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Shahjahanpur News: तसलीम ने विकसित की कृत्रिम ऑप्टिकल सिनैप्स
Thu, 20 Mar 2025 12:53 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Thu, 20 Mar 2025 12:53 AM IST
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खुटार के गांव टाह खुर्द कलां निवासी कैज्ञानिक तसलीम खान। स्रोत स्वयं
खुटार। गांव टाह खुर्द कलां के प्रधान शाहिद खान के पुत्र तसलीम खान ने एक अत्याधुनिक कृत्रिम ऑप्टिकल सिनैप्स विकसित किया है। यह अल्ट्रावॉयलेट-ए और अल्ट्रावॉयलेट-सी किरणों को अत्यधिक संवेदनशीलता के साथ पहचान सकता है।
तसलीम की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही मदरसे में हुई है। इसके बाद उन्होंने गांव रामपुर कलां के एलएसपी स्कूल से इंटर किया। एएमयू से बीएससी और एमएससी करने के बाद वह भारत सरकार के सेमी कंडक्टर मिशन के तहत रिसर्च करने ताइवान की नेशनल यांग मिंग चिआओ तुंग यूनिवर्सिटी गए। वहां से आर्टिफिशियल माइंड पर शोध किया।
उनके पिता शाहिद खान खेती करते हैं। तसलीम की मां गृहिणी हैं, लेकिन उन्होंने तसलीम को वैज्ञानिक सोच और उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। आईआईटी दिल्ली और नेशनल यांग मिंग चिआओ तुंग यूनिवर्सिटी के संयुक्त शोध कार्यक्रम के तहत तसलीम खान ने एक अत्याधुनिक कृत्रिम ऑप्टिकल सिनैप्स विकसित किया है। तसलीम का इस पर शोध प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका स्मॉल विले जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
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तसलीम ने बताया कि यह डिवाइस मानव दिमाग की तरह काम करती है। यह एक ऐसी तकनीक है, जो मस्तिष्क के तंत्रिका तंतुओं की तरह काम करने के लिए कंप्यूटर सिस्टम डिजाइन करती है। यह कृत्रिम सिनैप्स यानी तंत्रिका तंतुओं के बीच का संपर्क, रियल टाइम में तेज और ऊर्जा-कुशल तरीके से सूचना प्रोसेस करने में मदद करता है। इसकी महत्ता इसलिए है, क्योंकि यह पारंपरिक कंप्यूटर से कहीं अधिक तेज और कम ऊर्जा खर्च करने वाला है।
यह नई तकनीक न्यूरोमोर्फिक कंप्यूटिंग के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। इससे मानव मस्तिष्क जैसे कुशल और ऊर्जा-संवेदनशील कंप्यूटिंग सिस्टम विकसित किए जा सकते हैं।
तसलीम ने कहा कि उनका सपना अपने गांव और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है, जिससे अगली पीढ़ी के छात्र भी विज्ञान और तकनीक में उल्लेखनीय योगदान दे सके।
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तसलीम की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही मदरसे में हुई है। इसके बाद उन्होंने गांव रामपुर कलां के एलएसपी स्कूल से इंटर किया। एएमयू से बीएससी और एमएससी करने के बाद वह भारत सरकार के सेमी कंडक्टर मिशन के तहत रिसर्च करने ताइवान की नेशनल यांग मिंग चिआओ तुंग यूनिवर्सिटी गए। वहां से आर्टिफिशियल माइंड पर शोध किया।
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उनके पिता शाहिद खान खेती करते हैं। तसलीम की मां गृहिणी हैं, लेकिन उन्होंने तसलीम को वैज्ञानिक सोच और उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। आईआईटी दिल्ली और नेशनल यांग मिंग चिआओ तुंग यूनिवर्सिटी के संयुक्त शोध कार्यक्रम के तहत तसलीम खान ने एक अत्याधुनिक कृत्रिम ऑप्टिकल सिनैप्स विकसित किया है। तसलीम का इस पर शोध प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिका स्मॉल विले जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
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तसलीम ने बताया कि यह डिवाइस मानव दिमाग की तरह काम करती है। यह एक ऐसी तकनीक है, जो मस्तिष्क के तंत्रिका तंतुओं की तरह काम करने के लिए कंप्यूटर सिस्टम डिजाइन करती है। यह कृत्रिम सिनैप्स यानी तंत्रिका तंतुओं के बीच का संपर्क, रियल टाइम में तेज और ऊर्जा-कुशल तरीके से सूचना प्रोसेस करने में मदद करता है। इसकी महत्ता इसलिए है, क्योंकि यह पारंपरिक कंप्यूटर से कहीं अधिक तेज और कम ऊर्जा खर्च करने वाला है।
यह नई तकनीक न्यूरोमोर्फिक कंप्यूटिंग के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। इससे मानव मस्तिष्क जैसे कुशल और ऊर्जा-संवेदनशील कंप्यूटिंग सिस्टम विकसित किए जा सकते हैं।
तसलीम ने कहा कि उनका सपना अपने गांव और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है, जिससे अगली पीढ़ी के छात्र भी विज्ञान और तकनीक में उल्लेखनीय योगदान दे सके।

खुटार के गांव टाह खुर्द कलां निवासी कैज्ञानिक तसलीम खान। स्रोत स्वयं