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मकसूदापुर समेत सहकारी चीनी मिलें नहीं कर रहीं बकाया भुगतान
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पुष्पराज सिंह यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान मजदूर यूनियन।
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल समेत सहकारी क्षेत्र की तिलहर और पुवायां चीनी मिलों में नया पेराई सत्र शुरू हुए करीब दो सप्ताह बीत रहे हैं, लेकिन यह मिलें अभी तक एक अरब, 16 करोड़, 49 लाख रुपये पिछला बकाया गन्ना मूल्य चुकता नहीं कर सकी हैं। इनमें से मकसूदापुर मिल पर किसानों का सर्वाधिक 75.49 करोड़ रुपये बकाया है। अधिकारियों का दावा है कि बजाज मिल प्रबंधन रोजाना औसतन एक करोड़ रुपये भुगतान कर रहा है, लेकिन बीते दो सप्ताह के दौरान मिल अधिकारियों ने सिर्फ छह करोड़ रुपये किसानों के खातों में भेजे हैं।
चीनी मिलों को शासन के निर्देश हैं कि खरीदे गए गन्ना का 14 दिन में किसानों को भुगतान करें, लेकिन जनपद की चीनी मिलें गत कई पेराई सत्रों की तरह बीते पेराई सत्र में भी इस व्यवस्था का पालन नहीं कर सकीं। त्योहारी सीजन गुजर जाने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने से किसान खासे परेशान हुए। किसानों का सर्वाधिक गन्ना मूल्य मकसूदापुर मिल पर बकाया है। किसानों को भुगतान में तेजी लाने के लिए प्रशासन के प्रस्ताव पर शासन ने बकाएदार मिलों के चीनी के स्टॉक में किसानों की हिस्सेदारी 85 से बढ़ाकर 90 फीसदी कर दी है।
इस व्यवस्था के तहत मिलों के गोदाम से जो भी चीनी बिकेगी उससे प्राप्त केवल दस प्रतिशत धनराशि मिलों के अनुरक्षण पर खर्च होगी और शेष रकम से किसानों को भुगतान होगा। इस प्रक्रिया को अपनाने के बावजूद इसमें संदेह है कि मकसूदापुर मिल पिछले पेराई सत्र का संपूर्ण बकाया जल्द चुकता कर पाएगी। इसीलिए शासन से चीनी बिक्री की 90 प्रतिशत धनराशि किसानों के भुगतान पर खर्च करने की विशेष अनुमति ली गई है। अधिकारियों के अनुसार मिल का चीनी गोदाम प्रशासन की निगरानी मेें है और उसमें लगभग 1.40 अरब रुपये की चीनी होने के कारण किसानों को बकाया भुगतान कराने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
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रोजा व निगोही मिल ने किया अग्रिम भुगतान
गत पेराई सत्र का संपूर्ण गन्ना मूल्य चुका चुकी बिरला ग्रुप की रोजा मिल और डालमिया ग्रुप की निगोही मिल ने गन्ना आपूर्ति के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें एडवांस रकम देनी शुरू कर दी है। निगोही मिल ने अभी तक करीब 20 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा है, लेकिन किसानों के खातों में अगली पर्चियों के आधार पर 40 करोड़ रुपये भुगतान कर दिया है। रोजा मिल ने 18 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य दे दिया है, जबकि मिल ने अभी सिर्फ 14 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा है। अधिकारियों के अनुसार इस बार पहले वर्षा और बाद में बाढ़ से करीब दो हजार हेक्टेयर की गन्ना उपज प्रभावित हुई और प्रति इकाई उत्पादन मेें भी कमी देखी जा रही है। इसलिए गन्ना की उपलब्धता बनाए रखने को मिलें किसानों को अग्रिम भुगतान कर रही हैं।
मिल वार गन्ना देयता, भुगतान और बकाया धनराशि (लाख रुपये)
चीनी मिल गन्ना मूल्य भुगतान अवशेष
निगोही मिल 41876.78 41876.78 शून्य
मकसूदापुर मिल 21283.06 13734.06 7549.00
रोजा मिल 23493.90 23493.90 शून्य
तिलहर मिल 11120.85 8620.85 2500.00
पुवायां मिल 8542.04 6942.04 1600.00
(भुगतान की यह स्थिति 04 दिसंबर, 2021 तक की है)
बजाज ग्रुप की गोला गोकर्णनाथ, पलिया, ऐरा आदि अन्य मिलों की तुलना में मकसूदापुर मिल की भुगतान स्थिति सुधार पर है। इस मिल का गोदाम प्रशासन की निगरानी में है, जिसमें पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। शासन से विशेष अनुमति लेकर इस चीनी की बिक्री से प्राप्त 90 प्रतिशत धनराशि से किसानों को भुगतान कराया जा रहा है। इस मिल का बैंकों से भी अनुबंध कराने का आवेदन कर दिया है। अनुबंध स्वीकृत होने पर मिल प्रबंधन बैंक से कर्ज लेकर बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान करने में सक्षम हो जाएगा।
-डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी।
किसानों की बात....
