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Shahjahanpur News: सड़कों पर यमराज बनकर घूम रहे छुट्टा पशु
Tue, 01 Apr 2025 12:25 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Tue, 01 Apr 2025 12:25 AM IST
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मदनापुर के ग्राम सिकंदरपुर कलां के पास सड़क पर घूमते छुट्टा पशु। संवाद
शाहजहांपुर। प्रशासन के तमाम दावों के बीच छुट्टा पशु यमराज बनकर सड़कों पर घूम रहे हैं। वहीं, सांड़ खेतों में व राह चलते लोगों पर हमलावर हो रहे हैं। इसके बाद भी जिम्मेदार अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, 4000 से अधिक पशु जिले में छुट्टा घूम रहे हैं।
गोवंशीय पशुओं को संरक्षित करने के लिए सरकार संवेदनशील है। प्रशासन की तरफ से बार-बार दावे किए जा रहे हैं कि सड़कों को छुट्टा पशुओं से मुक्त कर दिया जाएगा। इसके बाद भी शहर से लेकर गांव तक छुट्टा पशु सड़कों पर खुलेआम घूम रहे हैं। पशु चिकित्सा विभाग के मुताबिक, गो आश्रय स्थलों का निर्माण तेजी से चल रहा है। जल्द ही पशुओं को वहां पहुंचाया जाएगा। छुट्टा गोवंशीय पशु झुंड बनाकर चलते हैं।
यह जिस खेत में घुस जाएं, वहां फसल बर्बाद हो जाती है। गेहूं की फसल तैयार खड़ी है। किसान मजबूरी में रात में जागकर फसल की रखवाली कर रहे हैं। फसल की रखवाली के लिए किसानों को दिन-रात एक करना पड़ रहा है। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
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वर्तमान में ये है स्थिति
- 123 गोआश्रय स्थलों में संरक्षित पशु- 15,179
- सहभागिता योजना में सुपुर्द किए गए पशु- 9049
- कुल संरक्षित पशुओं की संख्या- 24,228
- 10 वृहद गोसंरक्षण केंद्र निर्माणाधीन
-03 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों को मिली स्वीकृति
- मनरेगा से मिले 75 गोआश्रय स्थलों में 65 का निर्माण पूरा
- 22 कैटल कैचर पशु पकड़ने के लिए उपलब्ध
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सहभागिता योजना का चार माह से नहीं मिला भुगतान
-ग्रामीण क्षेत्र में 9049 गोवंशीय पशुओं को सहभागिता योजना के तहत सुपुर्द किया गया है। इसके तहत माह नवंबर तक पशु पालकों का भुगतान हुआ है। मार्च खत्म होने वाला है। नवंबर से मार्च तक का भुगतान पशुपालकों के खातों में नहीं पहुंचा है। मजबूरी में उन्हें खुले में पशु चरने के लिए छोड़ना पड़ रहा है। एक पशु को पालने के लिए 50 रुपये प्रतिदिन की दर से सरकार की ओर से पशुपालक को दिए जाते हैं।
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छुट्टा पशुओं के हमलों में गईं जानें
- 30 जून 2024 में सिंधौली के मिश्रीपुर गांव निवासी संजय सिंह की सांड़ के हमले में मौत।
- 20 अगस्त 2024 को जलालाबाद के शाहपुर गांव निवासी चरन सिंह की सांड़ के हमले में जान गई।
- 15 अक्तूबर 2024 में बंडा के पिपरा जप्ती गांव निवासी ओमप्रकाश की सांड़ के हमले में हुई मौत।
- 18 दिसंबर, 2024 में मदनापुर के बरखेड़ा जैपाल गांव के पास पशु से टकराकर कार सवार दंपती, उनके दो बच्चे समेत सात लोगों की मौत हो गई थी।
- 13 जनवरी 2025 को मदनापुर के नरदरा गांव निवासी लज्जावती ने सांड़ के हमले से हुई मौत।
- 19 जनवरी 2025 में निगोही के घाटबोझ गांव निवासी लीलावती को सांड़ ने पटककर मार डाला था।
- 21 जनवरी 2025 को निगोही के चकौरा गांव निवासी अजयवीर की खेत की रखवाली करते समय मौत।
- 03 मार्च 2025 में तिलहर गांव सुनौरा अजमतपुर निवासी विनीता की सांड़ के हमले में मौत।
- 08 मार्च 2025 में अल्हागंज के लालपुर इमलिया निवासी किसान सुरेंद्र की फसल की रखवाली करते समय सांड़ के हमले में मौत हो गई थी
