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अधर में छोड़ दी न्याय की लड़ाई
खुटार।
Updated Tue, 23 Jun 2015 12:04 AM IST
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जगेंद्र की मौत के बाद न्याय दिलाने के लिए शुरू की गई लड़ाई क्या अधर में छोड़ दी गई है? यह सवाल सोमवार को पूरे दिन पत्रकारों सहित तमाम राजनैतिक दलों और लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। घटना के बाद से जगेंद्र के परिवार के साथ न्याय की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर शामिल रहे लोग ही अब कह रहे हैं कि जब परिवार ने ही जंग अधूरी छोड़ दी है तो वे क्या कर सकते हैं।
जगेंद्र के मामले में पूरे देश के पत्रकार संगठन एकजुट होकर लड़ाई को आगे बढ़ाने और परिवार के लोगों को न्याय दिलाने के लिए आगे आए गए। देश भर में धरना प्रदर्शन, आंदोलनों को दौर शुरू हो गया। परिवार के लोग भी जगेंद्र की लड़ाई को आगे बढ़ाने सहित कई मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठ गए, लेकिन रविवार रात अचानक सारा घटनाक्रम बदल गया। जगेंद्र के पिता और छोटा बेटा बिना किसी को जानकारी दिए रात में लखनऊ चले गए और मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसके बाद सहायता राशि, नौकरी और जमीन से कब्जा हटाने की घोषणा हो गई। सवाल उठता है कि क्या जगेंद्र सिंह की ओर से शुरू की गई लड़ाई को अधर में छोड़ दिया गया है? जगेंद्र सिंह के जीवित रहते भी समझौते आदि की बात चलती रही, लेकिन जगेंद्र ने इससे इंकार करते हुए न्याय की मांग करते रहे।
बिना सूचना लखनऊ जाने से लगा धक्का
मैं पहले ही दिन से जगेंद्र के परिवार के लोगों के धरने पर बैठी थी। सोमवार सुबह पता चला कि जगेंद्र के पिता और पुत्र लखनऊ गए हैं तो इससे मुझे गहरा धक्का लगा है। फैसले से पहले धरने में सहयोग कर रहे लोगों को जरूर बात करनी चाहिए थी।
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- संतोष शर्मा, तहसील अध्यक्ष कांग्रेस महिला प्रकोष्ठ पुवायां
न्यायालय का निर्णय होगा उजाले की किरण
जगेंद्र के मामले में सरकार शुरू से ही लीपापोती में लगी थी। पत्रकार को न्याय दिलाने के सभी लोग एकजुट हुए थे। पुलिस बचाव में जुटी रही, परिवार के लोगों का मनोबल तोड़ा गया। सबूत नष्ट कर दिए गए और गवाहों को तोड़ लिया गया। डीआईजी भी सरकार की मंशा के तहत ही खुटार आए थे और अकेले में बातकर परिवार को तोड़ा गया। मैंने सुबह ही अधिकारियों को धरने से हटने के बारे में लिखकर दे दिया है। मुझे न्यायालय के फैसले का इंतजार है जो अंधेरे में रोशनी जैसा होगा।
-रागिनी सिंह, भाजपा नेता शाहजहांपुर
पहले ही कर देनी थी सहायता की घोषणा
मुख्यमंत्री ने पत्रकार के परिवार को मदद देकर सराहनीय निर्णय किया है, लेकिन यह निर्णय पहले ही लिया जाना चाहिए था। मैं अब भी सीबीआई जांच की मांग पर कायम हूं। सीबीआई जांच से ही पूरे मामले की निष्पक्ष ढंग से विवेचना हो सकेगी और पत्रकार की आत्मा को न्याय मिल सकेगा।
- देवेंद्रपाल सिंह, पूर्व विधायक ददरौल, शाहजहांपुर
मंत्री को भिजवाएंगे जेल
मैं सीबीआई जांच की मांग पर कायम हूं। मंत्री को जेल भिजवाएंगे। जब तक पापा के दोषी जेल नहीं जाते हम चुप कैसे बैठ सकते हैं।
- राघवेंद्र सिंह, जगेंद्र का बड़ा पुत्र
मुझे जानकारी नहीं
रविवार रात ससुर और पुत्र लखनऊ क्यों गए मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मैं सो रही थी। पहले मुझे जानकारी थी कि ससुर दवा लेने लखनऊ गए हैं। बड़े लोगों ने जो फैसला किया है वह सही होगा। जब तक ससुर और पुत्र वापस नहीं आ जाते हम कुछ कह नहीं सकते।
- सुमन सिंह, जगेंद्र की पत्नी
मुख्यमंत्री ने दिलाया है न्याय का भरोसा
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि मेरे पुत्र के प्रकरण में पूरा न्याय किया जाएगा और निष्पक्ष जांच होगी। जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने परिवार को 30 लाख रुपये, मेरे पौत्रों को नौकरी, जमीन छुड़ाने का आश्वासन दिया है। मैं इससे संतुष्ट हूं। मुझे मुख्यमंत्री और सरकार पर पूरा भरोसा है।
- सुमेर सिंह (जगेंद्र सिंह के पिता)
एसडीएम ने धरना स्थल पर भरवाया शस्त्र लाइसेंस का आवेदन
खुटार। मुख्यमंत्री की ओर से मदद का ऐलान होने के बाद एसडीएम लालबहादुर और सीओ उमेश शर्मा खुटार पहुंचे और धरना स्थल पर जाकर जगेंद्र के बड़े पुत्र राघवेंद्र सिंह की ओर से शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन पत्र भरवाया। जगेंद्र के परिवार को शस्त्र लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इसके बाद एसडीएम लालबहादुर, सीओ उमेश शर्मा, तहसीलदार पीएन सिंह भारी पुलिस फोर्स और पीएसी के साथ गांव दिलीपपुर पहुंचे। यहां पर समिति की भूमि की पैमाइश कर सदस्य सुमेर सिंह की जमीन की पैमाइश की गई और पौत्र राजन की मौजूदगी में कब्जा दिलाया गया। जमीन का यह प्रकरण लगभग 25 वर्ष से लंबित चल रहा था।
धरना स्थल पर नहीं जुटे लोग
खुटार। जगेंद्र सिंह के पिता और पुत्र के अचानक रात में लखनऊ जाने की सूचना से धरना-प्रदर्शन करने वालों सहित अन्य सहयोगी भी सकते में आ गए हैं। रोजाना धरना स्थल पर मौजूद रहने वाले तमाम लोग सोमवार सुबह धरना स्थल पर नहीं पहुंचे। इससे वहां सन्नाटा पसरा रहा। जगेंद्र सिंह का परिवार 14 जून से घर के पास धरने पर बैठा है। इसके बाद से ही भाजपा नेता रागिनी सिंह, देवेश गुप्ता, कांग्रेस नेता संतोष शर्मा सहित खीरी, सीतापुर के कई पत्रकार संगठनों के लोग और स्थानीय पत्रकार भी धरने में सहयोग कर रहे थे। सोमवार को धरना स्थल पर जगेंद्र सिंह की पत्नी सुमन, बहन लवली, पुत्री रचना और पुत्र राहुल ही मौजूद रहे।
नहीं आई कोई ओबी वैन, पत्रकार भी नहीं पहुंचे
खुटार। जगेंद्र सिंह के पिता-पुत्र के लखनऊ जाने की जानकारी मिलने के बाद सोमवार को धरना स्थल पर किसी भी न्यूज चैनल और अखबार के पत्रकार नहीं पहुंचे। धरना स्थल पर सन्नाटा रहने से दिन भी जुटे रहने वाले तमाशबीन भी गायब रहे।
जगेंद्र प्रकरण में न्यूज ऑफ इंडिया ने शुरू किया धरना
शाहजहांपुर। जगेंद्र की मौत प्रकरण में शासन स्तर पर मांगों को लेकर पीड़ित परिवार से सहमति बनने के बाद पत्रकार संघर्ष समिति ने छह दिन से कलक्ट्रेट में जारी धरना सोमवार को समाप्त कर दिया, लेकिन इसी के साथ न्यूज ऑफ इंडिया रिपोर्टर ग्रुप नामक संगठन के सदस्यों ने पत्रकारों की सुरक्षा को मुद्दा बनाकर वहीं पर बेमियादी धरना शुरू कर दिया।
पत्रकार संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने छह दिन पहले जगेंद्र मौत प्रकरण की सीबीआई जांच, हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को मुआवजा आदि मांगों को लेकर कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन की शुरुआत की थी। सोमवार को सुबह लखनऊ में जगेंद्र के पिता और बेटे की मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात और पीड़ित परिवार की कई मांगें मान लिए जाने की सूचना मिलने के बाद समिति के सदस्यों ने धरना खत्म करने का निर्णय किया।
