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पांच हजार सैनिक परिवारों को पहले मिलेंगी गन्ना पर्चियां
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शाहजहांपुर। सीमाओं पर देश की रक्षा करने वाले सैनिकों को पेराई सत्र 2019-20 में गन्ना पर्ची वितरण में प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि सैनिकों को सेना से इतना अवकाश नहीं मिलता कि छुट्टी पर घर आने के बाद गन्ना सप्लाई के लिए पर्चियों का इंतजार या फिर इसके लिए दौड़धूप कर सकें। इसीलिए प्रदेश सरकार ने गन्ना आपूर्ति नीति में सैन्य परिवारों से जुड़े किसानों को पर्चियां प्राथमिकता के आधार पर देने का निर्णय किया है। सैन्य परिवारों के अतिरिक्त लघु सीमांत श्रेणी के लगभग 15 हजार छोटे किसान भी सरकार की इस व्यवस्था से लाभान्वित होंगे।
जिले मेें 1.50 लाख किसानों ने 1.15 लाख हेक्टेयर रकबा में गन्ना बुआई की है। इनमें लगभग पांच हजार ऐसे किसान हैं, जिनके परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना से जुड़ा है। पिछले पेराई सत्र में गन्ना आपूर्ति के लिए सभी श्रेणियों के किसानों को एक सप्ताह आगे तक की पर्चियों का समान वितरण किया गया था। इस व्यवस्था का मिल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों तक सीधी पहुंच रखने वाले बड़े फार्मरों ने खूब फायदा उठाया, लेकिन कम जोत वाले छोटे किसानों को बार-बार चक्कर काटने पर समय से पर्चियां नहीं मिल सकीं। मजबूरन उन्हें कोल्हुओं और क्रशर (लघु शकर संयंत्रों) पर अपना गन्ना समर्थन मूल्य से कम रेट पर देना पड़ा। इसी तरह सेना से अवकाश लेकर घर आए सैनिकों और उनके परिवार के सदस्यों को सप्लाई पर्चियों के लिए क्षेत्रीय समितियों से लेकर मिलों तक अधिकारियों की चिरौरी करनी पड़ी।
गन्ना उपज लेने वाले सैनिक परिवारों और छोटे किसानों के साथ यह स्थिति सूबे के अन्य जनपदों में देखे जाने पर प्रदेश के गन्ना आयुक्त मनीष चौहान ने नवीन पेराई सत्र के लिए घोषित गन्ना सट्टा एवं आपूर्ति नीति के साथ पर्ची वितरण व्यवस्था मेें भी संशोधन कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत सैनिकों एवं उनके आश्रितों और छोटे किसानों को उनके सट्टा के अनुरूप संपूर्ण गन्ना पर्चियां मिलों मेें पेराई शुरू होने के 45 दिन के अंदर जारी कर दी जाएंगी। गन्ना विकास विभाग के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार पर्ची वितरण की नई नीति का लाभ उन किसानों को भी मिलेगा, जो क्षेत्रीय गन्ना समिति के वैध सदस्य होने के बावजूद बीते दो पेराई सत्रों के दौरान किन्हीं कारणों से क्षेत्रीय चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति नहीं कर सके। अभी तक ऐसे किसानों को संदिग्ध मानते हुए उन्हें पर्ची कैलेंडर से बाहर कर दिया जाता था।
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अधिकतम 60 क्विंटल सट्टा कराने वाले छोटे किसान
अधिकतम चार बैलगाड़ी (60 क्विंटल) गन्ना का सट्टा कराने वालों को विभाग ने छोटे किसानों की श्रेणी मेें रखा है। गन्ना आपूर्ति की नई व्यवस्था में किसान एक ट्रॉली की पर्ची पर डबल ट्रॉलियों पर लोड गन्ना की तौल नहीं करा सकेंगे। दरअसल, पेराई सीजन मेें ट्रैक्टर के साथ दोहरी ट्रॉलियां जोड़कर गन्ना लाए जाने से चीनी मिलों के आसपास के मार्गों पर दुर्घटनाएं बढ़ जाती हैं और जाम की स्थिति पैदा होने लगती है। सामान्य श्रेणी के किसानों को मिल चलने के एक सप्ताह पहले पर्ची कैलेंडर जारी कर दिए जाएंगे। इस दौरान गन्ना सप्लाई मेें कोई कठिनाई होने पर किसान अपने क्षेत्र की सहकारी गन्ना समितियों के शिकायत प्रकोष्ठ में अपनी समस्या नोट करा सकते हैं।