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नई गोशालाओं का निर्माण हो रहा है। पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। जल्द ही 10 वृहद गोशालाओं को निर्माण पूरा हो जाएगा। छुट्टा पशुओं को गोशालाओं में पहुंचाया जाएगा।
डाॅ. राजेंद्र गंगवार, सीवीओ
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गोवंशीय पशुओं को संरक्षित करने के लिए सरकार संवेदनशील है। प्रशासन की तरफ से बार-बार दावे किए जा रहे हैं कि सड़कों को छुट्टा पशुओं से मुक्त कर दिया जाएगा। इसके बाद भी शहर से लेकर गांव तक छुट्टा पशु सड़कों पर खुलेआम घूम रहे हैं। पशु चिकित्सा विभाग के मुताबिक, गो आश्रय स्थलों का निर्माण तेजी से चल रहा है। जल्द ही पशुओं को वहां पहुंचाया जाएगा। छुट्टा गोवंशीय पशु झुंड बनाकर चलते हैं।
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यह जिस खेत में घुस जाएं, वहां फसल बर्बाद हो जाती है। गेहूं की फसल तैयार खड़ी है। किसान मजबूरी में रात में जागकर फसल की रखवाली कर रहे हैं। फसल की रखवाली के लिए किसानों को दिन-रात एक करना पड़ रहा है। इसके बाद भी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है।
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वर्तमान में ये है स्थिति
- 123 गोआश्रय स्थलों में संरक्षित पशु- 15,179
- सहभागिता योजना में सुपुर्द किए गए पशु- 9049
- कुल संरक्षित पशुओं की संख्या- 24,228
- 10 वृहद गोसंरक्षण केंद्र निर्माणाधीन
-03 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों को मिली स्वीकृति
- मनरेगा से मिले 75 गोआश्रय स्थलों में 65 का निर्माण पूरा
- 22 कैटल कैचर पशु पकड़ने के लिए उपलब्ध
सहभागिता योजना का चार माह से नहीं मिला भुगतान
-ग्रामीण क्षेत्र में 9049 गोवंशीय पशुओं को सहभागिता योजना के तहत सुपुर्द किया गया है। इसके तहत माह नवंबर तक पशु पालकों का भुगतान हुआ है। मार्च खत्म होने वाला है। नवंबर से मार्च तक का भुगतान पशुपालकों के खातों में नहीं पहुंचा है। मजबूरी में उन्हें खुले में पशु चरने के लिए छोड़ना पड़ रहा है। एक पशु को पालने के लिए 50 रुपये प्रतिदिन की दर से सरकार की ओर से पशुपालक को दिए जाते हैं।
छुट्टा पशुओं के हमलों में गईं जानें
- 30 जून 2024 में सिंधौली के मिश्रीपुर गांव निवासी संजय सिंह की सांड़ के हमले में मौत।
- 20 अगस्त 2024 को जलालाबाद के शाहपुर गांव निवासी चरन सिंह की सांड़ के हमले में जान गई।
- 15 अक्तूबर 2024 में बंडा के पिपरा जप्ती गांव निवासी ओमप्रकाश की सांड़ के हमले में हुई मौत।
- 18 दिसंबर, 2024 में मदनापुर के बरखेड़ा जैपाल गांव के पास पशु से टकराकर कार सवार दंपती, उनके दो बच्चे समेत सात लोगों की मौत हो गई थी।
- 13 जनवरी 2025 को मदनापुर के नरदरा गांव निवासी लज्जावती ने सांड़ के हमले से हुई मौत।
- 19 जनवरी 2025 में निगोही के घाटबोझ गांव निवासी लीलावती को सांड़ ने पटककर मार डाला था।
- 21 जनवरी 2025 को निगोही के चकौरा गांव निवासी अजयवीर की खेत की रखवाली करते समय मौत।
- 03 मार्च 2025 में तिलहर गांव सुनौरा अजमतपुर निवासी विनीता की सांड़ के हमले में मौत।
- 08 मार्च 2025 में अल्हागंज के लालपुर इमलिया निवासी किसान सुरेंद्र की फसल की रखवाली करते समय सांड़ के हमले में मौत हो गई थी
नई गोशालाओं का निर्माण हो रहा है। पशुओं को पकड़ने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। जल्द ही 10 वृहद गोशालाओं को निर्माण पूरा हो जाएगा। छुट्टा पशुओं को गोशालाओं में पहुंचाया जाएगा।
डाॅ. राजेंद्र गंगवार, सीवीओ

मदनापुर के ग्राम सिकंदरपुर कलां के पास सड़क पर घूमते छुट्टा पशु। संवाद

मदनापुर के ग्राम सिकंदरपुर कलां के पास सड़क पर घूमते छुट्टा पशु। संवाद