{"_id":"205d52b4a4bd8843cd7f74ce138e704a","slug":"strong-wind-and-rain-scattered-the-city-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"तेज हवा और बारिश से शहर अस्त व्यस्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तेज हवा और बारिश से शहर अस्त व्यस्त
शाहजहांपुर।
Updated Sun, 12 Jul 2015 11:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शनिवार रातभर हुई झमाझम बारिश से शहर की सड़कें लबालब हो गईं। इससे लोगों को घरों से निकलने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। रोडवेज बस स्टैंड, कैंट एरिया, गोविंदगंज फ्लाईओवर के आसपास सहित शहर में कई स्थानों पर जलभराव रहा। इससे शहर के लोगों को घूमने-फिरने में काफी दिक्कत हुई।
शनिवार शाम को ही बादल छाने के बाद रात में झमाझम बारिश शुरू हो गई थी। इसके बाद रात भर तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से लोगों का कार्यालयों, बाजारों और दुकानों से घरों में पहुंचना मुश्किल हो गया। अधिकांश लोगों को भीगते हुए घरों तक जाना पड़ा। बारिश से बचने के लिए जो लोग छाते आदि लेकर घरों से आए थे। वे भी काम में नहीं आ सके। वहीं गलियों में जलभराव की वजह से लोगों के कपड़े जूते भी खराब हो गए।
रोडवेज सहित इन स्थानों पर हुआ जलभराव
बारिश होने से शहर के तमाम स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी रहीं। शहर का रोडवेज बस अड्डा, घंटाघर के सामने मशीनरी मार्केट रोड पर, टेलीफोन एक्सचेंज के सामने, अजीजगंज में सहकारी बैंक के सामने, सिंजई और मतानी की गलियों में, गोविंदगंज में फ्लाईओवर के आसपास, अंबा सिनेप्लेक्स वाली गली से लेकर महमंद हद्दफ तक, कैंट क्षेत्र में, सरायकाइयां, ऐमनजई जलालनगर की तराई बस्ती, चमकनी करबला और अंटा की गलियां, पुराना एसपी ऑफिस, बीएसए दफ्तर नगर पालिका परिषद के आसपास एवं अन्य तमाम स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी रही।
विज्ञापन
आज मौसम साफ रहने की उम्मीद
गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक एसएस यादव का कहना है कि शनिवार से लेकर रविवार शाम तक 151 मिलीमीटर बारिश हुई है। सोमवार को मौसम साफ रहने की उम्मीद है। कहा कि शनिवार को तेज बारिश होने से मानसून में अब तेजी नहीं दिख रही है। इससे रविवार रात को बारिश होने के बाद सोमवार को मौसम साफ रहने की उम्मीद जताई है।
रौसरकोठी की नईबस्ती के घरों में घुसा पानी
रौसरकोठी। झमाझम बारिश का असर यूं तो हर जगह हुआ, लेकिन गांव की नई बस्ती के घरों में पानी घुस गया। घरों और गलियों में जलभराव हो जाने की वजह से घरों में रखा अधिकांश सामान खराब हो गया। वहीं लोगों को शनिवार की रात काटनी मुश्किल हो गई। इससे परेशान होकर लोगों ने अपने बच्चों सहित गांव के अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण ली। साथ ही जानवरों को सड़क और खड़ंजे पर बांध दिया।
नईबस्ती के लाल बहादुर, प्रेमकिशोर, लालाराम, मिट्ठू, संजीव, तेजपाल, श्यामू पांडेय, भगवन्नू, असगर, मुनेश्वर दयाल, इस्लाम, हबीब, जाकिर, शमशुल, रामशंकर, सलामत, लौंदूलाल, विनोद आदि के घरों में पानी घुस गया। लोगों के घरों में पानी घुसने की सूचना मौके पर पहुंचे एमएलसी संजय मिश्रा ने जिला प्रशासन को दी। इस पर कानूनगो सुरेंद्र सिंह और लेखपाल श्रीराम ने मौके पर पहुंचकर जलभराव के कारणों को समझा। इस पर एमएलसी ने कहा कि मोहल्ले में जलभराव न हो। इसके लिए नाले का निर्माण कराना होगा। कहा कि वे लोग इसका इस्टीमेट तैयार करें और इसकी मंजूरी शासन से वह दिलवा देंगे। साथ ही पंचायतघर खुलवाकर इन लोगों के रहने की व्यवस्था की गई।
इसलिए घरों घुसा पानी
नईबस्ती मोहल्ले में एक तालाब था, जिसमें बस्ती के सभी घरों का पानी जाता था। इसे बाहर के कुछ दबंग लोगों ने खरीदकर प्लाटिंग करवा दी। इसका विरोध किया गया, लेकिन दबंगों को रोकने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई। ग्रामीणों के मुताबिक सत्तापक्ष के एक नेता के करीबी होने की वजह से पुलिस ने भी प्लाटिंग करने वालों कोई कार्रवाई नहीं की थी। इस पर मजबूरी में गांव के लोगों को शांत होना पड़ा। अब जब बारिश हुई तो पानी के निकास की जगह न होने की वजह से सारा पानी बस्ती में ही भर गया। पहले तो पानी का भराव गलियों में हुआ फिर घरों में भी पानी घुस गया।
बाउंड्रीबाल ढहने से वृद्धा घायल
रौसरकोठी। क्षेत्र की रोजा चीनी मिल की बाउंड्री बाल बारिश से रविवार 11 बजे ढहने से उसके मलबे में दबकर वृद्धा नन्हीं घायल हो गई। वृद्धा के शोर मचाने पर घरवाले मौके पर पहुंचे और नन्हीं को मलबे से बाहर निकाला। घायल वृद्धा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
नदियों के तटवर्ती गांवों पर मंडराने लगा बाढ़ का खतरा
शाहजहांपुर। शनिवार शाम से लेकर रविवार को दिन निकलने तक जिले और आसपास के क्षेत्रों में हुई व्यापक वर्षा से बरसाती नदियां उफनाने के साथ गंगा और रामगंगा का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। हालांकि, अभी सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को गंगा-रामगंगा मेें बैराजों से भारी मात्रा में पानी बहाए जाने की सूचना नहीं मिली है, लेकिन नदियों के जल ग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी वर्षा से शहर के समीप बह रहीं गर्रा और खन्नौत नदियों का जल स्तर भी बढ़ रहा है। तटवर्ती गांवों के लोगों ने बाढ़ से बचने के लिए जानवरों और गृहस्थी के सामान सहित सुरक्षित ठिकाने तलाश करने शुरू कर दिए हैं।
जिले की जलालाबाद और तिलहर तहसील के कलान, अल्हागंज, मिर्जापुर, जैतीपुर, कटरा आदि ब्लॉकों से होकर बहने वाली गंगा, रामगंगा और बहगुल नदियों से हर साल बारिश के सीजन में बाढ़ से सैकड़ों एकड़ फसलें नष्ट होने के साथ कृषि योग्य जमीन भी कटान के दायरे में आकर नदियों की भेंट चढ़ जाती है। अपवाद के तौर पर सदर और पुवायां तहसील के गांवों पर भी गर्रा, खन्नौत, गोमती आदि नदियों का पानी धावा बोलता है, लेकिन इन दोनों तहसीलों में बाढ़ की विपदा तभी आती है जब गंगा और उसकी सहायक रामगंगा उफान पर होती है।
शनिवार रात से लगातार 14 घंटे तक बरसात होने से सारा पानी इलाके की नदियों में सिमटने लगा है। गंगा-रामगंगा में पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के बैराजों से पानी छोड़े जाने से अधिकांश नदियां अपने पेटे से बाहर आने लगी हैं। हालांकि, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता चंद्रशेखर गुप्ता ने अभी बाढ़ से जलालाबाद और तिलहर क्षेत्र के किसी भी गांव को खतरा होने जैसी स्थिति से इनकार किया है।
