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Shahjahanpur News: धूमधाम से निकाली श्री गणेश शोभायात्रा
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रेती स्थित बाबा मनोकरण मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते कथाव्यास पंडित राहुल कृष्ण दीक
जलालाबाद। भगवान गणेश की शोभायात्रा बुधवार को नगर के विभिन्न मार्गों से बैंडबाजे के साथ धूमधाम से निकाली गई। बाद में रामलीला मैदान पर भगवान गणेश और भूमि का पूजन किया गया। इसके साथ ही नगर में रामलीला मेले का शुभारंभ हो गया। भगवान परशुराम के मंदिर से आरंभ हुई शोभायात्रा में हाथ में धर्म ध्वजा लिए मंदिर के महंत सत्यदेव पांडेय साथ चले। रामताल रोड, सदर बाजार, और नल वाली गली होती हुई शोभायात्रा रामलीला मैदान पर पहुंची। पंडित अखिलेश दीक्षित ने मंत्रोच्चार के साथ भगवान गणेश और भूमि का पूजन कर हवन संपन्न कराया। इस दौरान दशकों से चली आ रही परंपरा के अनुसार परशुराम मंदिर से लाई गई ध्वजा को मेला मैदान पर स्थापित किया गया। यह ध्वजा रामलीला के समापन के बाद उतारकर परशुराम मंदिर को सौंप दी जाएगी। संवाद
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श्रद्धालुओं को सुनाए श्रीमद् भागवत के कई प्रसंग
रोजा। रेती के बाबा मनोकरण मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में चौथे दिन बुधवार को कथा व्यास पंडित राहुल कृष्ण दीक्षित ने भक्त प्रहलाद के चरित्र, समुद्र मंथन, भगवान श्रीराम के जन्म और श्रीकृष्ण अवतार की कथा सुनाई। कथा व्यास ने कहा कि भगवान विष्णु के परम भक्त बालक प्रह्लाद को उनके अत्याचारी पिता ने मारने के कई प्रयास किए, लेकिन भगवान ने हर बार अपने सच्चे भक्त की रक्षा की। समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मंथन के लिए मंदार पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बनाकर समुद्र मथा गया। सर्वप्रथम हलाहल विष निकला तो सभी डरकर इधर-उधर भागने लगे। तत्पश्चात भगवान शिव ने विष को गले में धारण कर लिया और नीलकंठ कहलाए। बाद में कामधेनु, ऐरावत, चंद्रमा, लक्ष्मी जी, अमृत आदि 14 रत्न निकले। कथा व्यास ने कहा कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम और द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारियों का अंत करने और धर्म की स्थापना के लिए मनुष्य रूप में जन्म लिया। अंत में भगवान की आरती और श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण हुआ। संवाद
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प्रभु पर विश्वास से असंभव को भी जाता है संभव
अल्हागंज। बारह पत्थर देवस्थान के मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा में बुधवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथाव्यास पंडित सत्यदेव द्विवेदी ने वन में सीता जी की खोज में भटकते प्रभु श्रीराम, लंका दहन आदि प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि माता सीता की खोज में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की व्याकुलता मानव जीवन में प्रेम, समर्पण और कर्तव्यबोध का प्रतीक है। हनुमानजी के समुद्र लांघकर लंका पहुंचने, माता सीता को अशोक वाटिका में ढाढ़स बंधाने और रावण की लंका काे जला डालने का उल्लेख करते हुए कथा व्यास ने कहा कि जब उद्देश्य धर्म की रक्षा का हो और भावना सच्ची हो, तो कोई भी बाधा स्थायी नहीं होती। श्रीराम के दूत बनकर हनुमानजी ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रभु पर विश्वास और साहस से असंभव को भी संभव किया जा सकता है। संवाद
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श्रीराम जन्म पर बधाई गीतों से गूंजा कथा पंडाल
