नगर आयुक्त, सहायक नगर आयुक्त आदि बैठते हैं। हॉल भी बना है, जहां पर दाखिल खारिज से लेकर जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र समेत कई काम होते हैं। उस हॉल के लिए दो रास्ते हैं और दोनों ही काफी संकरे हैं। आग लगने पर यहां से कर्मचारियों व आम लोगों का निकलना मुश्किल हो जाएगा। इसके अलावा पूरे हॉल व आसपास अग्निशमन यंत्र तक नहीं लगाए हैं। इमरजेंसी रास्ते का इंतजाम भी नहीं किया गया है।
सीएमओ आफिस : व्यवस्थाएं दुरुस्त पर धूल फांक रहे यंत्र
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में आग से बचाव के लिए इंतजाम काफी बेहतर हैं। इन उपकरणों पर धूल जम गई। जून में आग से बुझाने के लिए मॉकड्रिल होने पर ही शायद पाइप को खोला गया था। कार्यालय में आपातकालीन द्वार तक नहीं बना है। भवन में एक मात्र गेट है, जिसे पूरा नहीं खोला जाता है।
दो महीने पहले ही कराया था निरीक्षण
जिले के सरकारी भवनों का दो महीने पहले ही निरीक्षण कराया था। तब अग्निशमन यंत्र चलते हुए पाए थे। अन्य उपकरण जैसे रील, अलार्म, डिटेक्टर आदि कुछ भवनों में नहीं मिले थे। उसके लिए विभाग अपने कार्यालय से फंड की मांग करते हैं। अग्निशमन यंत्र पर लगी चिट कंपनियां अपने स्तर से लगाती हैं। रेहान अली, सीएफओ
-20 से 25 आग की घटनाएं महीने में जिले में होती हैं।
-800 लगभग आग के मामले पूरे साल में दर्ज होते हैं।
-अप्रैल और मई महीने में सबसे ज्यादा आग की घटनाएं होती हैं।
ये इंतजाम होने चाहिए
-आग बुझाने के लिए पानी का टैंक छत पर या अंडरग्राउंड होना चाहिए।
-फायर के पंप, जिसमें प्रेशर से पानी निकलता हो।
-हौज रील होना भी जरूरी है।
-अलार्म और डिटेक्टर भी लगे होने चाहिए।
-अग्निशमन यंत्र भी लगे होने चाहिए।