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Shahjahanpur News: घनी आबादी, आश्रम और ईंट भट्ठों पर खोजे जाएंगे टीबी मरीज
Fri, 10 Nov 2023 01:13 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Fri, 10 Nov 2023 01:13 AM IST
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डॉ.आरके गौतम, सीएमओ। स्रोत-स्वयं
शाहजहांपुर। टीबी के मरीजों की तलाश एक बार फिर से शुरू की जाएगी। इसके लिए जिले की 20 प्रतिशत आबादी में 23 नवंबर से पांच दिसंबर के बीच अभियान चलाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने टीमों का गठन कर दिया है।
जिले में वर्तमान में करीब छह हजार टीबी के रोगी निक्षय पोर्टल पर दर्ज हैं। ये क्षय रोग की दवा खा रहे हैं। फिर भी काफी रोगी अब भी जागरूकता के अभाव में स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में नहीं हैं। ऐसे मरीजों को तलाश करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अभियान चलाने का खाका तैयार किया है। अनाथालय, वृद्धावस्था आश्रम, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, मदरसा, नवोदय विद्यालय, कारागार, चिह्नित समूहों, ईंट भट्ठे, साप्ताहिक बाजाराें आदि में स्वास्थ्य कर्मी जाएंगे। अभियान में जिले की जनसंख्या की 20 प्रतिशत हाईरिस्क वाली आबादी में मरीजों को तलाश कर उनका उपचार किया जाएगा।
टीबी पर खुलकर बात नहीं करते मरीज : क्षय रोग को खत्म करने के लिए लंबे समय से काम किया जा रहा है। शिक्षण संस्थाओं, सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को जागरूक किया जाता है। धर्मगुरुओं से लोगों को टीबी होने पर दवा खाने की अपील कराई जाती है। सबसे बड़ी समस्या जागरूकता का अभाव है। मरीज टीबी के बारे में खुलकर बात नहीं करते हैं और दूसरों को भी रोगी बना देते हैं। सीएमओ के मुताबिक, एक बार क्षय रोग का पूर्ण कोर्स करने के बाद दोबारा रोग होने की संभावना नहीं रहती है।
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जिले में वर्तमान में करीब छह हजार टीबी के रोगी निक्षय पोर्टल पर दर्ज हैं। ये क्षय रोग की दवा खा रहे हैं। फिर भी काफी रोगी अब भी जागरूकता के अभाव में स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में नहीं हैं। ऐसे मरीजों को तलाश करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अभियान चलाने का खाका तैयार किया है। अनाथालय, वृद्धावस्था आश्रम, नारी निकेतन, बाल संरक्षण गृह, मदरसा, नवोदय विद्यालय, कारागार, चिह्नित समूहों, ईंट भट्ठे, साप्ताहिक बाजाराें आदि में स्वास्थ्य कर्मी जाएंगे। अभियान में जिले की जनसंख्या की 20 प्रतिशत हाईरिस्क वाली आबादी में मरीजों को तलाश कर उनका उपचार किया जाएगा।
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टीबी पर खुलकर बात नहीं करते मरीज : क्षय रोग को खत्म करने के लिए लंबे समय से काम किया जा रहा है। शिक्षण संस्थाओं, सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को जागरूक किया जाता है। धर्मगुरुओं से लोगों को टीबी होने पर दवा खाने की अपील कराई जाती है। सबसे बड़ी समस्या जागरूकता का अभाव है। मरीज टीबी के बारे में खुलकर बात नहीं करते हैं और दूसरों को भी रोगी बना देते हैं। सीएमओ के मुताबिक, एक बार क्षय रोग का पूर्ण कोर्स करने के बाद दोबारा रोग होने की संभावना नहीं रहती है।
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