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आरटीई : 117 बच्चों को पसंद नहीं आए स्कूल
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शाहजहांपुर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) में प्रवेश की प्रक्रिया समाप्त हो गई। इसके बावजूद लाॅटरी में नाम निकलने वाले 117 बच्चों को प्रवेश नहीं मिल सका है। विभाग अब उनसे वजह तलाश करने के लिए पत्राचार करेगा।
निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के प्रवेश लेने का नियम है। स्कूल संचालक बच्चों का प्रवेश लेने में आना-कानी करते हैं। इस बार आरटीई के तहत चार चरणों में आवेदन किए गए थे। योजना के तहत जांच के बाद लॉटरी के माध्यम से नाम निकाले गए। उसके बाद बीएसए कार्यालय से प्रवेश के लिए आदेश जारी किए गए।
चारों चरणों में चयनित 1067 लोगों को आदेश पत्र दिए गए। इनमें 950 छात्र-छात्राओं के ही निजी स्कूलों में प्रवेश हो सके। शेष में कुछ को स्कूल पसंद नहीं आए। कई बच्चों का स्कूलों ने मानक का पेच फंसाकर प्रवेश लेने से इन्कार कर दिया। अब ऐसे स्कूलों का डाटा तलाशने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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बीएसए कार्यालय से प्रवेश नहीं लेने वाले स्कूलों से पत्राचार कर वजह पूछी जाएगी। संभावना है कि कुछ बच्चे आवेदन करने के बाद अपने अभिभावकों के साथ दूसरे प्रदेश में चले गए हैं।
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आउट ऑफ स्कूल बच्चों को तलाशने में कवायद शुरू
जनपद के बेसिक स्कूलों में प्रवेश के लिए आउट ऑफ स्कूल बच्चों को तलाश करने की कवायद शुरू हो गई है। शिक्षकों को बच्चों को तलाश करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। आउट ऑफ स्कूल बच्चों का नामांकन किया जाएगा। उसके बाद विशेष शिक्षक उन्हें एक साल तक पढ़ाएंगे।
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निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों पर आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों के प्रवेश लेने का नियम है। स्कूल संचालक बच्चों का प्रवेश लेने में आना-कानी करते हैं। इस बार आरटीई के तहत चार चरणों में आवेदन किए गए थे। योजना के तहत जांच के बाद लॉटरी के माध्यम से नाम निकाले गए। उसके बाद बीएसए कार्यालय से प्रवेश के लिए आदेश जारी किए गए।
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चारों चरणों में चयनित 1067 लोगों को आदेश पत्र दिए गए। इनमें 950 छात्र-छात्राओं के ही निजी स्कूलों में प्रवेश हो सके। शेष में कुछ को स्कूल पसंद नहीं आए। कई बच्चों का स्कूलों ने मानक का पेच फंसाकर प्रवेश लेने से इन्कार कर दिया। अब ऐसे स्कूलों का डाटा तलाशने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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बीएसए कार्यालय से प्रवेश नहीं लेने वाले स्कूलों से पत्राचार कर वजह पूछी जाएगी। संभावना है कि कुछ बच्चे आवेदन करने के बाद अपने अभिभावकों के साथ दूसरे प्रदेश में चले गए हैं।
आउट ऑफ स्कूल बच्चों को तलाशने में कवायद शुरू
जनपद के बेसिक स्कूलों में प्रवेश के लिए आउट ऑफ स्कूल बच्चों को तलाश करने की कवायद शुरू हो गई है। शिक्षकों को बच्चों को तलाश करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। आउट ऑफ स्कूल बच्चों का नामांकन किया जाएगा। उसके बाद विशेष शिक्षक उन्हें एक साल तक पढ़ाएंगे।