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Shahjahanpur News: पराली जलाने वाले किसान का ट्रैक्टर राजस्व टीम ने पकड़ा
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गांव पकड़िया हकीम में जलाई गई पराली। संवाद
पुवायां। रविवार को पराली जलाने के बाद खेत जोत रहा किसान बीडीओ और राजस्व टीम को देखकर भाग निकला। मौके से मिले ट्रैक्टर को थाने में खड़ा करा लिया गया। कुछ ही देर में एक नेता की सिफारिश पर पुलिस को ट्रैक्टर बिना कार्रवाई के ही छोड़ दिया।
जिलाधिकारी ने फसल अपशिष्ट (पराली) जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। बीडीओ, लेखपाल, पुलिस की टीमें गांवों में जाकर लोगों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बता रहीं हैं। बावजूद इसके किसान पराली जला रहे हैं। शनिवार को गुटैया, बेहटा संवात, शहजादपुर, नत्थापुर, सुनारा बुजुर्ग में एसडीएम संजय पांडेय, नायब तहसीलदार अमित कुमार और लेखपालों ने किसानों को पराली जलाने से रोका था।
रविवार को गांव पकड़िया हकीम में पराली जलाने के बाद किसान खेत जोत रहा था। सूचना पर जिला कृषि रक्षा अधिकारी संजय यादव और राजस्व टीम मौके पर पहुंची तो किसान ट्रैक्टर छोड़कर भाग निकला। बीडीओ ने बताया कि जागरूक करने के बाद भी किसान ने पराली जलाई थी। ट्रैक्टर पकड़ा गया है। ट्रैक्टर थाने आने के कुछ ही देर बाद एक नेता ने फोन कर पुलिस को तत्काल ट्रैक्टर छोड़ने को कहा। इसके बाद पुलिस ने ट्रैक्टर बिना कार्रवाई केे ही छोड़ दिया। इंस्पेक्टर क्राइम राकेश सिंह यादव ने बताया कि किसान को चेतावनी देकर ट्रैक्टर छोड़ दिया गया है।
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पराली जाने से खेत हो जाएगा ऊसर
- अगले दस साल में दिखेगा यह असर, खाद डालकर भी नहीं उगा सकेंगे फसल
संवाद न्यूज एजेंसी
पुवायां। जिला कृषि रक्षा अधिकारी संजय यादव भी किसानों में पराली जलाने की प्रवृत्ति को लेकर काफी चिंतित हैं, उनका मानना है कि किसान जब तक पराली जलाने से खेती को हो रहे नुकसान को समझेगा, तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी के अनुसार- किसान अब तक पराली जलाते आए हैं और उनको लगता है कि इससे जमीन को नुकसान नहीं है, लेकिन किसान गहराई से विचार करें तो उनकी समझ में आ जाएगा कि अब तक पराली जलाने से वह क्या खो चुके हैं। पहले कम खाद में फसल तैयार हो जाती थी, लेकिन पराली जलाने से जमीन की उर्वरा शक्ति घट गई और किसान पराली जलाने से हुए नुकसान की भरपाई खाद को ज्यादा डालकर कर रहा है। अगर पराली जलाई जाती रही तो दस वर्ष बाद खाद से भी फसल होना बंद हो जाएगी, तब किसान को पता चलेगा कि पराली जलाने से कितना नुकसान हुआ है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि अभी समय है, खेत में कोई भी फसल अपशिष्ट न जलाएं। तभी खेत की उर्वरा शक्ति का क्षरण होने से बचेगा। ऐसा न करने पर ऊसर हो चुकी खेती फसल पैदा करना बंद कर देगी। उन्होंने बताया कि जागरूकता कार्यक्रमों से कई किसान इस बात को समझ भी चुके हैं और पराली को खेत में पलटकर सड़ा रहे हैं। कुछ किसान अब भी कुतर्क देकर पराली जलाने का प्रयास करते हैं। ऐसे किसानों पर कार्रवाई हो रही है।
इस कारण जलाते हैं पराली
पराली जलाने के पीछे कारण है कि धान की कटाई होते ही किसान आलू की बुवाई की तैयारी में जुट जाते हैं। पराली जलाने से खेत साफ हो जाता है और आलू की बुवाई जल्दी हो जाती है, लेकिन इसके पीछे छिपा नुकसान किसान नहीं देख पा रहे हैं। आलू की वर्तमान फसल के बाद आलू की दूसरी फसल लेने की जल्दबाजी में किसान पराली जलाकर खेत को ऊसर बना रहे हैं।
पराली जलाने पर लगाएं कड़ाई से रोक
पुवायां तहसील के समस्त थाना प्रभारी, बीडीओ और तहसीलदार को पराली जलाने पर कड़ाई से रोक लगाने को कहा गया है। पराली जलाने के बाद जुताई कर रहे एक ट्रैक्टर सहित पकड़ा गया है।जुर्माने की कार्रवाई कराई जा रही है। सेटेलाइट से पुवायां तहसील क्षेत्र में पराली जलाने को कोई घटना सामने नहीं आई है। - संजय पांडे, एसडीएम पुवायां