इसकी जानकारी पाकर एडीएम वित्त एवं राजस्व पीके श्रीवास्तव और पभारी सिटी मजिस्ट्रेट एपी श्रीवास्तव ने धरना स्थल पर जाकर पत्रकारों को आश्वस्त किया कि उनकी सभी मांगें शासन स्तर पर भेज दी गई हैं और उन पर अनुकूल कार्यवाही हो रही है।
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जगेंद्र के मामले में पूरे देश के पत्रकार संगठन एकजुट होकर लड़ाई को आगे बढ़ाने और परिवार के लोगों को न्याय दिलाने के लिए आगे आए गए। देश भर में धरना प्रदर्शन, आंदोलनों को दौर शुरू हो गया। परिवार के लोग भी जगेंद्र की लड़ाई को आगे बढ़ाने सहित कई मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठ गए, लेकिन रविवार रात अचानक सारा घटनाक्रम बदल गया। जगेंद्र के पिता और छोटा बेटा बिना किसी को जानकारी दिए रात में लखनऊ चले गए और मुख्यमंत्री से मुलाकात की। इसके बाद सहायता राशि, नौकरी और जमीन से कब्जा हटाने की घोषणा हो गई। सवाल उठता है कि क्या जगेंद्र सिंह की ओर से शुरू की गई लड़ाई को अधर में छोड़ दिया गया है? जगेंद्र सिंह के जीवित रहते भी समझौते आदि की बात चलती रही, लेकिन जगेंद्र ने इससे इंकार करते हुए न्याय की मांग करते रहे।
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बिना सूचना लखनऊ जाने से लगा धक्का
मैं पहले ही दिन से जगेंद्र के परिवार के लोगों के धरने पर बैठी थी। सोमवार सुबह पता चला कि जगेंद्र के पिता और पुत्र लखनऊ गए हैं तो इससे मुझे गहरा धक्का लगा है। फैसले से पहले धरने में सहयोग कर रहे लोगों को जरूर बात करनी चाहिए थी।
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न्यायालय का निर्णय होगा उजाले की किरण
जगेंद्र के मामले में सरकार शुरू से ही लीपापोती में लगी थी। पत्रकार को न्याय दिलाने के सभी लोग एकजुट हुए थे। पुलिस बचाव में जुटी रही, परिवार के लोगों का मनोबल तोड़ा गया। सबूत नष्ट कर दिए गए और गवाहों को तोड़ लिया गया। डीआईजी भी सरकार की मंशा के तहत ही खुटार आए थे और अकेले में बातकर परिवार को तोड़ा गया। मैंने सुबह ही अधिकारियों को धरने से हटने के बारे में लिखकर दे दिया है। मुझे न्यायालय के फैसले का इंतजार है जो अंधेरे में रोशनी जैसा होगा।
-रागिनी सिंह, भाजपा नेता शाहजहांपुर
पहले ही कर देनी थी सहायता की घोषणा
मुख्यमंत्री ने पत्रकार के परिवार को मदद देकर सराहनीय निर्णय किया है, लेकिन यह निर्णय पहले ही लिया जाना चाहिए था। मैं अब भी सीबीआई जांच की मांग पर कायम हूं। सीबीआई जांच से ही पूरे मामले की निष्पक्ष ढंग से विवेचना हो सकेगी और पत्रकार की आत्मा को न्याय मिल सकेगा।
- देवेंद्रपाल सिंह, पूर्व विधायक ददरौल, शाहजहांपुर
मंत्री को भिजवाएंगे जेल
मैं सीबीआई जांच की मांग पर कायम हूं। मंत्री को जेल भिजवाएंगे। जब तक पापा के दोषी जेल नहीं जाते हम चुप कैसे बैठ सकते हैं।
- राघवेंद्र सिंह, जगेंद्र का बड़ा पुत्र
मुझे जानकारी नहीं
रविवार रात ससुर और पुत्र लखनऊ क्यों गए मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मैं सो रही थी। पहले मुझे जानकारी थी कि ससुर दवा लेने लखनऊ गए हैं। बड़े लोगों ने जो फैसला किया है वह सही होगा। जब तक ससुर और पुत्र वापस नहीं आ जाते हम कुछ कह नहीं सकते।
- सुमन सिंह, जगेंद्र की पत्नी
मुख्यमंत्री ने दिलाया है न्याय का भरोसा
मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि मेरे पुत्र के प्रकरण में पूरा न्याय किया जाएगा और निष्पक्ष जांच होगी। जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने परिवार को 30 लाख रुपये, मेरे पौत्रों को नौकरी, जमीन छुड़ाने का आश्वासन दिया है। मैं इससे संतुष्ट हूं। मुझे मुख्यमंत्री और सरकार पर पूरा भरोसा है।
- सुमेर सिंह (जगेंद्र सिंह के पिता)
एसडीएम ने धरना स्थल पर भरवाया शस्त्र लाइसेंस का आवेदन
खुटार। मुख्यमंत्री की ओर से मदद का ऐलान होने के बाद एसडीएम लालबहादुर और सीओ उमेश शर्मा खुटार पहुंचे और धरना स्थल पर जाकर जगेंद्र के बड़े पुत्र राघवेंद्र सिंह की ओर से शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन पत्र भरवाया। जगेंद्र के परिवार को शस्त्र लाइसेंस देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इसके बाद एसडीएम लालबहादुर, सीओ उमेश शर्मा, तहसीलदार पीएन सिंह भारी पुलिस फोर्स और पीएसी के साथ गांव दिलीपपुर पहुंचे। यहां पर समिति की भूमि की पैमाइश कर सदस्य सुमेर सिंह की जमीन की पैमाइश की गई और पौत्र राजन की मौजूदगी में कब्जा दिलाया गया। जमीन का यह प्रकरण लगभग 25 वर्ष से लंबित चल रहा था।
धरना स्थल पर नहीं जुटे लोग
खुटार। जगेंद्र सिंह के पिता और पुत्र के अचानक रात में लखनऊ जाने की सूचना से धरना-प्रदर्शन करने वालों सहित अन्य सहयोगी भी सकते में आ गए हैं। रोजाना धरना स्थल पर मौजूद रहने वाले तमाम लोग सोमवार सुबह धरना स्थल पर नहीं पहुंचे। इससे वहां सन्नाटा पसरा रहा। जगेंद्र सिंह का परिवार 14 जून से घर के पास धरने पर बैठा है। इसके बाद से ही भाजपा नेता रागिनी सिंह, देवेश गुप्ता, कांग्रेस नेता संतोष शर्मा सहित खीरी, सीतापुर के कई पत्रकार संगठनों के लोग और स्थानीय पत्रकार भी धरने में सहयोग कर रहे थे। सोमवार को धरना स्थल पर जगेंद्र सिंह की पत्नी सुमन, बहन लवली, पुत्री रचना और पुत्र राहुल ही मौजूद रहे।
नहीं आई कोई ओबी वैन, पत्रकार भी नहीं पहुंचे
खुटार। जगेंद्र सिंह के पिता-पुत्र के लखनऊ जाने की जानकारी मिलने के बाद सोमवार को धरना स्थल पर किसी भी न्यूज चैनल और अखबार के पत्रकार नहीं पहुंचे। धरना स्थल पर सन्नाटा रहने से दिन भी जुटे रहने वाले तमाशबीन भी गायब रहे।
जगेंद्र प्रकरण में न्यूज ऑफ इंडिया ने शुरू किया धरना
शाहजहांपुर। जगेंद्र की मौत प्रकरण में शासन स्तर पर मांगों को लेकर पीड़ित परिवार से सहमति बनने के बाद पत्रकार संघर्ष समिति ने छह दिन से कलक्ट्रेट में जारी धरना सोमवार को समाप्त कर दिया, लेकिन इसी के साथ न्यूज ऑफ इंडिया रिपोर्टर ग्रुप नामक संगठन के सदस्यों ने पत्रकारों की सुरक्षा को मुद्दा बनाकर वहीं पर बेमियादी धरना शुरू कर दिया।
पत्रकार संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने छह दिन पहले जगेंद्र मौत प्रकरण की सीबीआई जांच, हत्या के आरोपियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को मुआवजा आदि मांगों को लेकर कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन की शुरुआत की थी। सोमवार को सुबह लखनऊ में जगेंद्र के पिता और बेटे की मुख्यमंत्री से हुई मुलाकात और पीड़ित परिवार की कई मांगें मान लिए जाने की सूचना मिलने के बाद समिति के सदस्यों ने धरना खत्म करने का निर्णय किया।
इसकी जानकारी पाकर एडीएम वित्त एवं राजस्व पीके श्रीवास्तव और पभारी सिटी मजिस्ट्रेट एपी श्रीवास्तव ने धरना स्थल पर जाकर पत्रकारों को आश्वस्त किया कि उनकी सभी मांगें शासन स्तर पर भेज दी गई हैं और उन पर अनुकूल कार्यवाही हो रही है।