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एसएस कॉलेज में कलश यात्रा के साथ श्रीराम कथा का हुआ शुभारंभ
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मुमुक्षु आश्रम में व्यास गद्दी पर विराजमान संत विजय कौशल महाराज
- फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। देश की आजादी व मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता चिन्मयानंद सरस्वती की आयु के 75 वर्ष पूरे होने पर ‘मुमुक्षु महोत्सव’ का शुक्रवार को विधिवत शुभारंभ हो गया। सुबह सात बजे दैवी संपद महामंडल की दैनिक प्रार्थना हुई। विश्वशांति के लए रुद्रमहायज्ञ व सुंदरकांड का पाठ हुआ। इसके बाद कलश यात्रा के साथ श्रीराम कथा का प्रारंभ हुआ।
शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ में पं. आदर्श पांडेय ने विधि-विधान से कलश पूजन के बाद यात्रा प्रारंभ की गई। व्यास विजय कौशल महाराज ने श्रीरामचरित मानस की चौपाई ‘मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी’ से कथा का प्रारंभ किया। व्यास ने कहा कि भगवान की भक्ति को प्राप्त करने के लिए गुरु के आशीर्वाद को परम आवश्यक है। बिना गुरु की कृपा से भक्तों के लिए ईश्वर की भक्ति का पूर्ण फल नहीं मिलता। भगवत कथा को सुनकर भक्त गण बहुत ही सरलता से भगवान की कृपा को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने विभीषण के राम की शरण में आने का प्रसंग सुनाया।
महाविद्यालय की प्रबंध समिति के पूर्व सचिव सुरेश सिंघल ने जगतगुरु रामानुजाचार्य, वासुदेवाचार्य, विजय कौशल महाराज, स्वामी हरिहरानंद सरस्वती, स्वामी अभेदानंद सरस्वती का पूजन किया। मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि मेरे जीवन के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मुमुक्षु आश्रम में शिक्षा के साथ-साथ धर्म का संगम दृष्टिगोचर हो रहा है।
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जगतगुरु रामानुजाचार्य, स्वामी वासुदेवाचार्य जी के द्वारा श्रोताओं को आशीष वचनों से अभिसिंचित किया। इस मौके पर महाविद्यालय की प्रबंध समिति के सचिव डॉ. अवनीश मिश्रा, प्राचार्य डॉ. अनुराग अग्रवाल, लॉ कॉलेज प्राचार्य डॉ. जयशंकर ओझा, एसएसएमवी प्रधानाचार्य नरेंद्र शर्मा, मुमुक्षु शिक्षा संकुल के सभी शिक्षक, शिक्षिकाएं व श्रोता मौजूद रहे।
भजन संध्या का हुआ आयोजन
एसएस कॉलेज के संगीत विभाग की ओर से स्वामी शुकदेवानंद स्मृति सभागार में भजन संध्या का आयोजन किया। विभागाध्यक्ष डॉ. कविता भटनागर के निर्देशन में विद्यार्थियों भजन प्रस्तुत किए। एसएस लॉ कॉलेज के छात्र हर्षित सिंह ने ‘सांवरी सूरत पै मोहन दिल दीवाना हो गया’ भजन सुनाया। एनएसएस इकाई के स्वयंसेवकों ने लघु नाटिका का मंचन किया। संगीत विभाग की प्राध्यापिका डॉ. प्रतिभा सक्सेना आदि मौजूद रहीं।
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शंकर मुमुक्षु विद्यापीठ में पं. आदर्श पांडेय ने विधि-विधान से कलश पूजन के बाद यात्रा प्रारंभ की गई। व्यास विजय कौशल महाराज ने श्रीरामचरित मानस की चौपाई ‘मंगल भवन अमंगल हारी द्रवहु सो दशरथ अजिर बिहारी’ से कथा का प्रारंभ किया। व्यास ने कहा कि भगवान की भक्ति को प्राप्त करने के लिए गुरु के आशीर्वाद को परम आवश्यक है। बिना गुरु की कृपा से भक्तों के लिए ईश्वर की भक्ति का पूर्ण फल नहीं मिलता। भगवत कथा को सुनकर भक्त गण बहुत ही सरलता से भगवान की कृपा को प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने विभीषण के राम की शरण में आने का प्रसंग सुनाया।
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महाविद्यालय की प्रबंध समिति के पूर्व सचिव सुरेश सिंघल ने जगतगुरु रामानुजाचार्य, वासुदेवाचार्य, विजय कौशल महाराज, स्वामी हरिहरानंद सरस्वती, स्वामी अभेदानंद सरस्वती का पूजन किया। मुमुक्षु शिक्षा संकुल के मुख्य अधिष्ठाता चिन्मयानंद सरस्वती ने कहा कि मेरे जीवन के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में मुमुक्षु आश्रम में शिक्षा के साथ-साथ धर्म का संगम दृष्टिगोचर हो रहा है।
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जगतगुरु रामानुजाचार्य, स्वामी वासुदेवाचार्य जी के द्वारा श्रोताओं को आशीष वचनों से अभिसिंचित किया। इस मौके पर महाविद्यालय की प्रबंध समिति के सचिव डॉ. अवनीश मिश्रा, प्राचार्य डॉ. अनुराग अग्रवाल, लॉ कॉलेज प्राचार्य डॉ. जयशंकर ओझा, एसएसएमवी प्रधानाचार्य नरेंद्र शर्मा, मुमुक्षु शिक्षा संकुल के सभी शिक्षक, शिक्षिकाएं व श्रोता मौजूद रहे।
भजन संध्या का हुआ आयोजन
एसएस कॉलेज के संगीत विभाग की ओर से स्वामी शुकदेवानंद स्मृति सभागार में भजन संध्या का आयोजन किया। विभागाध्यक्ष डॉ. कविता भटनागर के निर्देशन में विद्यार्थियों भजन प्रस्तुत किए। एसएस लॉ कॉलेज के छात्र हर्षित सिंह ने ‘सांवरी सूरत पै मोहन दिल दीवाना हो गया’ भजन सुनाया। एनएसएस इकाई के स्वयंसेवकों ने लघु नाटिका का मंचन किया। संगीत विभाग की प्राध्यापिका डॉ. प्रतिभा सक्सेना आदि मौजूद रहीं।

मुमुक्षु आश्रम में आयोजित श्रीरामकथा में मौजूद श्रोता- फोटो : SHAHJAHANPUR