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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   " The biggest cause of stress, negative thinking

‘नकारात्मक सोच तनाव का सबसे बड़ा कारण’

Mon, 01 Feb 2016 08:25 PM IST
शाहजहांपुर।
शाहजहांपुर। Updated Mon, 01 Feb 2016 08:25 PM IST
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एसएस कॉलेज में तनाव प्रबंधन पर चल रहे दो दिवसीय नेशनल सेमिनार का समापन हो गया। समापन अवसर पर शोधपत्रों का वाचन करने वाले छात्रों और प्राध्यापकों को प्रशस्ति पत्र देकर पुरस्कृत भी किया गया। अंतिम सत्र में मुख्य अतिथि एमएलसी डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त ने अपने संदेश में कहा कि जीवन में नकारात्मकता तनाव का सबसे बड़ा कारण है। यदि मनुष्य जीवन की घटनाओं को सकारात्मक सोच के साथ स्वीकार करे तो वह एक सुखी जीवन जी सकता है।
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सेमिनार के मुख्य विषय ‘व्यावसायिक संगठनों में तनाव प्रबंधन के प्रभाव’ पर अपनी बात रखते हुए शिक्षक नेता ने कहा कि हमें जीवन में नकारात्मक अभिप्रेरणाओं को भी चुनौती के रुप में स्वीकार करना चाहिए, उसे तनाव नहीं बल्कि प्रेरणा का कारण बनाना चाहिए। हर व्यक्ति को तनाव प्रबंधन की क्षमता स्वयं विकसित करनी होती है। पूर्व केंद्रीय गृहराज्य मंत्री स्वामी चिन्मयानंद ने कहा कि जब व्यक्ति कार्यों को स्वयं, परिवार और समाज के लिये न कर इस दृष्टि से करता है कि वह ईश्वर के लिये कार्य रहा है तो उसका लाभ ईश्वर की निर्मित सम्पूर्ण सृष्टि तक जाता है। जीवन में निष्काम कर्म तनाव को कम करने का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है। मुख्य वक्ता पंकज भार्गव ने कहा कि आज हम सब भारी तनाव में जी रहे हैं, इससे मनुष्य अनेक व्याधियों का शिकार हो रहा है। यदि व्यक्ति अपनी दैनिक कार्यशैली में थोड़ा सा बदलाव लाये तो वह तनाव से मुक्त रहकर बेहतर परिणाम दे सकता है। इस मौके पर बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के प्रो. एचके सिंह, दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. इकबाल, एसएस लॉ कालेज के प्राचार्य डॉ. संजय बरनवाल आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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इससे पूर्व अतिथियों का परिचय संगोष्ठी के संयोजक डॉ. अनुराग अग्रवाल ने तथा स्वागत डॉ. राजीव अग्रवाल, डॉ. दीपक मिश्रा, डॉ. अंकित अवस्थी, खूशबू गुप्ता, नेहा सिंह, इंदरप्रीत कौर, महिमा सिंह, अपूर्वा शर्मा ने किया। डॉ. प्रतिभा सक्सेना के निर्देशन में संगीत विभाग की छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। महिमा सिंह ने सेमिनार की रिपोर्ट प्रस्तुत की। तकनीकी सत्रों की अध्यक्षता प्रो. एसके श्रीवास्तव और प्रो. सुषमा मिश्रा ने की जबकि सह-अध्यक्षता डॉ. भारत और प्रो. विपुल भट्ट ने की। प्राचार्य डॉ. एके मिश्र ने आभार व्यक्त किया।
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