फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   rising prices

एनपीके और एनपी के रेट बढ़ने से किसानों को होगा नुकसान

Mon, 18 Oct 2021 12:51 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 18 Oct 2021 12:51 AM IST
विज्ञापन
rising prices
रामशंकर मिश्रा, सिल्हुआ खुटार - फोटो : POWAYAN
पुवायां (शाहजहांपुर)। एनपीके और एनपी के रेट बढ़ाए जाने को किसानों ने गलत बताते हुए कहा कि इससे किसानों की कमर टूट जाएगी और काफी लागत के कारण खेती घाटे का सौदा हो जाएगा। किसानों ने कहा कि डीजल के रेट पहले ही रोज बढ़ रहे हैं, इससे सिंचाई की मद में काफी खर्च हुआ है। साथ ही बीज, दवाएं, खरपतवार नाशक के रेट भी बढ़ गए हैं।
विज्ञापन

अब एनपीके और एनपी खाद के रेट बढ़ने से आलू और गेहूं की फसलों की लागत काफी बढ़ने की आशंका है। किसानों का कहना है कि धान सरकारी रेट की अपेक्षा काफी कम रेट पर 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। धान खरीद में दलालों का बोलबाला है, अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हुए हैं। किसान की परेशानी खाद के रेट बढ़ने से और ज्यादा बढ़ गई है।
विज्ञापन

गेहूं और आलू की फसल में होता है इस्तेमाल
एनपीके और एनपी के साथ ही डीएपी का इस्तेमाल गेहूं और आलू की फसल में भरपूर किया जाता है। गेहूं की बुवाई के समय ही डीएपी और एनपीके, एनपी खाद डाली जाती थी। आलू में भी बुवाई के समय एनपीके, डीएपी डाली जाती है। गेहूं और आलू की बुवाई की समय है और ऐसे मौके पर एनपीके, एनपी के रेट बढ़ने से किसान चिंता में पड़ गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

धान 12 सौ रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, कोई देखने, सुनने वाला नहीं है। चुनावी वर्ष होने के बाद भी किसानों की प्रति उदासीनता से स्पष्ट है कि सरकार को किसानों की समस्याओं से लेना देना नहीं है। - सुखबीर सिंह, गांव फगुनिहाई बंडा
एनपीके और एपी की एक महीने में ज्यादा जरूरत है, ऐसे में दरों में बढ़ोतरी से फसल की लागत में इजाफा होगा और फसल घाटे का सौदा हो सकती है। समझ नहीं आता कि सरकार की मंशा क्या है। - प्रतिपाल सिंह, गांव रसूलपुर देवकली बंडा
जितने रेट बढ़े हैं, सरकार को उसके सापेक्ष सब्सिडी देनी चाहिए। एमएसपी सख्ती से लागू की जाए, जिससे कोई भी धान, गेहूं, गन्ना कम रेट पर न खरीद सके। किसानों की उपेक्षा सही नहीं है। - वीरपाल सिंह, भांभी पुवायां
इफको का एनपीके और एनपी का रेट बढ़ाना गलत है। कहा जा रहा है कि पुराना स्टाक पुराने रेट पर मिलेगा, लेकिन पुराना स्टॉक नया बताकर बेचा जाएगा और किसान शिकायत करेगा तो कोई सुनवाई नहीं होगी। - मनवीर सिंह, अखत्यारपुर धौकल बंडा
धान में लागत नहीं लौट रही है और अब एनपीके के रेट बढ़ने से गेहूं में भी लागत बढ़ जाएगी और फसल तैयार होने के समय सेंटर दलालों के कब्जे में चले जाएंगे। किसान दलालों के चंगुल में फंसा हुआ है। - कस्तूरी शर्मा, रूरा खुटार
किसान हित में सरकार को डीजल और खाद के रेट तत्काल घटाने चाहिए। किसान बेहद परेशान है और दलाल मौज में हैं। सरकार किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है। गन्ने का भुगतान भी नहीं हो रहा है। - रामशंकर मिश्रा, सिल्हुआ खुटार

डीजल के बढ़ते दाम और ऊपर से खाद के दामों में बढ़ोतरी से किसान परेशान है। किसान अपना धान खुले बाजार में 1200 रुपये क्विंटल पर बेचने को मजबूर है। -अनिल कुमार वर्मा, प्रधान, गांव रुद्रपुर, तिलहर

वीरपाल सिंह, गांव भांभी पुवायां

वीरपाल सिंह, गांव भांभी पुवायां- फोटो : POWAYAN

मनवीर सिंह, अखत्यारपुर धौकल बंडा

मनवीर सिंह, अखत्यारपुर धौकल बंडा- फोटो : POWAYAN

कस्तूरी शर्मा, रूरा खुटार

कस्तूरी शर्मा, रूरा खुटार- फोटो : POWAYAN

सुखबीर सिंह, गांव फगुनिहाई बंडा

सुखबीर सिंह, गांव फगुनिहाई बंडा- फोटो : POWAYAN

प्रतिपाल सिंह, रसूलपुर देवकली बंडा

प्रतिपाल सिंह, रसूलपुर देवकली बंडा- फोटो : POWAYAN

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed