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रोजा चीनी मिल के कर्मियों को दिए घर जाने के निर्देश
रोजा।
Updated Wed, 05 Aug 2015 11:58 PM IST
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शासन-प्रशासन को रोजा चीनी मिल प्रबंधन ने सूचना दिए बगैर मिल की मशीनों की मरम्मत का काम बंद कर दिया। इतना ही यहां काम करने वाले श्रमिकों को घर जाने के निर्देश दे दिए गए। रोजा वर्क्स के मजदूर संगठन ने इसे मिल मालिकों द्वारा मिल बंद कर भागने की साजिश करार देते हुए डीएम से कार्रवाई की मांग की है तथा क्षेत्र के गन्ना किसानों के भुगतान की मांग दोहराई है।
रोजा शुगर वर्क्स मजदूर संगठन के अध्यक्ष रवींद्र शुक्ला ने डीएम से बुधवार को भेंट कर बताया कि रोजा चीनी मिल का प्रबंधन और मालिकान मिल को बंद कर रहे हैं। इसके तहत एक अगस्त से मिल की मशीनों की होने वाली मरम्मत का काम बंद कर दिया गया तथा यहां काम करने वाले सैकड़ों कर्मियों को घर जाने को कह दिया गया है।
बता दें कि रोजा चीनी मिल पर क्षेत्र के किसानों का करोड़ों रुपये बकाया है। बार-बार हाईकोर्ट से फटकार के बाद भी किसानों को उनके गन्ने का मूल्य नहीं मिल पा रहा है। अध्यक्ष शुक्ला का आरोप है कि प्रबंधन मालिकानों के निर्देश पर गोपनीय ढंग से मिल को बंद कर रफूचक्कर होने के प्रयास में है, जिसको रोका जाना जरूरी है।
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मजदूर संगठन के पदाधिकारियों को कहना है यदि मिल बंद हो गई तो किसानों का करोड़ों रुपये डूब जायेगा और क्षेत्र के किसान गन्ने की उपज नहीं कर सकेंगे। साथ ही मिल में काम करने वाले कर्मी और सीजनल कर्मियों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जायेगा। डीएम से वार्ता के समय मजदूर संगठन के महामंत्री देशराज, कैशियर भगवान शरण आदि शामिल रहे।
रोजा चीनी मिल घाटे में है। हम मिल बंद नहीं कर रहे हैं। मिल की स्थिति के बारे में शासन-प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है। सरकार पर दबाव बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। मजदूर संगठन सिर्फ अपना हित देख रहे हैं। उनको मिल के हित में भी सोचना चाहिए।
- वीके मालपानी, प्रबंधक, रोजा चीनी मिल
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रोजा शुगर वर्क्स मजदूर संगठन के अध्यक्ष रवींद्र शुक्ला ने डीएम से बुधवार को भेंट कर बताया कि रोजा चीनी मिल का प्रबंधन और मालिकान मिल को बंद कर रहे हैं। इसके तहत एक अगस्त से मिल की मशीनों की होने वाली मरम्मत का काम बंद कर दिया गया तथा यहां काम करने वाले सैकड़ों कर्मियों को घर जाने को कह दिया गया है।
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बता दें कि रोजा चीनी मिल पर क्षेत्र के किसानों का करोड़ों रुपये बकाया है। बार-बार हाईकोर्ट से फटकार के बाद भी किसानों को उनके गन्ने का मूल्य नहीं मिल पा रहा है। अध्यक्ष शुक्ला का आरोप है कि प्रबंधन मालिकानों के निर्देश पर गोपनीय ढंग से मिल को बंद कर रफूचक्कर होने के प्रयास में है, जिसको रोका जाना जरूरी है।
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मजदूर संगठन के पदाधिकारियों को कहना है यदि मिल बंद हो गई तो किसानों का करोड़ों रुपये डूब जायेगा और क्षेत्र के किसान गन्ने की उपज नहीं कर सकेंगे। साथ ही मिल में काम करने वाले कर्मी और सीजनल कर्मियों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो जायेगा। डीएम से वार्ता के समय मजदूर संगठन के महामंत्री देशराज, कैशियर भगवान शरण आदि शामिल रहे।
रोजा चीनी मिल घाटे में है। हम मिल बंद नहीं कर रहे हैं। मिल की स्थिति के बारे में शासन-प्रशासन को अवगत कराया जा चुका है। सरकार पर दबाव बनाने के लिए ऐसा किया जा रहा है। मजदूर संगठन सिर्फ अपना हित देख रहे हैं। उनको मिल के हित में भी सोचना चाहिए।
- वीके मालपानी, प्रबंधक, रोजा चीनी मिल