एक्सईएन गुप्ता ने बताया कि नरौरा बैराज से गंगा में 52 हजार क्यूसेक पानी बहाए जाने की सूचना मिली है। इसी तरह विभागीय नियंत्रण कक्ष को बताया गया कि हरेली, खो, रामनगर, किच्छा आदि बैराजों से रामगंगा में 26700 क्यूसेक पानी बहाया गया है। उन्होंने कहा कि गंगा का 50 हजार क्यूसेक पानी नहरों में खप रहा है। इसलिए अधिक मात्रा में पानी रिलीज होने पर ही गंगा-रामगंगा में बाढ़ की स्थिति पैदा होगी। इसके बावजूद सभी बाढ़ चौकियों पर विभागीय स्टाफ को सतर्क किया जा चुका है।
फिर बढ़ने लगा रामगंगा का पानी
मिर्जापुर। रामगंगा का जलस्तर एकबार फिर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोगों को भू-कटाव का भय सताने लगा है। नदी किनारे आ चुके मकानों को तोड़ने का सिलसिला तो कई दिन से चल रहा है। गांव हरिहरपुर और कुनिया के ग्रामीण नदी के किनारे आ चुके वृक्षों को काटकर लकड़ी सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं।
शुक्रवार और शनिवार को रामगंगा के जलस्तर में गिरावट से तटवर्ती गांव कुनिया शाहनजीरपुर, हरिहरपुर, पहरूआ और मौजमपुर में नदी के किनारे आ चुके पक्के मकानों को ग्रामीण धीरे धीरे तोड़ रहे थे। किंतु एकाएक नदी का जलस्तर एकबार फिर बढ़ने से ग्रामाणों ने अपने मकानों को जल्दी तोड़ने के लिए लेबरों की संख्या इसलिए बढ़ा दी है,कि कहीं ऐसा न हो कि बाढ़ उनके मकानों की ईंट और लकड़ी भी अपने साथ न बहा ले जाये।
खास बात यह है कि जहां ग्रामीण अपनी निजी सम्पत्ति को नदी में बहने से बचने के लिए दिन रात जुटे हुए हैं, वहीं सरकारी भवनों को कोई देखने वाला नहीं है। पहरूआ गंाव के प्राथमिक स्कूल के तीन कमरों का आधा हिस्सा नदी में समा गया है। जिनका हजारों रुपये मूल्य की ईंट और लोहा पानी में बह गया है। स्कूल का जो हिस्सा बचा है,वह भी इस बाढ़ मे बह जाने का पूरा खतरा है। इसी तरह ग्राम हरिहरपुर मे बना प्राथमिक स्कूल टेढ़ा का भवन भी खतरे में है। स्कूल भवन से नदी की दूरी अभी लगभग 15मीटर है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी में बहने से अच्छा स्कूल भवन को नीलाम कर दिया जाये,तो नीलाम से मिलने वाली धनराशि को मिलाकर दूसरी जगह नया भवन बनवाया जा सकता है।
विज्ञापन
शनिवार शाम को ही बादल छाने के बाद रात में झमाझम बारिश शुरू हो गई थी। इसके बाद रात भर तेज हवाओं के साथ हुई बारिश से लोगों का कार्यालयों, बाजारों और दुकानों से घरों में पहुंचना मुश्किल हो गया। अधिकांश लोगों को भीगते हुए घरों तक जाना पड़ा। बारिश से बचने के लिए जो लोग छाते आदि लेकर घरों से आए थे। वे भी काम में नहीं आ सके। वहीं गलियों में जलभराव की वजह से लोगों के कपड़े जूते भी खराब हो गए।
विज्ञापन
रोडवेज सहित इन स्थानों पर हुआ जलभराव
बारिश होने से शहर के तमाम स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी रहीं। शहर का रोडवेज बस अड्डा, घंटाघर के सामने मशीनरी मार्केट रोड पर, टेलीफोन एक्सचेंज के सामने, अजीजगंज में सहकारी बैंक के सामने, सिंजई और मतानी की गलियों में, गोविंदगंज में फ्लाईओवर के आसपास, अंबा सिनेप्लेक्स वाली गली से लेकर महमंद हद्दफ तक, कैंट क्षेत्र में, सरायकाइयां, ऐमनजई जलालनगर की तराई बस्ती, चमकनी करबला और अंटा की गलियां, पुराना एसपी ऑफिस, बीएसए दफ्तर नगर पालिका परिषद के आसपास एवं अन्य तमाम स्थानों पर जलभराव की स्थिति बनी रही।
विज्ञापन
आज मौसम साफ रहने की उम्मीद
