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डबल मर्डर में 19 साल बाद छह को उम्रकैद
ब्यूरो/शाहजहांपुर
Updated Fri, 12 Aug 2016 11:19 PM IST
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अदालत का फैसला
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निगोही थाना क्षेत्र के गांव रधौला में मई 1997 की शाम को शराब के नशे झूमते हुए गाली गलौज करते हुए असलहों से लैस करीब एक दर्जन युवकों अपनी इस हरकत का विरोध किए जाने पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा कर एक महिला समेत छह को जख्मी कर दिया। उनमें से दो की उपचार के दौरान लखनऊ के अस्पताल में मौत हो गई थी। उस मामले की सुनवाई 19 साल बीत जाने के बाद शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश पंचम एहसानुल्लाह खान ने सुनवाई पूरी करते हुए जीवित बचे छह आरोपियों को दोषीसिद्ध करार दिया। कुछ देर बाद फैसला सुनाते हुए छहों अभियुक्तों को दोहरे कत्ल और अन्य चार के हत्या की कोशिश के जुर्म में उम्र कैद की सजा सुनाई और उन सभी पर 65 - 65 हजार रुपये का जुर्माना मुकर्रर किया। वसूली जाने वाली जुर्माने की राशि से दोनों मृतकों के उत्तराधिकारी को 50- 50 हजार रुपये बतौर प्रतिकर भुगतान किए जाने का आदेश दिया।
19 साल पहले यह बहुचर्चित घटना 17 मई 1997 की सायं करीब साढ़े छह बजे हुई थी। आरोपियों में से दो राजकुमार व देवेंद्र सिंह पीलीभीत के बिलसंडा थाना क्षेत्र के पलियापुर गांव के निवासी थे जबकि अन्य निगोही के ही गांव रधौला के निवासी थे। आरोपियों की संख्या 13 थी और वे अपनी किसी खुशी में शराब पीने के बाद असलहों से लैस होकर रधौला में नरेंद्र पाल सिंह की चौपाल के सामने से गुजर रहे थे। आरोपी जंग बहादुर व राजकुमार सिंह बंदूक लिए हुए थे जबकि अनिल कुमार सिंह दोनाली बंदूक, जयपाल सिंह एक नाली बंदूक, विजय कुमार सिंह तमंचा एवं ओम प्रकाश सिंह, ननकू सिंह, राजकुमार सिंह, राकेश सिंह, वीर सिंह, कन्हई सिंह, राजेंद्र उर्फ गजेंद्र सिंह और दंगल सिंह एक नाली बंदूकों से लैस थे। आरोपी नशे में धुत होकर गालियां देते हुए गुजरने लगे तो नरेंद्र पाल ने विरोध जताया जिस पर आरोपियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। उससे मौके पर मौजूद श्रीमती हीरा, फकीरे सिंह, कुंवर झीनक सिंह, सत्यपाल सिंह, रामकुमार सिंह, मुन्ना सिंह और प्रेमपाल को छर्रे लगे। सभी घायलों को ट्रैक्टर में लादकर अगली सुबह ग्रामीण थाने पहुंचे और घायलों को दिखाते हुए तहरीर दी। थाने में 18 मई 1997 की दोपहर एक बजे एफआईआर दर्ज हुई और घायलों को जिला अस्पताल में भरती कराया गया। वहां हालत गंभीर होने पर फकीरे सिंह और मुन्ना सिंह को लखनऊ के अस्पताल में ले जाकर भरती कराया गया जहां 19 मई 1997 को मुन्ना ने और 22 मई 1997 को फकीरे ने दम तोड़ दिया। फिर इस केस में धारा 302 को जोड़ा गया। मामले की विवेचना में तीन दारोगा (एसआई हरेंद्र पाल सिंह, रामगोपाल और एसके सिंह) लगे। पुलिस की ओर से 17 नवंबर 1997 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सात आरोपी (अनिल कुमार सिंह, विजय कुमार सिंह, जयपाल सिंह, ननकू सिंह, वीर सिंह, कन्हई सिंह और दंगल सिंह) की मौत हो गई। बहस और सुनवाई के दौरान कोर्ट में कुल 10 गवाहों के बयान हुए। अभियोजन अधिकारी खतीब अहमद के तर्कों, पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं तथ्यों और बचाव पक्ष के अधिवक्ता के तर्क का आकलन करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने मुकदमे की सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुनाया।
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19 साल पहले यह बहुचर्चित घटना 17 मई 1997 की सायं करीब साढ़े छह बजे हुई थी। आरोपियों में से दो राजकुमार व देवेंद्र सिंह पीलीभीत के बिलसंडा थाना क्षेत्र के पलियापुर गांव के निवासी थे जबकि अन्य निगोही के ही गांव रधौला के निवासी थे। आरोपियों की संख्या 13 थी और वे अपनी किसी खुशी में शराब पीने के बाद असलहों से लैस होकर रधौला में नरेंद्र पाल सिंह की चौपाल के सामने से गुजर रहे थे। आरोपी जंग बहादुर व राजकुमार सिंह बंदूक लिए हुए थे जबकि अनिल कुमार सिंह दोनाली बंदूक, जयपाल सिंह एक नाली बंदूक, विजय कुमार सिंह तमंचा एवं ओम प्रकाश सिंह, ननकू सिंह, राजकुमार सिंह, राकेश सिंह, वीर सिंह, कन्हई सिंह, राजेंद्र उर्फ गजेंद्र सिंह और दंगल सिंह एक नाली बंदूकों से लैस थे। आरोपी नशे में धुत होकर गालियां देते हुए गुजरने लगे तो नरेंद्र पाल ने विरोध जताया जिस पर आरोपियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। उससे मौके पर मौजूद श्रीमती हीरा, फकीरे सिंह, कुंवर झीनक सिंह, सत्यपाल सिंह, रामकुमार सिंह, मुन्ना सिंह और प्रेमपाल को छर्रे लगे। सभी घायलों को ट्रैक्टर में लादकर अगली सुबह ग्रामीण थाने पहुंचे और घायलों को दिखाते हुए तहरीर दी। थाने में 18 मई 1997 की दोपहर एक बजे एफआईआर दर्ज हुई और घायलों को जिला अस्पताल में भरती कराया गया। वहां हालत गंभीर होने पर फकीरे सिंह और मुन्ना सिंह को लखनऊ के अस्पताल में ले जाकर भरती कराया गया जहां 19 मई 1997 को मुन्ना ने और 22 मई 1997 को फकीरे ने दम तोड़ दिया। फिर इस केस में धारा 302 को जोड़ा गया। मामले की विवेचना में तीन दारोगा (एसआई हरेंद्र पाल सिंह, रामगोपाल और एसके सिंह) लगे। पुलिस की ओर से 17 नवंबर 1997 को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। मुकदमे की सुनवाई के दौरान सात आरोपी (अनिल कुमार सिंह, विजय कुमार सिंह, जयपाल सिंह, ननकू सिंह, वीर सिंह, कन्हई सिंह और दंगल सिंह) की मौत हो गई। बहस और सुनवाई के दौरान कोर्ट में कुल 10 गवाहों के बयान हुए। अभियोजन अधिकारी खतीब अहमद के तर्कों, पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों एवं तथ्यों और बचाव पक्ष के अधिवक्ता के तर्क का आकलन करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने मुकदमे की सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुनाया।
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