मेरे परिवार के लोगों के नाम चार सट्टे हैं। मेरे परिवार के चारों सट्टों का बजाज चीनी मिल मकसूदापुर के ऊपर पिछले वर्ष का करीब तीन लाख रुपये से अधिक का बकाया है। सरकार को भुगतान जल्द कराना चाहिए। किसानों को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
हरदेव सिंह, गांव कुइयां महोलिया बंडा
किसान सहकारी चीनी मिल पुवायां पर मेरा गत वर्ष का 18759 रुपये बकाया है। नया पेराई सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन पिछले वर्ष का भुगतान नहीं मिल रहा है। सरकार कह रही है कि गन्ने का भुगतान करा दिया है, लेकिन पुवायां की सहकारी चीनी मिल पर तमाम किसानों का बकाया है।
सरला देवी, गांव जेंबा पुवायां
पिछले वर्ष के किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान अभी तक न देना सरकार की मनमानी को दर्शाता है। सरकार किसानों पर अन्याय कर रही है। मैंने फेडरेशन से बात की है। उन्होंने एक सप्ताह में भुगतान देने का आश्वासन दिया है। भुगतान समय से प्राप्त होना किसानों का हक है।
पुष्पराज सिंह यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान मजदूर यूनियन।
चीनी मिल का नया पेराई सत्र शुरू हो गया है लेकिन अभी किसानों का पिछले वर्ष का बकाया भुगतान नहीं हो पाया है। सरकार और मिल प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए और किसानों का गन्ना भुगतान शीघ्र कराकर गन्ना किसानों को राहत देनी चाहिए।
प्रमोद वर्मा, तहसील अध्यक्ष किसान मजदूर यूनियन।
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चीनी मिलों को शासन के निर्देश हैं कि खरीदे गए गन्ना का 14 दिन में किसानों को भुगतान करें, लेकिन जनपद की चीनी मिलें गत कई पेराई सत्रों की तरह बीते पेराई सत्र में भी इस व्यवस्था का पालन नहीं कर सकीं। त्योहारी सीजन गुजर जाने के बावजूद भुगतान नहीं मिलने से किसान खासे परेशान हुए। किसानों का सर्वाधिक गन्ना मूल्य मकसूदापुर मिल पर बकाया है। किसानों को भुगतान में तेजी लाने के लिए प्रशासन के प्रस्ताव पर शासन ने बकाएदार मिलों के चीनी के स्टॉक में किसानों की हिस्सेदारी 85 से बढ़ाकर 90 फीसदी कर दी है।
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इस व्यवस्था के तहत मिलों के गोदाम से जो भी चीनी बिकेगी उससे प्राप्त केवल दस प्रतिशत धनराशि मिलों के अनुरक्षण पर खर्च होगी और शेष रकम से किसानों को भुगतान होगा। इस प्रक्रिया को अपनाने के बावजूद इसमें संदेह है कि मकसूदापुर मिल पिछले पेराई सत्र का संपूर्ण बकाया जल्द चुकता कर पाएगी। इसीलिए शासन से चीनी बिक्री की 90 प्रतिशत धनराशि किसानों के भुगतान पर खर्च करने की विशेष अनुमति ली गई है। अधिकारियों के अनुसार मिल का चीनी गोदाम प्रशासन की निगरानी मेें है और उसमें लगभग 1.40 अरब रुपये की चीनी होने के कारण किसानों को बकाया भुगतान कराने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
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रोजा व निगोही मिल ने किया अग्रिम भुगतान
