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स्कूल के बच्चों को धरने पर बैठाया
शाहजहांपुर।
Updated Wed, 16 Sep 2015 11:10 PM IST
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शहर के मोहल्ला सरायकाइयां स्थित रामबाग गौशाला और वहीं के बाबा रामदास स्कूल की प्रबंध समितियों के बीच जमीन पर कब्जे को लेकर चल रहे विवाद में विद्यालय प्रबंध समिति ने अपना पक्ष मजबूत करने को स्कूल के बच्चों को ही मोहरा बनाकर उन्हें बुधवार को कलक्ट्रेट में धरना पर बिठा दिया।
सदर बाजार कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक ने जमीन विवाद में नन्हे-मुन्ने बच्चों को इस्तेमाल किए जाने पर सख्त ऐतराज करके उन्हें कलक्ट्रेट से घर वापस भेज दिया। इसका स्कूल के लिपिक और भाजपा कार्यकर्ता ने विरोध किया तो इंस्पेक्टर ने उसे थप्पड़ मारकर हिरासत में ले लिया। इस बीच, वहां पहुंचे भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कार्यकर्ता लिपिक को पुलिस के चंगुल से जैसे-तैसे मुक्त कराया।
यह है जमीन विवाद की असली वजह
शहर के उद्योगपति परिवारों के पुरखों ने कई दशक पहले मिश्रीपुर गांव की गाटा संख्या 12 से लेकर 15 पर दर्ज जमीन दान करके वहां रामबाग गौशाला कायम की थी। उसके परिसर में मंदिर भी बनाया जिसकी देखरेख संत प्रवृत्ति के बाबा रामदास ने शुरू की। बाबा रामदास से उनके छोटे भाई के बेटे काशीनाथ शर्मा ने रोड के किनारे गाटा नंबर 12 वाली खाली पड़ी जगह पर विद्यालय खोलने की मंशा जताई। बाबा की सहमति से काशीनाथ ने उनके नाम से विद्यालय खोलकर कालांतर में शिक्षा विभाग से मान्यता भी हासिल कर ली। 26 सितंबर 1996 को बाबा रामदास का देहावसान हो गया। इधर, गायों की संख्या बढ़ने पर गौशाला समिति ने निर्माण कार्य के लिए नींव खुदवानी शुरू की तो स्वयं को रामदास विद्यालय का संस्थापक बताने वाले काशीनाथ ने इसका विरोध किया। गौशाला समिति ने राजस्व अभिलेखों की जांच कराई तो पता चला कि दो दशक पहले गौशाला की काफी जमीन विद्यालय के नाम दर्ज हो चुकी है। कमिश्नरी अदालत बरेली से फैसला गौशाला समिति के पक्ष में मिलने के बावजूद विवाद गौशाला और विद्यालय समिति के बीच जारी है।
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बच्चों के साथ आए शिक्षकों को पुलिस ने दी सीख
कलक्ट्रेट में धरना स्थल पर स्कूल की खाकी ड्रेस पहने बच्चों को बैठा देख उधर से निकले सदर इंस्पेक्टर जेपी तिवारी ने सारा माजरा समझने के बाद बच्चे लेकर आए शिक्षक सियाराम, मीरा देवी, मनोरमा, उमाकांत मिश्रा आदि को यह कहते हुए आड़े हाथों लिया कि 17 वर्ष से कम आयु के लोगों पर धरना पर बिठाना अपराध है। उन्होंने कहा कि यदि कोई विवाद है तो उसमें बच्चों को मोहरा बनाने के बजाय उसका विधि सम्मत निदान खोजने का प्रयास करें।
भड़क उठा इंस्पेक्टर तिवारी का गुस्सा
इंस्पेक्टर तिवारी की नसीहत पर बच्चों को लेकर शिक्षक वहां से चले गए। धरना स्थल से कुछ फासले पर खड़े विद्यालय के लिपिक व भाजपा कार्यकर्ता ने धरना समाप्त करने का विरोध किया। पुलिस कर्मियों के टोकने पर लिपिक ने तीखे तेवर दिखाए तो सदर इंस्पेक्टर ने उसके गाल पर थप्पड़ जड़कर उसे अपनी जिप्सी में बिठा लिया। संयोग से उसी वक्त उधर से गुजरे भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सत्यभान सिंह भदौरिया ने कार्यकर्ता लिपिक को पुलिस की गिरफ्त में देखा तो उसे जिप्सी से निकालकर अपने साथ ले गए। बाद में विद्यालय परिवार की ओर से डीएम के नाम दिए ज्ञापन में एक उद्योगपति पर स्कूल की जमीन पर निर्माण कराने का आरोप लगाया, लेकिन इसका प्रतिवाद करते हुए उद्योगपति ने कहा कि वह कार्य व्यस्तता के कारण बीते दो दिन से रामबाग गौशाला गए ही नहीं।
