{"_id":"6164901e8ebc3e57891e5ce3","slug":"shaheed-shahjahanpur-news-bly4626036174","type":"story","status":"publish","title_hn":"दोस्तों ने बतायाः सारज कहते थे, दुश्मन के सामने खड़ा रहूंगा सीना तान कर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दोस्तों ने बतायाः सारज कहते थे, दुश्मन के सामने खड़ा रहूंगा सीना तान कर
विज्ञापन
सारज सिंह के दोस्त गुरचरन सिंह
- फोटो : POWAYAN
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुवायां (शाहजहांपुर)। सारज सिंह दोस्तों से कहते थे कि कभी दुश्मनों से आमना-सामना हुआ तो उनके दांत खट्टे कर दूंगा। दुश्मनों के सामने सीना तान कर खड़ा होकर मुकाबला करूंगा। सारज सिंह के पड़ोसी और दोस्त गुरचरन सिंह ने बताया कि वह सारज सिंह के साथ एक ही स्कूल में पढ़ते थे। सारज सिंह एक क्लास सीनियर थे, लेकिन दोनों की दोस्ती बहुत पक्की थी।
सारज सिंह किशोर अवस्था से ही सेना में जाने का सपना देखते थे और कहते थे कि देश सेवा का मौका मिलना सौभाग्य की बात है। इसके बाद सारज सिंह का चयन सेना में हो गया तो सारज सिंह के छुट्टी पर घर आने पर ही मुलाकात होती थी, लेकिन मोबाइल पर बात और व्हाट्सएप पर चैटिंग होती रहती थी। सारज सिंह जब भी घर आते थे तो बताते थे कि कश्मीर में तैनाती है और वहां आतंकवाद का जोर है।
उनमें इस बात का गुस्सा था कि पाकिस्तान आतंकवादियों को भारत में भेजकर घटनाओं को अंजाम दिलवाता है। सारज सिंह कहा करते थे कि कभी आमना-सामना हुआ तो दुश्मन देश के पिट्ठुओं को नाकों तले चने चबा देंगे और सीना तानकर दुश्मनों के सामने जाकर उनको भारत के जांबाजों के साहस और शौर्य का एहसास करा देंगे। आज सारज सिंह के शहीद होने की जानकारी मिली है। सारज सिंह जो कहा करते थे, वह कर दिखाया और आतंकवादियों को डटकर मुकाबला करते हुए शहीद हो गए।
विज्ञापन
बहादुर था सारज सिंह, सेना ने और निखारा
बंडा। सारज सिंह के पड़ोस में सतवीर सिंह का घर है। सतवीर सिंह के भी तीन पुत्र संदीप सिंह, गुरविंदर सिंह, गगनदीप सिंह सेना में हैं। गुरविंदर सिंह इन दिनों छुट्टी पर घर आए हुए हैं। गुरविंदर सिंह ने बताया कि वह 221 फील्ड रेजीमेंट देहरादून में तैनात है। वह 18 सितंबर से घर आए हुए हैं। गुराविंदर सिंह ने बताया कि वह सारज सिंह से ढाई वर्ष पहले मिले थे। इसके बाद सारज सिंह घर आते तो वह ड्यूटी पर होते और जब वह घर आते तो सारज सिंह ड्यूटी पर होते थे। संवाद
विज्ञापन
सारज सिंह किशोर अवस्था से ही सेना में जाने का सपना देखते थे और कहते थे कि देश सेवा का मौका मिलना सौभाग्य की बात है। इसके बाद सारज सिंह का चयन सेना में हो गया तो सारज सिंह के छुट्टी पर घर आने पर ही मुलाकात होती थी, लेकिन मोबाइल पर बात और व्हाट्सएप पर चैटिंग होती रहती थी। सारज सिंह जब भी घर आते थे तो बताते थे कि कश्मीर में तैनाती है और वहां आतंकवाद का जोर है।
विज्ञापन
उनमें इस बात का गुस्सा था कि पाकिस्तान आतंकवादियों को भारत में भेजकर घटनाओं को अंजाम दिलवाता है। सारज सिंह कहा करते थे कि कभी आमना-सामना हुआ तो दुश्मन देश के पिट्ठुओं को नाकों तले चने चबा देंगे और सीना तानकर दुश्मनों के सामने जाकर उनको भारत के जांबाजों के साहस और शौर्य का एहसास करा देंगे। आज सारज सिंह के शहीद होने की जानकारी मिली है। सारज सिंह जो कहा करते थे, वह कर दिखाया और आतंकवादियों को डटकर मुकाबला करते हुए शहीद हो गए।
विज्ञापन
बहादुर था सारज सिंह, सेना ने और निखारा
बंडा। सारज सिंह के पड़ोस में सतवीर सिंह का घर है। सतवीर सिंह के भी तीन पुत्र संदीप सिंह, गुरविंदर सिंह, गगनदीप सिंह सेना में हैं। गुरविंदर सिंह इन दिनों छुट्टी पर घर आए हुए हैं। गुरविंदर सिंह ने बताया कि वह 221 फील्ड रेजीमेंट देहरादून में तैनात है। वह 18 सितंबर से घर आए हुए हैं। गुराविंदर सिंह ने बताया कि वह सारज सिंह से ढाई वर्ष पहले मिले थे। इसके बाद सारज सिंह घर आते तो वह ड्यूटी पर होते और जब वह घर आते तो सारज सिंह ड्यूटी पर होते थे। संवाद

सारज सिंह के दोस्त गुरविंदर सिंह- फोटो : POWAYAN