गत पेराई सत्र का संपूर्ण गन्ना मूल्य चुका चुकी बिरला ग्रुप की रोजा मिल और डालमिया ग्रुप की निगोही मिल ने गन्ना आपूर्ति के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्हें एडवांस रकम देनी शुरू कर दी है। निगोही मिल ने अभी तक करीब 20 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा है, लेकिन किसानों के खातों में अगली पर्चियों के आधार पर 40 करोड़ रुपये भुगतान कर दिया है। रोजा मिल ने 18 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य दे दिया है, जबकि मिल ने अभी सिर्फ 14 करोड़ रुपये का गन्ना खरीदा है। अधिकारियों के अनुसार इस बार पहले वर्षा और बाद में बाढ़ से करीब दो हजार हेक्टेयर की गन्ना उपज प्रभावित हुई और प्रति इकाई उत्पादन मेें भी कमी देखी जा रही है। इसलिए गन्ना की उपलब्धता बनाए रखने को मिलें किसानों को अग्रिम भुगतान कर रही हैं।
मिल वार गन्ना देयता, भुगतान और बकाया धनराशि (लाख रुपये)
चीनी मिल गन्ना मूल्य भुगतान अवशेष
निगोही मिल 41876.78 41876.78 शून्य
मकसूदापुर मिल 21283.06 13734.06 7549.00
रोजा मिल 23493.90 23493.90 शून्य
तिलहर मिल 11120.85 8620.85 2500.00
पुवायां मिल 8542.04 6942.04 1600.00
(भुगतान की यह स्थिति 04 दिसंबर, 2021 तक की है)
बजाज ग्रुप की गोला गोकर्णनाथ, पलिया, ऐरा आदि अन्य मिलों की तुलना में मकसूदापुर मिल की भुगतान स्थिति सुधार पर है। इस मिल का गोदाम प्रशासन की निगरानी में है, जिसमें पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। शासन से विशेष अनुमति लेकर इस चीनी की बिक्री से प्राप्त 90 प्रतिशत धनराशि से किसानों को भुगतान कराया जा रहा है। इस मिल का बैंकों से भी अनुबंध कराने का आवेदन कर दिया है। अनुबंध स्वीकृत होने पर मिल प्रबंधन बैंक से कर्ज लेकर बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान करने में सक्षम हो जाएगा।
-डॉ. खुशीराम भार्गव, जिला गन्ना अधिकारी।
किसानों की बात....
मेरे परिवार के लोगों के नाम चार सट्टे हैं। मेरे परिवार के चारों सट्टों का बजाज चीनी मिल मकसूदापुर के ऊपर पिछले वर्ष का करीब तीन लाख रुपये से अधिक का बकाया है। सरकार को भुगतान जल्द कराना चाहिए। किसानों को बहुत दिक्कत का सामना करना पड़ता है।
हरदेव सिंह, गांव कुइयां महोलिया बंडा
किसान सहकारी चीनी मिल पुवायां पर मेरा गत वर्ष का 18759 रुपये बकाया है। नया पेराई सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन पिछले वर्ष का भुगतान नहीं मिल रहा है। सरकार कह रही है कि गन्ने का भुगतान करा दिया है, लेकिन पुवायां की सहकारी चीनी मिल पर तमाम किसानों का बकाया है।
सरला देवी, गांव जेंबा पुवायां
पिछले वर्ष के किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान अभी तक न देना सरकार की मनमानी को दर्शाता है। सरकार किसानों पर अन्याय कर रही है। मैंने फेडरेशन से बात की है। उन्होंने एक सप्ताह में भुगतान देने का आश्वासन दिया है। भुगतान समय से प्राप्त होना किसानों का हक है।
पुष्पराज सिंह यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष किसान मजदूर यूनियन।
चीनी मिल का नया पेराई सत्र शुरू हो गया है लेकिन अभी किसानों का पिछले वर्ष का बकाया भुगतान नहीं हो पाया है। सरकार और मिल प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए और किसानों का गन्ना भुगतान शीघ्र कराकर गन्ना किसानों को राहत देनी चाहिए।
प्रमोद वर्मा, तहसील अध्यक्ष किसान मजदूर यूनियन।

प्रमोद वर्मा, तहसील अध्यक्ष किसान मजदूर यूनियन।- फोटो : SHAHJAHANPUR

हरदेव सिंह, गांव कुइयां महोलिया बंडा- फोटो : POWAYAN

सरला देवी, गांव जेंबा पुवायां- फोटो : POWAYAN