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सदर बाजार कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक ने जमीन विवाद में नन्हे-मुन्ने बच्चों को इस्तेमाल किए जाने पर सख्त ऐतराज करके उन्हें कलक्ट्रेट से घर वापस भेज दिया। इसका स्कूल के लिपिक और भाजपा कार्यकर्ता ने विरोध किया तो इंस्पेक्टर ने उसे थप्पड़ मारकर हिरासत में ले लिया। इस बीच, वहां पहुंचे भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कार्यकर्ता लिपिक को पुलिस के चंगुल से जैसे-तैसे मुक्त कराया।
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यह है जमीन विवाद की असली वजह
शहर के उद्योगपति परिवारों के पुरखों ने कई दशक पहले मिश्रीपुर गांव की गाटा संख्या 12 से लेकर 15 पर दर्ज जमीन दान करके वहां रामबाग गौशाला कायम की थी। उसके परिसर में मंदिर भी बनाया जिसकी देखरेख संत प्रवृत्ति के बाबा रामदास ने शुरू की। बाबा रामदास से उनके छोटे भाई के बेटे काशीनाथ शर्मा ने रोड के किनारे गाटा नंबर 12 वाली खाली पड़ी जगह पर विद्यालय खोलने की मंशा जताई। बाबा की सहमति से काशीनाथ ने उनके नाम से विद्यालय खोलकर कालांतर में शिक्षा विभाग से मान्यता भी हासिल कर ली। 26 सितंबर 1996 को बाबा रामदास का देहावसान हो गया। इधर, गायों की संख्या बढ़ने पर गौशाला समिति ने निर्माण कार्य के लिए नींव खुदवानी शुरू की तो स्वयं को रामदास विद्यालय का संस्थापक बताने वाले काशीनाथ ने इसका विरोध किया। गौशाला समिति ने राजस्व अभिलेखों की जांच कराई तो पता चला कि दो दशक पहले गौशाला की काफी जमीन विद्यालय के नाम दर्ज हो चुकी है। कमिश्नरी अदालत बरेली से फैसला गौशाला समिति के पक्ष में मिलने के बावजूद विवाद गौशाला और विद्यालय समिति के बीच जारी है।
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बच्चों के साथ आए शिक्षकों को पुलिस ने दी सीख
कलक्ट्रेट में धरना स्थल पर स्कूल की खाकी ड्रेस पहने बच्चों को बैठा देख उधर से निकले सदर इंस्पेक्टर जेपी तिवारी ने सारा माजरा समझने के बाद बच्चे लेकर आए शिक्षक सियाराम, मीरा देवी, मनोरमा, उमाकांत मिश्रा आदि को यह कहते हुए आड़े हाथों लिया कि 17 वर्ष से कम आयु के लोगों पर धरना पर बिठाना अपराध है। उन्होंने कहा कि यदि कोई विवाद है तो उसमें बच्चों को मोहरा बनाने के बजाय उसका विधि सम्मत निदान खोजने का प्रयास करें।
भड़क उठा इंस्पेक्टर तिवारी का गुस्सा
इंस्पेक्टर तिवारी की नसीहत पर बच्चों को लेकर शिक्षक वहां से चले गए। धरना स्थल से कुछ फासले पर खड़े विद्यालय के लिपिक व भाजपा कार्यकर्ता ने धरना समाप्त करने का विरोध किया। पुलिस कर्मियों के टोकने पर लिपिक ने तीखे तेवर दिखाए तो सदर इंस्पेक्टर ने उसके गाल पर थप्पड़ जड़कर उसे अपनी जिप्सी में बिठा लिया। संयोग से उसी वक्त उधर से गुजरे भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सत्यभान सिंह भदौरिया ने कार्यकर्ता लिपिक को पुलिस की गिरफ्त में देखा तो उसे जिप्सी से निकालकर अपने साथ ले गए। बाद में विद्यालय परिवार की ओर से डीएम के नाम दिए ज्ञापन में एक उद्योगपति पर स्कूल की जमीन पर निर्माण कराने का आरोप लगाया, लेकिन इसका प्रतिवाद करते हुए उद्योगपति ने कहा कि वह कार्य व्यस्तता के कारण बीते दो दिन से रामबाग गौशाला गए ही नहीं।