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बोला पिता- बेटियां वापस तो नहीं आ सकतीं, मगर उनकी आत्मा को शांति मिली होगी
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अवधेश कुमार की पत्नी शशि। संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
निगोही (शाहजहांपुर)। दोषियों को सजा-ए-मौत के फैसले के बाद वादी पिता अवधेश ने कहा कि उसकी फूल-सी बच्चियां वापस तो नहीं आ सकतीं लेकिन उनकी आत्मा को शांति जरूर मिली होगी। पुलिस ने तो जांच में उसे ही दोषी बना दिया था, लेकिन अदालत में भरोसा कायम रहा। आज अदालत के फैसले से साबित हो गया कि अभी न्याय जिंदा है।
निगोही थाना क्षेत्र के जेवा मुकुंदपुर गांव में अवधेश दीक्षित और छुटकन्नू उर्फ नत्थूलाल के परिवार के बीच रंजिश काफी समय से चल रही थी। सन् 2000 में प्रधानी के चुनाव ने इसे और बढ़ा कर दिया था। अवधेश ने अपनी भाभी को चुनाव मैदान में उतारा था, जबकि दूसरे पक्ष से दिनेश की पत्नी निर्मला चुनाव लड़ रही थीं। छुटकन्नू का परिवार दिनेश के पक्ष में था। अवधेश के भाई नरेंद्र देव की पत्नी प्रतिमा चुनाव में हार गईं, लेकिन दिनेश और छुटकन्नू के परिवार ने रंजिश मान ली थी।
इसी वजह से दिनेश ने अवधेश के खिलाफ गवाही दी थी, जिसमें पुलिस ने अवधेश को जेल भेज दिया था। आज अवधेश को भले ही न्याय मिल गया हो, लेकिन आंखों के सामने बेटियों को तड़पकर मरते देखने के बावजूद उसे हत्यारा करार दिया गया था। अवधेश ने बेटियों की हत्या का बोझ सिर पर उठाकर दो महीने जेल भी काटी थी। बाद में उसे जमानत मिल गई थी।
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दरअसल छुटकन्नू, नरवेश और राजेंद्र ने जांच अधिकारी और दिनेश के साथ मिलकर ऐसे झूठे सुबूत जुटाए थे कि यह साबित हो जाता कि अवधेश ने ही अपनी गरीबी के चलते अपनी बेटियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अवधेश ने बताया कि उस समय उसकी पांच बेटियां थीं, मगर वह इतना गरीब भी नहीं था कि बेटियों की जान ले ले। उसने अदालत में साबित किया कि उसके पास अपना मकान है, 15 बीघा खेती है, लाइसेंसी राइफल है।
इस पर अदालत सहमत हुई। अवधेश ने बताया कि जब उसे ही जेल भेज दिया गया था तो उसने जेलर से कहा कि अगर संसार में कहीं न्याय है तो एक दिन जरूरत साबित होगा। तब भी उसे अदालत पर भरोसा था। 19 साल बाद अवधेश का भरोसा खरा साबित हुआ। अवधेश ने बताया कि 19 साल दिन-रात इसी घड़ी का इंतजार कर रहे थे जब अदालत से न्याय मिलेगा।
हत्याकांड के बाद गांव से पलायन कर गया परिवार
अवधेश ने बेटियों की हत्या के कुछ समय बाद गांव छोड़ दिया था। दरअसल गांव में घर में घुसकर जिस तरह बेटियों की हत्या कर दी गई उसके बाद से अवधेश परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गया था। न्याय मिलने की जगह जब उसे ही जेल भेज दिया गया तो वह पुलिस की ओर से भी निराश हो गया। इसके बाद अवधेश ने परिवार समेत गांव छोड़ दिया।
अवधेश निगोही कस्बे में आकर रहने लगा और तांगा चलाकर जीवनयापन करने लगा। अवधेश की तीन बेटियों पूजा, रचना, रागिनी की शादी हो चुकी है। दो बेटे शिवम (16) और सत्यम (11) हत्याकांड के बाद पैदा हुए थे। अवधेश की पत्नी शशि देवी का कहना है कि केवल ऊपर वाले ने उनकी मदद की। अदालत ने जो सजा सुनाई है, उससे वह बहुत खुश हैं। बेटियों की हत्या में जब पति को ही जेल भेज दिया तो लगा सब कुछ खत्म हो गया। मगर ईश्वर ने मदद की।
छुटकन्नू की हुई थी हत्या