जिले की सभी चीनी मिलों में गन्ना पेराई जल्द रफ्तार पकड़ लेगी। डालमिया ग्रुप की निगोही मिल ने 12 नवंबर तक की पर्चियां जारी कर दी हैं। पुवायां सहकारी चीनी मिल ने अगले दो दिन की पर्चियां जारी की हैं। बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल में पेराई जल्द शुरू होगी और इसके लिए वहां के किसानों को शगनिवार से पर्चियां मिलनी शुरू हो गई हैं। बिरला ग्रुप की अवध शुगर वर्कर्स (रोजा मिल) के अधिकारियों ने सोमवार से पर्ची वितरण शुरू करने की सूचना दी है।
-डॉ. खुशीराम, जिला गन्ना अधिकारी
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जिले मेें 1.50 लाख किसानों ने 1.15 लाख हेक्टेयर रकबा में गन्ना बुआई की है। इनमें लगभग पांच हजार ऐसे किसान हैं, जिनके परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना से जुड़ा है। पिछले पेराई सत्र में गन्ना आपूर्ति के लिए सभी श्रेणियों के किसानों को एक सप्ताह आगे तक की पर्चियों का समान वितरण किया गया था। इस व्यवस्था का मिल प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों तक सीधी पहुंच रखने वाले बड़े फार्मरों ने खूब फायदा उठाया, लेकिन कम जोत वाले छोटे किसानों को बार-बार चक्कर काटने पर समय से पर्चियां नहीं मिल सकीं। मजबूरन उन्हें कोल्हुओं और क्रशर (लघु शकर संयंत्रों) पर अपना गन्ना समर्थन मूल्य से कम रेट पर देना पड़ा। इसी तरह सेना से अवकाश लेकर घर आए सैनिकों और उनके परिवार के सदस्यों को सप्लाई पर्चियों के लिए क्षेत्रीय समितियों से लेकर मिलों तक अधिकारियों की चिरौरी करनी पड़ी।
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गन्ना उपज लेने वाले सैनिक परिवारों और छोटे किसानों के साथ यह स्थिति सूबे के अन्य जनपदों में देखे जाने पर प्रदेश के गन्ना आयुक्त मनीष चौहान ने नवीन पेराई सत्र के लिए घोषित गन्ना सट्टा एवं आपूर्ति नीति के साथ पर्ची वितरण व्यवस्था मेें भी संशोधन कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत सैनिकों एवं उनके आश्रितों और छोटे किसानों को उनके सट्टा के अनुरूप संपूर्ण गन्ना पर्चियां मिलों मेें पेराई शुरू होने के 45 दिन के अंदर जारी कर दी जाएंगी। गन्ना विकास विभाग के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार पर्ची वितरण की नई नीति का लाभ उन किसानों को भी मिलेगा, जो क्षेत्रीय गन्ना समिति के वैध सदस्य होने के बावजूद बीते दो पेराई सत्रों के दौरान किन्हीं कारणों से क्षेत्रीय चीनी मिल को गन्ना आपूर्ति नहीं कर सके। अभी तक ऐसे किसानों को संदिग्ध मानते हुए उन्हें पर्ची कैलेंडर से बाहर कर दिया जाता था।
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अधिकतम 60 क्विंटल सट्टा कराने वाले छोटे किसान
अधिकतम चार बैलगाड़ी (60 क्विंटल) गन्ना का सट्टा कराने वालों को विभाग ने छोटे किसानों की श्रेणी मेें रखा है। गन्ना आपूर्ति की नई व्यवस्था में किसान एक ट्रॉली की पर्ची पर डबल ट्रॉलियों पर लोड गन्ना की तौल नहीं करा सकेंगे। दरअसल, पेराई सीजन मेें ट्रैक्टर के साथ दोहरी ट्रॉलियां जोड़कर गन्ना लाए जाने से चीनी मिलों के आसपास के मार्गों पर दुर्घटनाएं बढ़ जाती हैं और जाम की स्थिति पैदा होने लगती है। सामान्य श्रेणी के किसानों को मिल चलने के एक सप्ताह पहले पर्ची कैलेंडर जारी कर दिए जाएंगे। इस दौरान गन्ना सप्लाई मेें कोई कठिनाई होने पर किसान अपने क्षेत्र की सहकारी गन्ना समितियों के शिकायत प्रकोष्ठ में अपनी समस्या नोट करा सकते हैं।
जिले की सभी चीनी मिलों में गन्ना पेराई जल्द रफ्तार पकड़ लेगी। डालमिया ग्रुप की निगोही मिल ने 12 नवंबर तक की पर्चियां जारी कर दी हैं। पुवायां सहकारी चीनी मिल ने अगले दो दिन की पर्चियां जारी की हैं। बजाज ग्रुप की मकसूदापुर मिल में पेराई जल्द शुरू होगी और इसके लिए वहां के किसानों को शगनिवार से पर्चियां मिलनी शुरू हो गई हैं। बिरला ग्रुप की अवध शुगर वर्कर्स (रोजा मिल) के अधिकारियों ने सोमवार से पर्ची वितरण शुरू करने की सूचना दी है।
-डॉ. खुशीराम, जिला गन्ना अधिकारी