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विकास निधि: 35 करोड़ रुपये 12 दिन में ठिकाने लगाने की शुरू हुई होड़
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शाहजहांपुर। जिले की ग्राम पंचायतों को चालू वित्त वर्ष में विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए राज्य वित्त एवं 14वें वित्त आयोग मद से प्राप्त 192 करोड़ रुपये विकास कार्यों पर व्यय होने थे, लेकिन अभी तक 157 करोड़ रुपये खर्च हो सके हैं। बीते दिन मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने 50 प्रतिशत और इससे कम धनराशि खर्च करने वाली 176 ग्राम पंचायतों में हुए कामों की समीक्षा करते हुए वहां के ग्राम प्रधानों और सचिवों को अवशेष धनराशि 25 मार्च तक व्यय करने के निर्देश दिए थे। इसके साथ ही संबंधित ग्राम पंचायतों में विकास मद में अवशेष 35 करोड़ रुपये की धनराशि 12 दिन में खर्च करने की अघोषित होड़ शुरू हो गई है।
जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए राज्य वित्त एवं 14वें वित्त आयोग से चालू वित्त वर्ष में 150 करोड़ रुपये बजट स्वीकृत कर शासन ने यह धनराशि अवमुक्त की थी। गत वित्त वर्ष 2018-19 में इन दोनों मदों में प्राप्त धनराशि तमाम कामों पर खर्च होने के बाद 42 करोड़ रुपये शेष बचे थे। इस तरह चालू वित्त वर्ष में ग्राम पंचायतों की विकास निधि बढ़कर 192 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले विकास विभाग के अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों के खर्च ब्योरे का आकलन करने पर पाया कि 176 ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें आहरित कराए गए बजट की 50 फीसदी और इससे अधिक धनराशि अभी तक व्यय नहीं हो सकी है।
इनमेें विकास खंड की 24, ददरौल की 21, सिंधौली की 17 और जलालाबाद की 16 ग्राम पंचायतें शामिल हैं, जो कि खर्च में फिसड्डी साबित हुईं। चूंकि, मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दे रखे हैं। इसलिए सीडीओ ने संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रधानों और सचिवों के साथ बैठक कर उन्हें जनहित के काम कराने का पाठ पढ़ाया तो उन्होंने तरह-तरह के बहाने गढ़ने शुरू कर दिए। बैठक मेें ग्राम पंचायत वार समीक्षा से स्पष्ट हुआ कि आपरेशन कायाकल्प के तहत ग्राम पंचायतों के सकारी भवनों जैसे स्कूलों में रैंप और किचन बनाने, पंचायत घर, एएनएम सेंटर, पीएचसी आदि में टाइल्स लगाने, रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट बनाने, मॉडल टायलेट बनाने जैसे बुनियादी काम अभी तक नहीं हो सके है। सीडीओ के निर्देश के बाद बिना किसी कार्य योजना के यह काम होने पर सरकारी धन की बर्बादी तय मानी जा रही है।
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समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया है कि कई ग्राम पंचायतों में जरूरी काम कराए जा चुके हैं, लेकिन इंटरनेट की समस्या के कारण डोंगल नहीं चले और विभाग के प्रिया साफ्टवेयर पर व्यय ब्योरा डाउनलोड नहीं हो रहा है। प्रधानों से कहा गया है कि ऐसे मामलों में उनके स्तर से कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन जहां काम नियत समय सीमा में नहीं होंगे, वहां के ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव जवाबदेह माने जाएंगे।
- महेंद्र सिंह तंवर, मुख्य विकास अधिकारी
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जिले की ग्राम पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए राज्य वित्त एवं 14वें वित्त आयोग से चालू वित्त वर्ष में 150 करोड़ रुपये बजट स्वीकृत कर शासन ने यह धनराशि अवमुक्त की थी। गत वित्त वर्ष 2018-19 में इन दोनों मदों में प्राप्त धनराशि तमाम कामों पर खर्च होने के बाद 42 करोड़ रुपये शेष बचे थे। इस तरह चालू वित्त वर्ष में ग्राम पंचायतों की विकास निधि बढ़कर 192 करोड़ रुपये हो गई। वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले विकास विभाग के अधिकारियों ने ग्राम पंचायतों के खर्च ब्योरे का आकलन करने पर पाया कि 176 ऐसी ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें आहरित कराए गए बजट की 50 फीसदी और इससे अधिक धनराशि अभी तक व्यय नहीं हो सकी है।
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इनमेें विकास खंड की 24, ददरौल की 21, सिंधौली की 17 और जलालाबाद की 16 ग्राम पंचायतें शामिल हैं, जो कि खर्च में फिसड्डी साबित हुईं। चूंकि, मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दे रखे हैं। इसलिए सीडीओ ने संबंधित ग्राम पंचायतों के प्रधानों और सचिवों के साथ बैठक कर उन्हें जनहित के काम कराने का पाठ पढ़ाया तो उन्होंने तरह-तरह के बहाने गढ़ने शुरू कर दिए। बैठक मेें ग्राम पंचायत वार समीक्षा से स्पष्ट हुआ कि आपरेशन कायाकल्प के तहत ग्राम पंचायतों के सकारी भवनों जैसे स्कूलों में रैंप और किचन बनाने, पंचायत घर, एएनएम सेंटर, पीएचसी आदि में टाइल्स लगाने, रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट बनाने, मॉडल टायलेट बनाने जैसे बुनियादी काम अभी तक नहीं हो सके है। सीडीओ के निर्देश के बाद बिना किसी कार्य योजना के यह काम होने पर सरकारी धन की बर्बादी तय मानी जा रही है।
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समीक्षा बैठक में यह तथ्य सामने आया है कि कई ग्राम पंचायतों में जरूरी काम कराए जा चुके हैं, लेकिन इंटरनेट की समस्या के कारण डोंगल नहीं चले और विभाग के प्रिया साफ्टवेयर पर व्यय ब्योरा डाउनलोड नहीं हो रहा है। प्रधानों से कहा गया है कि ऐसे मामलों में उनके स्तर से कोई आपत्ति नहीं होगी, लेकिन जहां काम नियत समय सीमा में नहीं होंगे, वहां के ग्राम प्रधान और पंचायत सचिव जवाबदेह माने जाएंगे।
- महेंद्र सिंह तंवर, मुख्य विकास अधिकारी