हापुड़ धमाके ने याद दिलाया कांट का हादसा: आठ साल पहले हुए विस्फोट में गई थी तीन लोगों की जान, जियाखेल में पकड़ा था बारूद का जखीरा
जिले के कांट कस्बे की अवैध पटाखा फैक्टरी में करीब आठ साल पहले विस्फोट हुआ था। जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। ऐसा ही हादसा हापुड़ में हुआ है, जिसने कांट विस्फोट की याद दिला दी। कांट की अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट में तीन लोगों की मौत के बाद अधिकारियों ने आतिशबाजी कारोबारियों को अपने गोदाम शहर से बाहर बनाने के निर्देश दिए थे।
विस्तार
शहर के मोहल्ला जियाखेल के एक मकान पर भी पांच वर्ष पहले छापा मारकर अवैध पटाखा फैक्टरी पकड़ी जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जनपद में कोई पटाखा फैक्टरी संचालित नहीं है। हापुड़ में हुए हादसे के बाद ऐसे सभी ठिकाने एक बार फिर प्रशासन की निगाह में आ गए हैं।
करीब एक दशक पहले तक यहां आतिशबाजी के 48 थोक एवं फुटकर बिक्री लाइसेंसी थे। उन दिनों बहादुरगंज बाजार में बाहर की बनी हुई आतिशबाजी बिकने के साथ शहर के कई पुराने आतिशबाज खुद आतिशबाजी के आइटम बनाते थे। वर्ष 2014 में कांट कस्बे की अवैध पटाखा फैक्टरी में हुए विस्फोट में तीन लोगों की मौत के बाद अधिकारियों ने आतिशबाजी कारोबारियों को अपने गोदाम शहर से बाहर बनाने के निर्देश दिए। आर्थिक रूप से सक्षम लोगों ने इस व्यवस्था का पालन किया, लेकिन अन्य आतिशबाज अपना पुश्तैनी धंधा छोड़कर दूसरे काम-धंधों में लग गए। अब जिले में मुश्किल से 17-18 लाइसेंसी विक्रेता बचे हैं और इनमें थोक लाइसेंसी सिर्फ सात रह गए हैं। उन्हें करीब 2100 क्विंटल पटाखे रखने की अनुमति है, लेकिन दिवाली और सहालगी सीजन में विक्रेता इससे कहीं ज्यादा स्टॉक जमा कर लेते हैं। हालांकि हापुड़ में हादसे के बाद प्रशासन अवैध तौर पर चल रही पटाखा फैक्ट्रियों की तलाश करेगा।
कांट के मकान में चल रही थी पटाखा फैक्टरी
कस्बे के मोहल्ला केले वाली चौपाल में अभायन मोड़ के पास वहां के लाइसेंसी आतिशबाजों ने एक दुकान किराये पर ले रखी थी। दुकान में पटाखे और मेहताब बनाते वक्त बारूद में हुए विस्फोट से दुकान की छत उड़ गई। कस्बे के लोगों के अनुसार परशुराम जयंती के दिन हुए इस हादसे में तीन लोगों की मौके पर मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से झुलस गए थे। यही नहीं दुकानों के पीछे बने राजू गुप्ता के मकान की दीवार में भी दरारें पड़ गई थीं। प्रशासन ने इसी हादसे से सबक लेते हुए बहादुरगंज की आतिशबाजी वाली गली और मंडी से थोक विक्रेताओं के गोदाम हटवा दिए थे।
जियाखेल में पकड़ा जा चुका बारूद का जखीरा
कांट में हुए हादसे के बाद न सिर्फ दिवाली पर आतिशबाजी बाजार शहर से बाहर लगने लगे, प्रशासन की सख्ती से कई लाइसेंसी आतिशबाजों ने अपने कारोबार बदल दिए। इसके बावजूद कुछ आतिशबाज चोरी-छिपे महानगर में आतिशबाजी बनाने में जुटे रहे। पांच वर्ष पहले प्रशासन को मिली एक सूचना के आधार पर तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट ने मोहल्ला जियाखेल के एक मकान पर छापा मारा तो छत पर कई लोग गंधक-पोटाश से आतिशबाजी के आइटम बनाते मिल गए। पुलिस ने मौके से भारी मात्रा में बारूद समेत बने-अधबने पटाखे भी बरामद किए थे। लोगों का मानना है कि पुलिस ईमानदारी से सुरागरसी करे तो महानगर में बारूद के ऐसे अन्य कई ठिकाने पकड़े जा सकते हैं।
मौत से अस्पतालों में संघर्ष कर रहे 18 घायल
पटाखा फैक्टरी में हादसे के बाद 10 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों अधिकतर 19 से 25 वर्ष तक के थे। हादसे में झुलसे 18 लोग अस्पताल में मौत से संघर्ष कर रहे हैं। चांद मियां पुत्र मीना, यूसुफ पुत्र लकीर, उसके बच्चे नीशू और साहिल, बबलू, उसके बेटै अहिरा व जुनेरा, मुस्तकीम, उसका बेटा और बेटी, बिटिया पुत्री बादशाह, चांद तारा पुत्री बादशाह, सोनू, अंकुश और प्रदीप की हालत गंभीर बनी है। इन्हें हापुड़ के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया। हादसे की सूचना के बाद पहुंचे परिजन को घायलों की पहचान करने में काफी मशक्कत करना पड़ी। कुछ बेहोश थे, जब वह होश में आए तो अपनों को देखकर उनके आंसू छलछला आए।
जिले में आतिशबाजी की थोक बिक्री के सात-आठ लाइसेंस जारी हुए हैं, लेकिन जन सुरक्षा के लिहाज से उनके गोदाम शहर से बाहर स्थापित हैं। सभी थोक विक्रेता अपनी दुकानें शहर के अंदर अबादी क्षेत्र से हटाकर बाहर ले जा चुके हैं। समय-समय पर उनके गोदामों का निरीक्षण कर स्टॉक की जांच भी की जाती है। हापुड़ की घटना का संज्ञान लेते हुए आतिशबाजी गोदामों का निरीक्षण किया जाएगा। -देवेंद्र प्रताप सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट