गंगा की बाढ़ से बिगड़े हालात: शाहजहांपुर के मिर्जापुर में कई गांव पानी से घिरे, ग्रामीण करने लगे पलायन
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब चल रहा है। बृहस्पतिवार को गंगा में नरौरा बांध से तीन लाख क्यूसेक पानी और छोड़ दिया गया है, जो कि अगले दो से तीन दिन के अंदर पहुंच जाएगा। इससा ज्यादा तबाही होने की आशंका जताई जा रही है।
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शाहजहांपुर के मिर्जापुर में गंगा का बाढ़ खादर क्षेत्र में आफत बनकर टूट पड़ा है। जलमग्न गांव आजाद नगर के ग्रामीणों ने बाढ़ से अपनी जान और घर-गृहस्थी बचाने के लिए पलायन शुरू कर दिया है। एसडीएम महेश कुमार कैथल ने पैलानी उत्तर ग्राम पंचायत के प्रधान फारूक अली के साथ बाढ़ प्रभावित गांवों को जाने वाली सड़कों और रास्तों के निरीक्षण कर बाढ़ पीड़ितों से ढाईगांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के भवन में शरण लेने की अपील की है।
बाढ़ के तेज बहाव में जलालाबाद-ढाईघाट, शमशाबाद स्टेट हाईवे जगह-जगह कट रहा है। ढाईगांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर आगे बल्देवपुर मोड़ पर हाईवे पर तेज बाढ़ के पानी से मंदिर और दुकानों के बह जाने का खतरा बढ़ गया है। इससे बाढ़ से घिरे गांवों के बाशिंदों को ढाईगांव के आश्रय स्थल तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है।
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एसडीएम महेश कुमार कैथल और तहसीलदार पैगाम हैदर ने समाजसेवी रिजवान अहमद, एडीओ पंचायत अवनीश कुमार सिंह और ग्राम पंचायत अधिकारी शिवालय शर्मा ने सफाईकर्मियों से ढाईगांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के वर्षों से बंद पड़े के कर्मचारी आवासों की सफाई करवाकर बाढ़ पीड़ितों के लिए आश्रय स्थल बनवा दिया है। एसडीएम ने बताया कि आश्रय स्थल पर विस्थापितों के भोजन-पानी, दवा और पशुओं के चारे आदि की व्यवस्था की जा रही है।
समाजसेवी रिजवान अहमद ने बताया कि आश्रय स्थल पर आवश्यकता पड़ी तो अस्थायी शौचालयों का भी निर्माण करवाया जाएगा। बाढ़ पीड़ितों के सामने सबसे बड़ी समस्या आश्रय स्थल तक आने की भी है। बाढ़ पीड़ित जलभराव वाले क्षेत्र में तो नाव से आ जाएंगे, लेकिन बाढ़ क्षेत्र की सड़कों के बह जाने से वे अपनी गृहस्थी का सामान और परिवार के सदस्यों को कटी सड़कों से लेकर आश्रय स्थल ढाईगांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक आने में सबसे बड़ी दिक्कत आ रही है।
नहीं पहुंच पा रही प्रशासन की मदद
गांव मस्जिद नगला के लगभग 20 परिवार नाव से इमादपुर गांव की सड़क पर पहुंच गए हैं। बाढ़ पीड़ितों के सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए प्रशासन ने आजाद नगर, मस्जिद नगला और पैलानी के बाढ़ पीड़ितों के लिए कुल छह नावों की व्यवस्था कर दी है, लेकिन बटन नगला, मोती नगला, लोहार नगला, पकड़िया नगला, धोबियन नगला, बांसखेड़ा आदि गांवों के बाढ़ पीड़ित पलायन करने के लिए अब तक एक भी नाव का इंतजाम नहीं किया गया है। इससे इन गांवों के बाढ़ पीड़ित अपनी जानमाल की सुरक्षा के प्रति सशंकित हैं।
ग्राम पंचायत भरतपुर के प्रधान प्रतिनिधि संतोष सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायत के मजरा पंखिया नगला, पकड़िया नगला, धोबियन नगला के एक माह से जलमग्न होने के बाद भी बाढ़ पीड़ितों की कोई मदद नहीं कि गई है। इसी तरह ग्राम पंचायत गुटेटी उत्तर के प्रधान अलवर सिंह ने भी अपनी ग्राम पंचायत के मजरा मोहकमपुर, महोलिया, गुटेटी उत्तर, धींयरपुरा आदि के जलमग्न होने के बाद भी किसी तरह की सरकारी मदद नहीं किए जाने पर रोष जताया है।
भाकियू ने की नाव दिलाने की मांग
रामगंगा की बाढ़ से तटवर्ती ग्राम बीघापुर पूर्वी चौतरफा घिर गया है। ग्रामीण रास्ते में भरे तीन से चार फुट तक गहरे पानी से निकलकर जरूरत का सामान लेने जरीयनपुर की बाजार जा रहे हैं। भाकियू जिला उपाध्यक्ष उदयवीर सिंह यादव ने कार्यकर्ताओं के साथ एसडीएम को ज्ञापन देकर बीघापुर के ग्रामीणों को नाव उपलब्ध करवाने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया कि रामगंगा की बाढ़ से चौतरफा घिरे ग्राम बीघापुर पूर्वी के बाढ़ पीड़ितों के आवागमन के लिए नाव दिए जाने, ग्राम पहरुआ में बाढ़ से बचाव के लिए बनाए गए कच्चे बांध की मरम्मत, जरीयनपुर गांव में गोकुल नगला जाने वाले रास्ते पर लटकते हाईटेंशन विद्युत लाइन के नीचे सुरक्षा की दृष्टि से जाल लगाए जाने और ग्राम पंचायतों में बनी गोशालाओं में छुट्टा पशुओं का संरक्षित किए जाने की मांग की है। ज्ञापन देने वालों में लालाराम वर्मा, रामसिंह, कृष्णपाल गौतम, वेदराम, नन्हेंलाल व अरविंद कुमार आदि मौजूद रहे।
गंगा में करीब तीन लाख क्यूसेक छूटा पानी, अलर्ट जारी
गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब चल रहा है। बृहस्पतिवार को गंगा में नरौरा बांध से तीन लाख क्यूसेक पानी और छोड़ दिया गया है, जो कि अगले दो से तीन दिन के अंदर पहुंच जाएगा। इससा ज्यादा तबाही होने की आशंका जताई जा रही है। पानी छोड़ने की सूचना के बाद प्रशासन अलर्ट जारी कर दिया है। बाढ़ राहत चौकियों की निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारी भी लगातार बाढ़ क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं।बाढ़ नियंत्रण कक्ष शारदा नहर खंड से जारी रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार से गंगा नदी का जलस्तर 143.50 गेज पर स्थिर बना हुआ है, जो कि खतरे के निशान के करीब है। रामगंगा, गर्रा और खन्नौत नदी के जलस्तर में भी गिरावट आई है। बृहस्पतिवार को नरौरा बैराज से गंगा में 2,94,525 क्यूसेक पानी, रामगंगा में विभिन्न बैराजों से 17,194 क्यूसेक और गर्रा नदी में दियूनी बैराज से 1,825 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
बाढ़ग्रस्त गांवों में फंसे लोगों को नावों के माध्यम से आश्रय स्थल में पहुंचाया जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों को खाना वितरण करने की व्यवस्था की जा रही है। शुक्रवार से राहत सामग्री भी बांटी जाएगी। क्षेत्र में प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भ्रमणशील हैं। लोगों की मदद से लिए राजस्व टीमें लगी हुईं हैं। - डॉ. सुरेश कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व, बाढ़ प्रभारी अधिकारी