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सहरी के बाद रखा रोजा, शाम को इफ्तारी से खोला
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शाहजहांपुर। रमजान का दूसरा रोजा रविवार को रखा गया। सहरी के लिए सुबह तीन बजे से ही घरों में हलचल शुरू हो गई। खजूर और दूध के अलावा अन्य पकवानों से सहरी की गई। फज्र की नमाज के लिए अजान गूंजने पर इस बार कोई मस्जिदों में नहीं जा पाया, लॉकडाउन की वजह से सभी को घर में ही नमाज अदा करनी पड़ी। इसके बाद कुरान की आयतें पढ़ी गईं।
लॉकडाउन के चलते मस्जिदों में इकट्ठा होने पर रोक है। मुस्लिम समाज के लोगों से घरों रहकर ही खुदा की इबादत करने की अपील की गई है। जिसके चलते रविवार को सुबह सहरी के बाद कोई भी घरों से नहीं निकला, सिर्फ जरूरत का सामान खरीदने के लिए ही कुछ लोग बाजार और मोहल्लों की दुकानों पर पहुंचे। बाकी सब घरों में रहकर खुदा की इबादत में मसरूफ रहें। दोपहर बाद इफ्तारी के लिए तैयारियां शुरू हो गई और पकवान बनाए गए। जिनका इफ्तारी के समय लुफ्त उठाया गया।
बाजारों में खरीदारी के लिए पहुंचे लोग
शहर के बहादुरगंज और केरुगंज स्थित बाजार खुलने पर लोग खरीदारी के लिए पहुंचे और जरूरत का सामान खरीदा। गल्ला मंडी में जहां शक्कर, रवा, काजू-बादाम की बिक्री हुई, तो वहीं फलों के ठेलों पर सबसे ज्यादा खजूर की मांग रही। इसके आलावा पपीता, अंगूर, संतरा और सेब भी खूब बिका।
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एक महीने रोजे रखने का मतलब खुदा में यकीन रखना
शहर काजी मसूद हसन ने बताया कि रमजान के महीने में रोजे रखना मुसलमानों के लिए पाक है। एक महीने तक रोजे रखना का मतलब खुदा में यकीन रखना और उसकी इबादत करना। रोजे में पांच वक्त की नमाज अदा की जाती है। रोजे रखना हर मुसलमान के लिए जरूरी होता है। रमजान के महीने में दो चीजें सबसे अहम होती है पहला सहरी और दूसरा इफ्तार। सहरी दिन में सूरज के निकलने से पहले किया जाता है जिसमें हर दिन सुबह तय समय पर भोजन किया जाता है। इसके बाद पूरे दिन कुछ भी नहीं खाया जाता। सहरी करने को सुन्नत कहा जाता है। वहीं जब शाम के समय सूरज डूब जाता है तब रोजेदार रोजा खोलते हैं जिसे इफ्तार कहा जाता है।
मुकद्दस रमजान
सुन्नी
सोमवार रोजा इफ्तार 6:48
सहरी 4:03
शिया
रोजा इफ्तार 6:49
सहरी 3:54
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लॉकडाउन के चलते मस्जिदों में इकट्ठा होने पर रोक है। मुस्लिम समाज के लोगों से घरों रहकर ही खुदा की इबादत करने की अपील की गई है। जिसके चलते रविवार को सुबह सहरी के बाद कोई भी घरों से नहीं निकला, सिर्फ जरूरत का सामान खरीदने के लिए ही कुछ लोग बाजार और मोहल्लों की दुकानों पर पहुंचे। बाकी सब घरों में रहकर खुदा की इबादत में मसरूफ रहें। दोपहर बाद इफ्तारी के लिए तैयारियां शुरू हो गई और पकवान बनाए गए। जिनका इफ्तारी के समय लुफ्त उठाया गया।
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बाजारों में खरीदारी के लिए पहुंचे लोग
शहर के बहादुरगंज और केरुगंज स्थित बाजार खुलने पर लोग खरीदारी के लिए पहुंचे और जरूरत का सामान खरीदा। गल्ला मंडी में जहां शक्कर, रवा, काजू-बादाम की बिक्री हुई, तो वहीं फलों के ठेलों पर सबसे ज्यादा खजूर की मांग रही। इसके आलावा पपीता, अंगूर, संतरा और सेब भी खूब बिका।
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एक महीने रोजे रखने का मतलब खुदा में यकीन रखना
शहर काजी मसूद हसन ने बताया कि रमजान के महीने में रोजे रखना मुसलमानों के लिए पाक है। एक महीने तक रोजे रखना का मतलब खुदा में यकीन रखना और उसकी इबादत करना। रोजे में पांच वक्त की नमाज अदा की जाती है। रोजे रखना हर मुसलमान के लिए जरूरी होता है। रमजान के महीने में दो चीजें सबसे अहम होती है पहला सहरी और दूसरा इफ्तार। सहरी दिन में सूरज के निकलने से पहले किया जाता है जिसमें हर दिन सुबह तय समय पर भोजन किया जाता है। इसके बाद पूरे दिन कुछ भी नहीं खाया जाता। सहरी करने को सुन्नत कहा जाता है। वहीं जब शाम के समय सूरज डूब जाता है तब रोजेदार रोजा खोलते हैं जिसे इफ्तार कहा जाता है।
मुकद्दस रमजान
सुन्नी
सोमवार रोजा इफ्तार 6:48
सहरी 4:03
शिया
रोजा इफ्तार 6:49
सहरी 3:54