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Shahjahanpur News: चरागाह, मरघट की भूमि श्रेणी बदलने पर कलान के तहसीलदार निलंबित
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पुवायां में तैनाती के दौरान का मामला, डीएम के स्तर से जांच के बाद हुई कार्रवाई
शाहजहांपुर। कलान के तहसीलदार डॉ. धर्मेंद्र कुमार पांडेय को पुवायां तहसील में तैनाती के दौरान चरागाह और मरघट की जमीनों को नियम विरुद्घ तरीके से श्रेणी बदलकर भूमिधरी में शामिल करने के मामले में दोषी पाया गया है। इस पर आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद अनुभाग-3 मनीष त्रिघाटिया ने उन्हें निलंबित कर दिया है। इस प्रकरण में डीएम उमेश प्रताप सिंह के स्तर से कराई गई जांच के बाद यह कार्रवाई हुई है।
डीएम ने बताया कि सदर तहसील के परगना जमौर अंतर्गत ग्राम गंधार के खसरा नं. 1187, 1188मि., 1347क और 1348 पर कुल रकबा 8.3140 हेक्टेयर चरागाह के रूप में दर्ज था। इसी प्रकार खसरा नंबर 1189 पर 1.870 हेक्टेयर जमीन मरघट के रूप में दर्ज थी। बरेली के अपर आयुक्त न्यायिक द्वारा नामांतरण वाद नायब तहसीलदार जमौर के न्यायालय से तहसीलदार पुवायां के न्यायालय में स्थानांतरित करने पर वहां के तत्कालीन तहसीलदार डॉ. पांडेय ने राजस्व अभिलेखों का समुचित परीक्षण एवं जांच किए बगैर सभी जमीनें सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी भूमिधरी में नामांतरित कर दीं।
डीएम के अनुसार, नामांतरण वाद की इन सभी छह पत्रावलियों में प्रस्तुत विक्रय विलेख के आधार पर क्रेतागण के पक्ष में विधि विरुद्ध तरीके से तहसीलदार ने नामांतरण आदेश भी पारित कर दिए गए। यह भूमि उप्र राजस्व संहिता की धारा-77/ यूपी जेडएएलआर एक्ट की धारा-132 की भूमि थी, जिसका नियमानुसार दाखिल खारिज नहीं हो सकता।
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अभिलेखों का समुचित परीक्षण किये बगैर इस प्रकार के आदेश पारित करना एक गंभीर प्रकृति की न्यायिक एवं प्रशासनिक त्रुटि है। इसके लिए डॉ. पांडेय प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए। उन्हें मंडलायुक्त कार्यालय, बरेली से संबद्ध कर प्रकरण की जांच को अपर आयुक्त (प्रशासन) को जांच अधिकारी नामित किया गया है।
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शाहजहांपुर। कलान के तहसीलदार डॉ. धर्मेंद्र कुमार पांडेय को पुवायां तहसील में तैनाती के दौरान चरागाह और मरघट की जमीनों को नियम विरुद्घ तरीके से श्रेणी बदलकर भूमिधरी में शामिल करने के मामले में दोषी पाया गया है। इस पर आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद अनुभाग-3 मनीष त्रिघाटिया ने उन्हें निलंबित कर दिया है। इस प्रकरण में डीएम उमेश प्रताप सिंह के स्तर से कराई गई जांच के बाद यह कार्रवाई हुई है।
डीएम ने बताया कि सदर तहसील के परगना जमौर अंतर्गत ग्राम गंधार के खसरा नं. 1187, 1188मि., 1347क और 1348 पर कुल रकबा 8.3140 हेक्टेयर चरागाह के रूप में दर्ज था। इसी प्रकार खसरा नंबर 1189 पर 1.870 हेक्टेयर जमीन मरघट के रूप में दर्ज थी। बरेली के अपर आयुक्त न्यायिक द्वारा नामांतरण वाद नायब तहसीलदार जमौर के न्यायालय से तहसीलदार पुवायां के न्यायालय में स्थानांतरित करने पर वहां के तत्कालीन तहसीलदार डॉ. पांडेय ने राजस्व अभिलेखों का समुचित परीक्षण एवं जांच किए बगैर सभी जमीनें सार्वजनिक उपयोग की श्रेणी भूमिधरी में नामांतरित कर दीं।
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डीएम के अनुसार, नामांतरण वाद की इन सभी छह पत्रावलियों में प्रस्तुत विक्रय विलेख के आधार पर क्रेतागण के पक्ष में विधि विरुद्ध तरीके से तहसीलदार ने नामांतरण आदेश भी पारित कर दिए गए। यह भूमि उप्र राजस्व संहिता की धारा-77/ यूपी जेडएएलआर एक्ट की धारा-132 की भूमि थी, जिसका नियमानुसार दाखिल खारिज नहीं हो सकता।
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अभिलेखों का समुचित परीक्षण किये बगैर इस प्रकार के आदेश पारित करना एक गंभीर प्रकृति की न्यायिक एवं प्रशासनिक त्रुटि है। इसके लिए डॉ. पांडेय प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए। उन्हें मंडलायुक्त कार्यालय, बरेली से संबद्ध कर प्रकरण की जांच को अपर आयुक्त (प्रशासन) को जांच अधिकारी नामित किया गया है।