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Shahjahanpur News: तापमान में गिरावट व बूंदाबांदी में फसलों में रोग लगने की आशंका
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शाहजहांपुर। तापमान गिरावट के साथ कोहरा पड़ रहा है। मौसम विभाग ने बारिश की संभावना व्यक्त की है। इस मौसम में आलू, टमाटर, आम, केला और सब्जियों में रोग लगने के आसार बन रहे हैं। उद्यान विभाग की ओर से इनके बचाव के तरीके बताए गए हैं।
जिला उद्यान अधिकारी पुनीत पाठक ने बताया कि जनपद में वर्तमान में करीब 15000 हेक्टेयर में आलू के उत्पादन की संभावना है। तापमान में गिरावट एवं बूंदाबांदी की स्थिति में आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका बढ़ गई है। पिछेती झुलसा रोग के प्रकोप से पत्तियां सिरे से झुलसना शुरू होती हैं।
आलू व टमाटर की फसल को अगेती व पिछेती झुलसा रोग से बचाने के लिए साफ, कगुआ (कोर्बेडाजिम 12 प्रतिशत मैंकोजब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी) दवा का 2.5 से 3.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। प्रोपिनेब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी दवा का 2.5 से 3.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर या दोनों में से किसी एक दवा का 2 से 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव किया जाए।
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आम की उत्पादकता बढ़ाने के लिए गुझिया कीट (मैंगो मिलीबग) से बचाया जाना जरूरी है। शिशु कीट (निम्फ) को पेड़ों पर चढ़ने से रोकने के लिए खेत की जोताई करें। पेड़ के मुख्य तने पर भूमि से 30-50 सेमी की ऊंचाई पर पॉलीथिन की 25 सेमी चौड़ी पट्टी को तने के चारों ओर लपेट कर ऊपर व नीचे सुतली से बांध कर पॉलीथिन शीट के ऊपर ग्रीस लगा देना चाहिए। इसके साथ क्लोरीपाइरीफॉस (1.5 प्रतिशत) चूर्ण 250 ग्राम प्रति पेड़ के हिसाब से तने के पास चारों ओर मिट्टी में बुरकाव करना चाहिए।
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जिला उद्यान अधिकारी पुनीत पाठक ने बताया कि जनपद में वर्तमान में करीब 15000 हेक्टेयर में आलू के उत्पादन की संभावना है। तापमान में गिरावट एवं बूंदाबांदी की स्थिति में आलू की फसल में झुलसा रोग लगने की आशंका बढ़ गई है। पिछेती झुलसा रोग के प्रकोप से पत्तियां सिरे से झुलसना शुरू होती हैं।
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आलू व टमाटर की फसल को अगेती व पिछेती झुलसा रोग से बचाने के लिए साफ, कगुआ (कोर्बेडाजिम 12 प्रतिशत मैंकोजब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी) दवा का 2.5 से 3.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। प्रोपिनेब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी दवा का 2.5 से 3.0 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर या दोनों में से किसी एक दवा का 2 से 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 800 से 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव किया जाए।
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आम की उत्पादकता बढ़ाने के लिए गुझिया कीट (मैंगो मिलीबग) से बचाया जाना जरूरी है। शिशु कीट (निम्फ) को पेड़ों पर चढ़ने से रोकने के लिए खेत की जोताई करें। पेड़ के मुख्य तने पर भूमि से 30-50 सेमी की ऊंचाई पर पॉलीथिन की 25 सेमी चौड़ी पट्टी को तने के चारों ओर लपेट कर ऊपर व नीचे सुतली से बांध कर पॉलीथिन शीट के ऊपर ग्रीस लगा देना चाहिए। इसके साथ क्लोरीपाइरीफॉस (1.5 प्रतिशत) चूर्ण 250 ग्राम प्रति पेड़ के हिसाब से तने के पास चारों ओर मिट्टी में बुरकाव करना चाहिए।