तिलहर। बरैंचा गांव के प्राचीन शिव मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को कथावाचक पंडित शिवम मिश्रा ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। जन्म पर बधाई गीत आरंभ होते ही पंडाल श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कथावाचक ने कहा कि त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों से पृथ्वी पर अधर्म का बोलबाला हो गया था। ऐसे में धर्म की स्थापना और भक्तों के उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अयोध्या में राजा दशरथ के पुत्र रूप में अवतार लिया। व्यवस्था में मंदिर के पुजारी सच्चिदानंद तिवारी, रामानंद तिवारी, अंकित कुमार, रोहित, आकाश तिवारी, छोटेलाल आदि ग्रामीणों का सहयोग रहा। संवाद
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श्रद्धालुओं को सुनाए श्रीमद् भागवत के कई प्रसंग
रोजा। रेती के बाबा मनोकरण मंदिर परिसर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में चौथे दिन बुधवार को कथा व्यास पंडित राहुल कृष्ण दीक्षित ने भक्त प्रहलाद के चरित्र, समुद्र मंथन, भगवान श्रीराम के जन्म और श्रीकृष्ण अवतार की कथा सुनाई। कथा व्यास ने कहा कि भगवान विष्णु के परम भक्त बालक प्रह्लाद को उनके अत्याचारी पिता ने मारने के कई प्रयास किए, लेकिन भगवान ने हर बार अपने सच्चे भक्त की रक्षा की। समुद्र मंथन का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि मंथन के लिए मंदार पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी बनाकर समुद्र मथा गया। सर्वप्रथम हलाहल विष निकला तो सभी डरकर इधर-उधर भागने लगे। तत्पश्चात भगवान शिव ने विष को गले में धारण कर लिया और नीलकंठ कहलाए। बाद में कामधेनु, ऐरावत, चंद्रमा, लक्ष्मी जी, अमृत आदि 14 रत्न निकले। कथा व्यास ने कहा कि त्रेता युग में भगवान श्रीराम और द्वापर में भगवान श्रीकृष्ण ने अत्याचारियों का अंत करने और धर्म की स्थापना के लिए मनुष्य रूप में जन्म लिया। अंत में भगवान की आरती और श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण हुआ। संवाद
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प्रभु पर विश्वास से असंभव को भी जाता है संभव
अल्हागंज। बारह पत्थर देवस्थान के मंदिर परिसर में आयोजित श्रीराम कथा में बुधवार को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। कथाव्यास पंडित सत्यदेव द्विवेदी ने वन में सीता जी की खोज में भटकते प्रभु श्रीराम, लंका दहन आदि प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि माता सीता की खोज में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की व्याकुलता मानव जीवन में प्रेम, समर्पण और कर्तव्यबोध का प्रतीक है। हनुमानजी के समुद्र लांघकर लंका पहुंचने, माता सीता को अशोक वाटिका में ढाढ़स बंधाने और रावण की लंका काे जला डालने का उल्लेख करते हुए कथा व्यास ने कहा कि जब उद्देश्य धर्म की रक्षा का हो और भावना सच्ची हो, तो कोई भी बाधा स्थायी नहीं होती। श्रीराम के दूत बनकर हनुमानजी ने यह सिद्ध कर दिया कि प्रभु पर विश्वास और साहस से असंभव को भी संभव किया जा सकता है। संवाद
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श्रीराम जन्म पर बधाई गीतों से गूंजा कथा पंडाल
तिलहर। बरैंचा गांव के प्राचीन शिव मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बुधवार को कथावाचक पंडित शिवम मिश्रा ने भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया। जन्म पर बधाई गीत आरंभ होते ही पंडाल श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कथावाचक ने कहा कि त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों से पृथ्वी पर अधर्म का बोलबाला हो गया था। ऐसे में धर्म की स्थापना और भक्तों के उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अयोध्या में राजा दशरथ के पुत्र रूप में अवतार लिया। व्यवस्था में मंदिर के पुजारी सच्चिदानंद तिवारी, रामानंद तिवारी, अंकित कुमार, रोहित, आकाश तिवारी, छोटेलाल आदि ग्रामीणों का सहयोग रहा। संवाद

रेती स्थित बाबा मनोकरण मंदिर परिसर में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते कथाव्यास पंडित राहुल कृष्ण दीक