{"_id":"68682a22f7aa7e778c08d89c","slug":"rs-27-lakh-blown-from-account-after-digital-arrest-for-three-days-shahjahanpur-news-c-122-1-spn1004-147377-2025-07-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shahjahanpur News: तीन दिन डिजिटल अरेस्ट कर खाते से उड़ाए 27 लाख रुपये","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shahjahanpur News: तीन दिन डिजिटल अरेस्ट कर खाते से उड़ाए 27 लाख रुपये
विज्ञापन
शाहजहांपुर। डिजिटल अरेस्ट की तीसरी घटना प्रकाश में आई है। मनी लॉन्ड्रिंग में फंसने का डर दिखाकर साइबर ठगों ने बेल व नोटिस के नाम पर तीन दिन डिजिटल अरेस्ट रखा। 27 लाख रुपये ठगे जाने के बाद जब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ तो उसने साइबर थाने में तहरीर दी। पुलिस का मानना है कि हाल में पकड़े गए साइबर ठगों के गिरोह से इस वारदात के तार जुड़े हुए हैं।
मदनापुर के रहने वाले अरुण कुमार के पास 11 जून को एक फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया और कहा कि उसके पास मनी लॉन्ड्रिंग के दो करोड़ रुपये आए हैं। उनके खिलाफ केस दर्ज होगा। यह सुनकर अरुण डर गए। फिर ठग ने उन्हें बेल व नोटिस के नाम पर तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा।
ठग ने अपनी बातों में फंसाकर खाते से 27 लाख रुपये दूसरे खाते में डलवा लिए। इससे पहले छह मई को चौक कोतवाली क्षेत्र के दीवान जोगराज निवासी शरदचंद्र से साइबर ठगों ने इसी तरह सीबीआई अधिकारी बनकर एक करोड़ रुपये से ज्यादा ठगी की थी। दो जुलाई को पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सात लोगों को गिरफ्तार किया था। उनके पकड़े जाने के बाद अरुण ने साइबर थाने में तहरीर दी है।
विज्ञापन
पुलिस ने इस मामले में अपनी जांच शुरू कर दी है। फरवरी में साइबर ठग ने मुंबई पुलिस में साइबर चीफ बताकर तारीन जलालनगर निवासी होम्योपैथी के परामर्शदाता अजय सक्सेना को एक बड़े घोटाले में शामिल होने का डर दिखाकर 16 दिन डिजिटल अरेस्ट कर 13 लाख रुपये ठग लिए थे।
-
पुलिस या कोई एजेंसी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती
एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक धोखाधड़ी की तकनीक है। इसमें अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी या एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर व्यक्ति को डराते हैं कि वह किसी अपराध में फंस गया है और उसे डिजिटल रूप से गिरफ्तार किया जा रहा है। पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी ऐसा नहीं करती है। अगर कभी इस तरह की कॉल आए तो संबंधित थाने में जानकारी दें।
--
हाल में पकड़े गए गिरोह से इस वारदात के तार जुड़े हुए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। लोगों को साइबर ठगी के खिलाफ जागरूक होने की जरूरत है।
- राजेश द्विवेदी, एसपी
विज्ञापन
मदनापुर के रहने वाले अरुण कुमार के पास 11 जून को एक फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताया और कहा कि उसके पास मनी लॉन्ड्रिंग के दो करोड़ रुपये आए हैं। उनके खिलाफ केस दर्ज होगा। यह सुनकर अरुण डर गए। फिर ठग ने उन्हें बेल व नोटिस के नाम पर तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा।
विज्ञापन
ठग ने अपनी बातों में फंसाकर खाते से 27 लाख रुपये दूसरे खाते में डलवा लिए। इससे पहले छह मई को चौक कोतवाली क्षेत्र के दीवान जोगराज निवासी शरदचंद्र से साइबर ठगों ने इसी तरह सीबीआई अधिकारी बनकर एक करोड़ रुपये से ज्यादा ठगी की थी। दो जुलाई को पुलिस ने साइबर ठगी करने वाले गिरोह के सात लोगों को गिरफ्तार किया था। उनके पकड़े जाने के बाद अरुण ने साइबर थाने में तहरीर दी है।
विज्ञापन
पुलिस ने इस मामले में अपनी जांच शुरू कर दी है। फरवरी में साइबर ठग ने मुंबई पुलिस में साइबर चीफ बताकर तारीन जलालनगर निवासी होम्योपैथी के परामर्शदाता अजय सक्सेना को एक बड़े घोटाले में शामिल होने का डर दिखाकर 16 दिन डिजिटल अरेस्ट कर 13 लाख रुपये ठग लिए थे।
-
पुलिस या कोई एजेंसी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती
एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक धोखाधड़ी की तकनीक है। इसमें अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी या एजेंसी का प्रतिनिधि बताकर व्यक्ति को डराते हैं कि वह किसी अपराध में फंस गया है और उसे डिजिटल रूप से गिरफ्तार किया जा रहा है। पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी ऐसा नहीं करती है। अगर कभी इस तरह की कॉल आए तो संबंधित थाने में जानकारी दें।
हाल में पकड़े गए गिरोह से इस वारदात के तार जुड़े हुए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। लोगों को साइबर ठगी के खिलाफ जागरूक होने की जरूरत है।
- राजेश द्विवेदी, एसपी