गन्ना शोध परिषद के मौसम विश्लेषक एसएस यादव का कहना है कि शनिवार से लेकर रविवार शाम तक 151 मिलीमीटर बारिश हुई है। सोमवार को मौसम साफ रहने की उम्मीद है। कहा कि शनिवार को तेज बारिश होने से मानसून में अब तेजी नहीं दिख रही है। इससे रविवार रात को बारिश होने के बाद सोमवार को मौसम साफ रहने की उम्मीद जताई है।
रौसरकोठी की नईबस्ती के घरों में घुसा पानी
रौसरकोठी। झमाझम बारिश का असर यूं तो हर जगह हुआ, लेकिन गांव की नई बस्ती के घरों में पानी घुस गया। घरों और गलियों में जलभराव हो जाने की वजह से घरों में रखा अधिकांश सामान खराब हो गया। वहीं लोगों को शनिवार की रात काटनी मुश्किल हो गई। इससे परेशान होकर लोगों ने अपने बच्चों सहित गांव के अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण ली। साथ ही जानवरों को सड़क और खड़ंजे पर बांध दिया।
नईबस्ती के लाल बहादुर, प्रेमकिशोर, लालाराम, मिट्ठू, संजीव, तेजपाल, श्यामू पांडेय, भगवन्नू, असगर, मुनेश्वर दयाल, इस्लाम, हबीब, जाकिर, शमशुल, रामशंकर, सलामत, लौंदूलाल, विनोद आदि के घरों में पानी घुस गया। लोगों के घरों में पानी घुसने की सूचना मौके पर पहुंचे एमएलसी संजय मिश्रा ने जिला प्रशासन को दी। इस पर कानूनगो सुरेंद्र सिंह और लेखपाल श्रीराम ने मौके पर पहुंचकर जलभराव के कारणों को समझा। इस पर एमएलसी ने कहा कि मोहल्ले में जलभराव न हो। इसके लिए नाले का निर्माण कराना होगा। कहा कि वे लोग इसका इस्टीमेट तैयार करें और इसकी मंजूरी शासन से वह दिलवा देंगे। साथ ही पंचायतघर खुलवाकर इन लोगों के रहने की व्यवस्था की गई।
इसलिए घरों घुसा पानी
नईबस्ती मोहल्ले में एक तालाब था, जिसमें बस्ती के सभी घरों का पानी जाता था। इसे बाहर के कुछ दबंग लोगों ने खरीदकर प्लाटिंग करवा दी। इसका विरोध किया गया, लेकिन दबंगों को रोकने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई। ग्रामीणों के मुताबिक सत्तापक्ष के एक नेता के करीबी होने की वजह से पुलिस ने भी प्लाटिंग करने वालों कोई कार्रवाई नहीं की थी। इस पर मजबूरी में गांव के लोगों को शांत होना पड़ा। अब जब बारिश हुई तो पानी के निकास की जगह न होने की वजह से सारा पानी बस्ती में ही भर गया। पहले तो पानी का भराव गलियों में हुआ फिर घरों में भी पानी घुस गया।
बाउंड्रीबाल ढहने से वृद्धा घायल
रौसरकोठी। क्षेत्र की रोजा चीनी मिल की बाउंड्री बाल बारिश से रविवार 11 बजे ढहने से उसके मलबे में दबकर वृद्धा नन्हीं घायल हो गई। वृद्धा के शोर मचाने पर घरवाले मौके पर पहुंचे और नन्हीं को मलबे से बाहर निकाला। घायल वृद्धा को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
नदियों के तटवर्ती गांवों पर मंडराने लगा बाढ़ का खतरा
शाहजहांपुर। शनिवार शाम से लेकर रविवार को दिन निकलने तक जिले और आसपास के क्षेत्रों में हुई व्यापक वर्षा से बरसाती नदियां उफनाने के साथ गंगा और रामगंगा का जलस्तर भी बढ़ने लगा है। हालांकि, अभी सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष को गंगा-रामगंगा मेें बैराजों से भारी मात्रा में पानी बहाए जाने की सूचना नहीं मिली है, लेकिन नदियों के जल ग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी वर्षा से शहर के समीप बह रहीं गर्रा और खन्नौत नदियों का जल स्तर भी बढ़ रहा है। तटवर्ती गांवों के लोगों ने बाढ़ से बचने के लिए जानवरों और गृहस्थी के सामान सहित सुरक्षित ठिकाने तलाश करने शुरू कर दिए हैं।