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जिलाधिकारी ने फसल अपशिष्ट (पराली) जलाने पर पूरी तरह से रोक लगा रखी है। बीडीओ, लेखपाल, पुलिस की टीमें गांवों में जाकर लोगों को पराली जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में बता रहीं हैं। बावजूद इसके किसान पराली जला रहे हैं। शनिवार को गुटैया, बेहटा संवात, शहजादपुर, नत्थापुर, सुनारा बुजुर्ग में एसडीएम संजय पांडेय, नायब तहसीलदार अमित कुमार और लेखपालों ने किसानों को पराली जलाने से रोका था।
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रविवार को गांव पकड़िया हकीम में पराली जलाने के बाद किसान खेत जोत रहा था। सूचना पर जिला कृषि रक्षा अधिकारी संजय यादव और राजस्व टीम मौके पर पहुंची तो किसान ट्रैक्टर छोड़कर भाग निकला। बीडीओ ने बताया कि जागरूक करने के बाद भी किसान ने पराली जलाई थी। ट्रैक्टर पकड़ा गया है। ट्रैक्टर थाने आने के कुछ ही देर बाद एक नेता ने फोन कर पुलिस को तत्काल ट्रैक्टर छोड़ने को कहा। इसके बाद पुलिस ने ट्रैक्टर बिना कार्रवाई केे ही छोड़ दिया। इंस्पेक्टर क्राइम राकेश सिंह यादव ने बताया कि किसान को चेतावनी देकर ट्रैक्टर छोड़ दिया गया है।
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पराली जाने से खेत हो जाएगा ऊसर
- अगले दस साल में दिखेगा यह असर, खाद डालकर भी नहीं उगा सकेंगे फसल
संवाद न्यूज एजेंसी
पुवायां। जिला कृषि रक्षा अधिकारी संजय यादव भी किसानों में पराली जलाने की प्रवृत्ति को लेकर काफी चिंतित हैं, उनका मानना है कि किसान जब तक पराली जलाने से खेती को हो रहे नुकसान को समझेगा, तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी के अनुसार- किसान अब तक पराली जलाते आए हैं और उनको लगता है कि इससे जमीन को नुकसान नहीं है, लेकिन किसान गहराई से विचार करें तो उनकी समझ में आ जाएगा कि अब तक पराली जलाने से वह क्या खो चुके हैं। पहले कम खाद में फसल तैयार हो जाती थी, लेकिन पराली जलाने से जमीन की उर्वरा शक्ति घट गई और किसान पराली जलाने से हुए नुकसान की भरपाई खाद को ज्यादा डालकर कर रहा है। अगर पराली जलाई जाती रही तो दस वर्ष बाद खाद से भी फसल होना बंद हो जाएगी, तब किसान को पता चलेगा कि पराली जलाने से कितना नुकसान हुआ है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि अभी समय है, खेत में कोई भी फसल अपशिष्ट न जलाएं। तभी खेत की उर्वरा शक्ति का क्षरण होने से बचेगा। ऐसा न करने पर ऊसर हो चुकी खेती फसल पैदा करना बंद कर देगी। उन्होंने बताया कि जागरूकता कार्यक्रमों से कई किसान इस बात को समझ भी चुके हैं और पराली को खेत में पलटकर सड़ा रहे हैं। कुछ किसान अब भी कुतर्क देकर पराली जलाने का प्रयास करते हैं। ऐसे किसानों पर कार्रवाई हो रही है।
इस कारण जलाते हैं पराली
पराली जलाने के पीछे कारण है कि धान की कटाई होते ही किसान आलू की बुवाई की तैयारी में जुट जाते हैं। पराली जलाने से खेत साफ हो जाता है और आलू की बुवाई जल्दी हो जाती है, लेकिन इसके पीछे छिपा नुकसान किसान नहीं देख पा रहे हैं। आलू की वर्तमान फसल के बाद आलू की दूसरी फसल लेने की जल्दबाजी में किसान पराली जलाकर खेत को ऊसर बना रहे हैं।
पराली जलाने पर लगाएं कड़ाई से रोक
पुवायां तहसील के समस्त थाना प्रभारी, बीडीओ और तहसीलदार को पराली जलाने पर कड़ाई से रोक लगाने को कहा गया है। पराली जलाने के बाद जुताई कर रहे एक ट्रैक्टर सहित पकड़ा गया है।जुर्माने की कार्रवाई कराई जा रही है। सेटेलाइट से पुवायां तहसील क्षेत्र में पराली जलाने को कोई घटना सामने नहीं आई है। - संजय पांडे, एसडीएम पुवायां

गांव पकड़िया हकीम में जलाई गई पराली। संवाद

गांव पकड़िया हकीम में जलाई गई पराली। संवाद