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मजबूत इरादों ने बना दिया फ्लाइंग आफीसर
अजय अवस्थी/शाहजहांपुर।
Updated Thu, 24 Dec 2015 11:54 PM IST
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बेटियों ने फख्र से सिर ऊंचा कर दिया, मत कहो इनका बोझ कंधे झुका देता है। ये पंक्तियां नाम और शारीरिक रूप से कोमल, लेकिन मन से दृढ़ दिखने वाले उस व्यक्तित्व पर सटीक बैठ रहीं हैं, जिसने जिले की पहली फ्लाइंग आफीसर बनने का गौरव हासिल किया। वह कोमल पाहूजा।
बेहद हंसमुख स्वभाव की कोमल रामनगर के मोहिंदर पाल पाहूजा और शशि पाहूजा की बेटी है। मोहिंदर पाहूजा ओसीएफ में कार्यरत हैं। कोमल पाहूजा ने 10वीं तक की शिक्षा नगर के डॉ. सुदामा प्रसाद बाल विद्या मंदिर कन्या इंटर कॉलेज में पाई। इंटरमीडिएट तक्षशिला पब्लिक स्कूल से और वर्ष 2014 में स्नातक (बीकॉम) एसएस कॉलेज से किया। ग्रेजुएशन के बाद कोमल ने अपना इरादा पूरा करने के लिए पंख खोल दिए। एक सवाल के जवाब में कोमल बताती है कि उसे एअरफोर्स की यूनिफार्म बेहद पसंद थी। यह यूनिफार्म पहनना उसने अपना पैशन बना लिया और इंटरनेट के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए खोजबीन शुरू कर दी।
इसी बीच इंटरनेट के जरिए ही उसका ग्रुप तैयार हो गया। चूंकि मम्मी-पापा का नाम रोशन करना था, इसलिए उसने रात-दिन पढ़ाई की और पहली बार में ही रिटेन क्लियर कर लिया। इतना ही नहीं, मजबूत इरादों वाली सुकुमार कोमल ने वाराणसी में एसएसबी भी पहली मर्तबा में ही निकाल लिया। इस सफलता में गाइड का काम उनके पिता के मित्र जेके सचदेवा के बेटे श्रवण सचदेवा ने किया। इनके अलावा ग्रुप स्टडी में बिहार की सुप्रिया का भी सहयोग रहा। कोमल बताती है कि पहली बार में सफलता मिलने के पीछे फैमिली सपोर्ट बहुत काम आया। खासतौर पर मम्मी ने बहुत हौसला बढ़ाया।
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नारी सुरक्षा के सवाल पर कोमल का मानना है कि महिलाओं को इसके लिए खुद को तैयार करना होगा। स्वयं को मजबूत किए बिना, समाज से लड़ा नहीं जा सकता। वह पीएम मोदी की दृढ़ता से भी बहुत प्रभावित हैं। बुक रीडिंग का शौक रखने वाली कोमल पाहूजा महापुरुषों, सफल खिलाड़ियों एवं क्रांतिकारियों की वायोग्राफी को भी सफलता की कड़ी मानती हैं।
वह बताती हैं कि 19 दिसंबर को एअरफोर्स एकेडमी हैदराबाद में आर्मी चीफ जनरल दलवीर सिंह सुहाग ने रैंक लगाकर उन्हें फ्लाइट आफीसर बनाने का गौरव प्रदान किया। यहां एअरफोर्स एकेडमी के कमांडेंट एअरमार्शल (वायुसेना मेडल) जीपी सिंह ने भी उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें पहली पोस्टिंग सिरसा हरियाणा में दी गई है। सपनों को साकार कर पहली बार घर पहुंची लाड़ली बिटिया को उनके माता-पिता और भाई वंश पाहूजा ने मिठाई खिलाकर स्वागत किया।
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बेहद हंसमुख स्वभाव की कोमल रामनगर के मोहिंदर पाल पाहूजा और शशि पाहूजा की बेटी है। मोहिंदर पाहूजा ओसीएफ में कार्यरत हैं। कोमल पाहूजा ने 10वीं तक की शिक्षा नगर के डॉ. सुदामा प्रसाद बाल विद्या मंदिर कन्या इंटर कॉलेज में पाई। इंटरमीडिएट तक्षशिला पब्लिक स्कूल से और वर्ष 2014 में स्नातक (बीकॉम) एसएस कॉलेज से किया। ग्रेजुएशन के बाद कोमल ने अपना इरादा पूरा करने के लिए पंख खोल दिए। एक सवाल के जवाब में कोमल बताती है कि उसे एअरफोर्स की यूनिफार्म बेहद पसंद थी। यह यूनिफार्म पहनना उसने अपना पैशन बना लिया और इंटरनेट के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए खोजबीन शुरू कर दी।
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इसी बीच इंटरनेट के जरिए ही उसका ग्रुप तैयार हो गया। चूंकि मम्मी-पापा का नाम रोशन करना था, इसलिए उसने रात-दिन पढ़ाई की और पहली बार में ही रिटेन क्लियर कर लिया। इतना ही नहीं, मजबूत इरादों वाली सुकुमार कोमल ने वाराणसी में एसएसबी भी पहली मर्तबा में ही निकाल लिया। इस सफलता में गाइड का काम उनके पिता के मित्र जेके सचदेवा के बेटे श्रवण सचदेवा ने किया। इनके अलावा ग्रुप स्टडी में बिहार की सुप्रिया का भी सहयोग रहा। कोमल बताती है कि पहली बार में सफलता मिलने के पीछे फैमिली सपोर्ट बहुत काम आया। खासतौर पर मम्मी ने बहुत हौसला बढ़ाया।
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नारी सुरक्षा के सवाल पर कोमल का मानना है कि महिलाओं को इसके लिए खुद को तैयार करना होगा। स्वयं को मजबूत किए बिना, समाज से लड़ा नहीं जा सकता। वह पीएम मोदी की दृढ़ता से भी बहुत प्रभावित हैं। बुक रीडिंग का शौक रखने वाली कोमल पाहूजा महापुरुषों, सफल खिलाड़ियों एवं क्रांतिकारियों की वायोग्राफी को भी सफलता की कड़ी मानती हैं।
वह बताती हैं कि 19 दिसंबर को एअरफोर्स एकेडमी हैदराबाद में आर्मी चीफ जनरल दलवीर सिंह सुहाग ने रैंक लगाकर उन्हें फ्लाइट आफीसर बनाने का गौरव प्रदान किया। यहां एअरफोर्स एकेडमी के कमांडेंट एअरमार्शल (वायुसेना मेडल) जीपी सिंह ने भी उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें पहली पोस्टिंग सिरसा हरियाणा में दी गई है। सपनों को साकार कर पहली बार घर पहुंची लाड़ली बिटिया को उनके माता-पिता और भाई वंश पाहूजा ने मिठाई खिलाकर स्वागत किया।