जिले की जलालाबाद और तिलहर तहसील के कलान, अल्हागंज, मिर्जापुर, जैतीपुर, कटरा आदि ब्लॉकों से होकर बहने वाली गंगा, रामगंगा और बहगुल नदियों से हर साल बारिश के सीजन में बाढ़ से सैकड़ों एकड़ फसलें नष्ट होने के साथ कृषि योग्य जमीन भी कटान के दायरे में आकर नदियों की भेंट चढ़ जाती है। अपवाद के तौर पर सदर और पुवायां तहसील के गांवों पर भी गर्रा, खन्नौत, गोमती आदि नदियों का पानी धावा बोलता है, लेकिन इन दोनों तहसीलों में बाढ़ की विपदा तभी आती है जब गंगा और उसकी सहायक रामगंगा उफान पर होती है।
शनिवार रात से लगातार 14 घंटे तक बरसात होने से सारा पानी इलाके की नदियों में सिमटने लगा है। गंगा-रामगंगा में पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के बैराजों से पानी छोड़े जाने से अधिकांश नदियां अपने पेटे से बाहर आने लगी हैं। हालांकि, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता चंद्रशेखर गुप्ता ने अभी बाढ़ से जलालाबाद और तिलहर क्षेत्र के किसी भी गांव को खतरा होने जैसी स्थिति से इनकार किया है।
एक्सईएन गुप्ता ने बताया कि नरौरा बैराज से गंगा में 52 हजार क्यूसेक पानी बहाए जाने की सूचना मिली है। इसी तरह विभागीय नियंत्रण कक्ष को बताया गया कि हरेली, खो, रामनगर, किच्छा आदि बैराजों से रामगंगा में 26700 क्यूसेक पानी बहाया गया है। उन्होंने कहा कि गंगा का 50 हजार क्यूसेक पानी नहरों में खप रहा है। इसलिए अधिक मात्रा में पानी रिलीज होने पर ही गंगा-रामगंगा में बाढ़ की स्थिति पैदा होगी। इसके बावजूद सभी बाढ़ चौकियों पर विभागीय स्टाफ को सतर्क किया जा चुका है।
फिर बढ़ने लगा रामगंगा का पानी
मिर्जापुर। रामगंगा का जलस्तर एकबार फिर बढ़ने से तटवर्ती गांवों के लोगों को भू-कटाव का भय सताने लगा है। नदी किनारे आ चुके मकानों को तोड़ने का सिलसिला तो कई दिन से चल रहा है। गांव हरिहरपुर और कुनिया के ग्रामीण नदी के किनारे आ चुके वृक्षों को काटकर लकड़ी सुरक्षित स्थान पर पहुंचा रहे हैं।
शुक्रवार और शनिवार को रामगंगा के जलस्तर में गिरावट से तटवर्ती गांव कुनिया शाहनजीरपुर, हरिहरपुर, पहरूआ और मौजमपुर में नदी के किनारे आ चुके पक्के मकानों को ग्रामीण धीरे धीरे तोड़ रहे थे। किंतु एकाएक नदी का जलस्तर एकबार फिर बढ़ने से ग्रामाणों ने अपने मकानों को जल्दी तोड़ने के लिए लेबरों की संख्या इसलिए बढ़ा दी है,कि कहीं ऐसा न हो कि बाढ़ उनके मकानों की ईंट और लकड़ी भी अपने साथ न बहा ले जाये।
खास बात यह है कि जहां ग्रामीण अपनी निजी सम्पत्ति को नदी में बहने से बचने के लिए दिन रात जुटे हुए हैं, वहीं सरकारी भवनों को कोई देखने वाला नहीं है। पहरूआ गंाव के प्राथमिक स्कूल के तीन कमरों का आधा हिस्सा नदी में समा गया है। जिनका हजारों रुपये मूल्य की ईंट और लोहा पानी में बह गया है। स्कूल का जो हिस्सा बचा है,वह भी इस बाढ़ मे बह जाने का पूरा खतरा है। इसी तरह ग्राम हरिहरपुर मे बना प्राथमिक स्कूल टेढ़ा का भवन भी खतरे में है। स्कूल भवन से नदी की दूरी अभी लगभग 15मीटर है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी में बहने से अच्छा स्कूल भवन को नीलाम कर दिया जाये,तो नीलाम से मिलने वाली धनराशि को मिलाकर दूसरी जगह नया भवन बनवाया जा सकता है।