छुटकन्नू आपराधिक गतिविधियों में रहता था। आए दिन लोगों से झगड़ा करता रहता था। 2008 में छुटकन्नू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गांव के रामनिवास, श्रीनिवास, राजीव, प्रकाश पर हत्या का आरोप लगा था। मुकदमे का वादी छुटकन्नू का बेटा नरवेश है, जिसे सजा-ए-मौज की सजा सुनाई गई है।
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निगोही थाना क्षेत्र के जेवा मुकुंदपुर गांव में अवधेश दीक्षित और छुटकन्नू उर्फ नत्थूलाल के परिवार के बीच रंजिश काफी समय से चल रही थी। सन् 2000 में प्रधानी के चुनाव ने इसे और बढ़ा कर दिया था। अवधेश ने अपनी भाभी को चुनाव मैदान में उतारा था, जबकि दूसरे पक्ष से दिनेश की पत्नी निर्मला चुनाव लड़ रही थीं। छुटकन्नू का परिवार दिनेश के पक्ष में था। अवधेश के भाई नरेंद्र देव की पत्नी प्रतिमा चुनाव में हार गईं, लेकिन दिनेश और छुटकन्नू के परिवार ने रंजिश मान ली थी।
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इसी वजह से दिनेश ने अवधेश के खिलाफ गवाही दी थी, जिसमें पुलिस ने अवधेश को जेल भेज दिया था। आज अवधेश को भले ही न्याय मिल गया हो, लेकिन आंखों के सामने बेटियों को तड़पकर मरते देखने के बावजूद उसे हत्यारा करार दिया गया था। अवधेश ने बेटियों की हत्या का बोझ सिर पर उठाकर दो महीने जेल भी काटी थी। बाद में उसे जमानत मिल गई थी।
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दरअसल छुटकन्नू, नरवेश और राजेंद्र ने जांच अधिकारी और दिनेश के साथ मिलकर ऐसे झूठे सुबूत जुटाए थे कि यह साबित हो जाता कि अवधेश ने ही अपनी गरीबी के चलते अपनी बेटियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अवधेश ने बताया कि उस समय उसकी पांच बेटियां थीं, मगर वह इतना गरीब भी नहीं था कि बेटियों की जान ले ले। उसने अदालत में साबित किया कि उसके पास अपना मकान है, 15 बीघा खेती है, लाइसेंसी राइफल है।
इस पर अदालत सहमत हुई। अवधेश ने बताया कि जब उसे ही जेल भेज दिया गया था तो उसने जेलर से कहा कि अगर संसार में कहीं न्याय है तो एक दिन जरूरत साबित होगा। तब भी उसे अदालत पर भरोसा था। 19 साल बाद अवधेश का भरोसा खरा साबित हुआ। अवधेश ने बताया कि 19 साल दिन-रात इसी घड़ी का इंतजार कर रहे थे जब अदालत से न्याय मिलेगा।
हत्याकांड के बाद गांव से पलायन कर गया परिवार
अवधेश ने बेटियों की हत्या के कुछ समय बाद गांव छोड़ दिया था। दरअसल गांव में घर में घुसकर जिस तरह बेटियों की हत्या कर दी गई उसके बाद से अवधेश परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गया था। न्याय मिलने की जगह जब उसे ही जेल भेज दिया गया तो वह पुलिस की ओर से भी निराश हो गया। इसके बाद अवधेश ने परिवार समेत गांव छोड़ दिया।
अवधेश निगोही कस्बे में आकर रहने लगा और तांगा चलाकर जीवनयापन करने लगा। अवधेश की तीन बेटियों पूजा, रचना, रागिनी की शादी हो चुकी है। दो बेटे शिवम (16) और सत्यम (11) हत्याकांड के बाद पैदा हुए थे। अवधेश की पत्नी शशि देवी का कहना है कि केवल ऊपर वाले ने उनकी मदद की। अदालत ने जो सजा सुनाई है, उससे वह बहुत खुश हैं। बेटियों की हत्या में जब पति को ही जेल भेज दिया तो लगा सब कुछ खत्म हो गया। मगर ईश्वर ने मदद की।
छुटकन्नू की हुई थी हत्या
छुटकन्नू आपराधिक गतिविधियों में रहता था। आए दिन लोगों से झगड़ा करता रहता था। 2008 में छुटकन्नू की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गांव के रामनिवास, श्रीनिवास, राजीव, प्रकाश पर हत्या का आरोप लगा था। मुकदमे का वादी छुटकन्नू का बेटा नरवेश है, जिसे सजा-ए-मौज की सजा सुनाई गई है।

अवधेश । संवाद- फोटो : SHAHJAHANPUR