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खेतों में खड़ीं सैकड़ों बीघा खरीफ फसलें निगल गई बाढ़

Sun, 05 Sep 2021 01:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 05 Sep 2021 01:21 AM IST
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river flod
शाहजहांपुर में विकास खंड मिर्जापुर के कटैला नगला गांव में गंगा की बाढ़ से खेत में डूबी शकरकंद की ? - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। अगस्त के दूसरे सप्ताह में दोबारा बाढ़ आने पर जैतीपुर के केसीनगला से लेकर परौर और अल्हागंज तक रामगंगा के किनारे के सैकड़ों बीघा खेतों में खड़ी खरीफ की फसलें बाढ़ में डूब गई। खेतों में फसलों का नुकसान साफ दिखाई दे रहा है। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ है। लेकिन कृषि विभाग के अधिकारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में धान और गन्ना की फसलों को सुरक्षित होने का दावा कर रहे हैं।
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गंगा के जलस्तर में गत दो दिन से गिरावट आने के बावजूद मिर्जापुर क्षेत्र के तटीय गांवों में बाढ़ का कहर खेतों से लेकर घरों तक जारी है। गंगा के खादर में बसे ग्राम पैलानी उत्तरी, लोहार नगला, पंखिया नगला, चौंरा, कटैला नगला, आजादनगर, मस्जिद नगला, इस्लामनगर आदि दर्जनों गांवों के खेतों में खड़ी उर्द, तिल, मक्का, ज्वार, बाजरा, शकरकंद आदि की फसलें बाढ़ में डूबकर नष्ट हो गईं, लेकिन पीड़ितों को राहत के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं। वहीं जलमग्न घरों में भरा बाढ़ का पानी अभी तक कम नहीं हुआ है। गंगा के तटीय ग्राम आजादनगर, इस्लाम नगर, कमथरी, चितार, मस्जिद नगला गांव अभी भी बाढ़ से घिरे हुए हैं।
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परौर क्षेत्र में फसलों की हुई काफी तबाही
परौर। गांव मोहनपुर, बिचपुरी, दहेलिया, ककोड़ा, नारायणनगर पश्चिमी आदि के ग्रामीणों को रामगंगा दोहरा नुकसान दे रही है। कई जगह भूमि कटान तेज हो गया है, जबकि रामगंगा के उस पार खेतों मे बोई गई फसलें उजड़ गई हैं। ग्रामीणों ने रामगंगा के उस पार तिल, उर्द, बाजरा आदि की बुआई की, लेकिन सैलाब में फसलें नष्ट हो गईं। ग्राम बिचपुरी निवासी चुन्नी लाल, अर्पित कुशवाहा, रामवीर आदि ने करीब 50 बीघा खेतों में उर्द, तिल बोई थी।
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राजीव सिंह, परशुराम, जयवीर सिंह, राजपाल सिंह, वीरपाल सिंह, अजय सिंह, सुखपाल सिंह आदि ने करीब 200 बीघा में फसलें बोई थीं, लेकिन बाढ़ उनकी फसलों के साथ जमीनें भी बहा ले गई। दहेलिया निवासी कल्लू सिंह, सत्येंद्र सिंह, वीरेंद्र शुक्ला, महेश सिंह, धरमवीर आदि के अनुसार दूसरे दौर की बाढ़ में उनकी करीब 150 बीघा फसलें तबाह हो गईं। ककोड़ा निवासी राजपाल सिंह, अनुज कुमार सिंह, रमेश सिंह, परोर निवासी सुखबीर सिंह जय सिंह यादव, मदनपाल सिंह, दिनेश सिंह, हरीराम कश्यप आदि का कहना है कि मुआवजा और राहत सहायता नहीं मिली परिवार पालना कठिन हो जाएगा। संवाद
केसीनगला में रामगंगा की भेंट चढ़ी 76 बीघा जमीन
जैतीपुर। केसीनगला गांव में गत एक माह से रामगंगा से हो रहे भूमि कटान में किसानों की 76 बीघा उपजाऊ जमीन नदी में समा चुकी है, जबकि फसली नुकसान का क्षेत्रफल करीब चार गुना अधिक होने का अनुुमान है। गांव के से सुखपाल की 25 बीघा, अग्रपाल की दस बीघा, श्यामपाल की छह बीघा, महिपाल सिंह की 16 बीघा, श्रीपाल की दस बीघा, अखिलेश की पांच बीघा और संजय की छह बीघा जमीन रामगंगा में कट चुकी है। अभी तक कटान रोकने की कारगर व्यवस्था नहीं होने से जमीन कटने का सिलसिला जारी है और इस वजह से फसली नुकसान भी बढ़ रहा है। संवाद
बांधों-बैराजों से पानी की निकासी कम, उतरी नदियां
उत्तराखंड और पश्चिमी उप्र के बांधों-बैराजों से पानी की निकासी कम होने के साथ जिले में गंगा, रामगंगा समेत सभी नदियां उतार पर आने लगी हैं। बाढ़ नियंत्रण कक्ष को प्राप्त सूचनाओं के अनुसार कलान के भैंसार बांध पर बीते 24 घंटे के दौरान गंगा का जलस्तर 20 सेमी घटकर 143.18 मीटर हो गया है। रामगंगा भी तीन सेमी सिमटकर 159.78 मीटर पर बह रही है। बताया कि नरौरा बैराज से शुक्रवार सुबह पानी की निकासी 15 हजार क्यूसेक कम होकर 53673 क्यूसेक हो रही है और अन्य बैराजों से पानी की मात्रा चार हजार क्यूसेक कम होकर 7827 क्यूसेक हो गई है। गंगा-रामगंगा के जलस्तर मेें रविवार को भी गिरावट आएगी, लेकिन इससे तटवर्ती गांवों के बाशिंदों को बाढ़ की विपदा से राहत नहीं मिल रही। संवाद
कृषि अधिकारियों की बात
विभाग को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के किसानों से अभी तक फसलेें नष्ट होने की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन भूमि कटान का आकलन राजस्व विभाग के माध्यम से करा रहा है, लेकिन अभी तक किसी भी तहसील से इस आशय की रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।

-धीरेंद्र सिंह, उप कृषि निदेशक
बाढ़ प्रभावित गांवों में गन्ना और धान आदि जो फसलें लंबाई पकड़ चुकी हैं, वह सुरक्षित रहेंगी। जमीन के अंदर होने वाली या फिर देर से बोई गई फसलें ज्यादा दिन तक पानी में डूबी रहने की दशा में खराब हो सकती हैं, लेकिन इस बारे में विभाग को अभी अधिकृत सूचना नहीं मिली है। ऋणी किसानों की फसलें बीमित होने के कारण उन्हें बीमा कंपनी पूर्व निर्धारित दरों से मुआवजा देगी।
-डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी
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