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Shahjahanpur News: छुट्टा पशुओं ने चरी गेहूं की फसल, नाराज किसान ने पूरी कटवाई
Mon, 10 Feb 2025 01:00 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, शाहजहाँपुर
Updated Mon, 10 Feb 2025 01:00 AM IST
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देवकली के गांव रनमस्तपुर में गेहूं की फसल चरते छुट्टा पशु। संवाद
- फोटो : संवाद
देवकली। प्रशासन के दावों के विपरीत किसानों को छुट्टा पशुओं से फसलों को हो रहे नुकसान से कोई राहत नहीं मिल रही है। गत दो दिन में क्षेत्र के तीन किसानों की 17 बीघा में बोई गई लाखों रुपये की फसल छुट्टा पशुओं की भेंट चढ़ गई। इससे नाराज होकर एक किसान ने नौ बीघा गेहूं की फसल मजदूरों से कटवाकर खेत के चारों ओर लगाई गई तारों की बाड़ भी हटा ली है।
गांव के अजय कुमार ने अपने नौ बीघा खेत में गेहूं की बोआई कराई थी। फसल की सुरक्षा के लिए खेत के चारों ओर बल्लियां लगाकर उनपर तारों की बाड़ भी लगाई थी। वह रोजाना सुबह से दिन ढले तक खेतों के आसपास मौजूद रहकर फसल की खुद निगरानी भी करते रहे, लेकिन शनिवार रात छुट्टा पशुओं ने तारों की बाड़ तोड़ डाली और खेत में घुसकर आधी से ज्यादा फसल उजाड़ दी। रविवार सुबह अजय ने खेत पर पहुंचकर फसल बर्वाद देखी तो उन्होंने गांव से दिहाड़ी पर मजदूर बुलाकर शेष बची फसल भी कटवाकर अपना खेत खुद उजाड़ दिया। खेत खाली करके उन्होंने चारों ओर लगाए गए तार भी खोल दिए।
गत बृहस्पतिवार की रात इसी गांव के हरजीत सिंह की पांच बीघा गेहूं की फसल भी छुट्टा पशु उजाड़कर नष्ट कर चुके हैं। इसके बावजूद छुट्टा पशुओं को पकड़ा नहीं जा रहा है। निकटवर्ती गांव पटनी में भी शनिवार की रात छुट्टा पशुओं के झुंड ने अरविंद कुमार के तीन बीघा खेत में तारों की बाड़ तोड़कर हजारों रुपये की फसल नष्ट कर डाली। छुट्टा पशुओं से परेशान किसान द्वारा फसल कटवाने का मामला अधिकारियों के संज्ञान में लाए जाने के बावजूद अभी तक राजस्व विभाग का कोई कर्मचारी फसली नुकसान का आकलन करने नहीं पहुंचा है।
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नष्ट हुई फसल पर किसानों ने लगाई थी हजारों की लागत
-छुट्टा पशुओं से नष्ट हुई फसलों पर किसान मेहनत की गाढ़ी कमाई से हजारों की रकम खर्च कर चुके हैं। सबसे ज्यादा 22 हजार 700 रुपये की लागत अजय ने लगाई थी। उन्होंने बताया कि नौ बीघा खेत की जोताई पर 5400 रुपये, बीज की खरीद पर 3600 रुपये, बोआई के वक्त डीएपी पर 2800 रुपये, बोआई के बाद यूरिया, जिंक, जाइम आदि पर 5500 रुपये, सिंचाई को डीजल पर 2400 रुपये और बाड़ के लिए लकड़ी, बल्ली व तार की खरीद पर 3000 रुपये खर्च किए थे। इसी तरह हरजीत ने पांच बीघा फल पर 11000 रुपये और अरविंद ने तीन बीघा फसल पर करीब 6500 रुपये लागत लगाई थी।
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वर्जन
गांवों में छुट्टा पशुओं की समस्या खत्म करने के लिए देवकली में 30 पशुओं की क्षमता वाली गोशाला का विस्तार कर वहां अतिरिक्त टीन शेड डालने की व्यवस्था जल्द कराई जाएगी।
-सर्वेश कुमार, खंड विकास अधिकारी, बंडा
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गांव के अजय कुमार ने अपने नौ बीघा खेत में गेहूं की बोआई कराई थी। फसल की सुरक्षा के लिए खेत के चारों ओर बल्लियां लगाकर उनपर तारों की बाड़ भी लगाई थी। वह रोजाना सुबह से दिन ढले तक खेतों के आसपास मौजूद रहकर फसल की खुद निगरानी भी करते रहे, लेकिन शनिवार रात छुट्टा पशुओं ने तारों की बाड़ तोड़ डाली और खेत में घुसकर आधी से ज्यादा फसल उजाड़ दी। रविवार सुबह अजय ने खेत पर पहुंचकर फसल बर्वाद देखी तो उन्होंने गांव से दिहाड़ी पर मजदूर बुलाकर शेष बची फसल भी कटवाकर अपना खेत खुद उजाड़ दिया। खेत खाली करके उन्होंने चारों ओर लगाए गए तार भी खोल दिए।
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गत बृहस्पतिवार की रात इसी गांव के हरजीत सिंह की पांच बीघा गेहूं की फसल भी छुट्टा पशु उजाड़कर नष्ट कर चुके हैं। इसके बावजूद छुट्टा पशुओं को पकड़ा नहीं जा रहा है। निकटवर्ती गांव पटनी में भी शनिवार की रात छुट्टा पशुओं के झुंड ने अरविंद कुमार के तीन बीघा खेत में तारों की बाड़ तोड़कर हजारों रुपये की फसल नष्ट कर डाली। छुट्टा पशुओं से परेशान किसान द्वारा फसल कटवाने का मामला अधिकारियों के संज्ञान में लाए जाने के बावजूद अभी तक राजस्व विभाग का कोई कर्मचारी फसली नुकसान का आकलन करने नहीं पहुंचा है।
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नष्ट हुई फसल पर किसानों ने लगाई थी हजारों की लागत
-छुट्टा पशुओं से नष्ट हुई फसलों पर किसान मेहनत की गाढ़ी कमाई से हजारों की रकम खर्च कर चुके हैं। सबसे ज्यादा 22 हजार 700 रुपये की लागत अजय ने लगाई थी। उन्होंने बताया कि नौ बीघा खेत की जोताई पर 5400 रुपये, बीज की खरीद पर 3600 रुपये, बोआई के वक्त डीएपी पर 2800 रुपये, बोआई के बाद यूरिया, जिंक, जाइम आदि पर 5500 रुपये, सिंचाई को डीजल पर 2400 रुपये और बाड़ के लिए लकड़ी, बल्ली व तार की खरीद पर 3000 रुपये खर्च किए थे। इसी तरह हरजीत ने पांच बीघा फल पर 11000 रुपये और अरविंद ने तीन बीघा फसल पर करीब 6500 रुपये लागत लगाई थी।
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वर्जन
गांवों में छुट्टा पशुओं की समस्या खत्म करने के लिए देवकली में 30 पशुओं की क्षमता वाली गोशाला का विस्तार कर वहां अतिरिक्त टीन शेड डालने की व्यवस्था जल्द कराई जाएगी।
-सर्वेश कुमार, खंड विकास अधिकारी, बंडा

देवकली के गांव रनमस्तपुर में गेहूं की फसल चरते छुट्टा पशु। संवाद- फोटो : संवाद