शाहजहांपुर: साइबर ठगों ने सेवानिवृत्त जीएम को किया 'डिजिटल अरेस्ट', गिरफ्तारी का भय दिखाकर 22 लाख रुपये ठगे
शाहजहांपुर में साइबर ठगों ने सेवानिवृत्त जीएम से 22 लाख रुपये की ठगी कर ली। पीड़ित के मुताबिक ठगों ने उन्हें गिरफ्तारी वारंट का डर दिखाया और बैंक खातों की जानकारी ले ली। इसके बाद रकम अपने खातों में ट्रांसफर कर ली। साइबर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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शाहजहांपुर में साइबर ठगों ने सीतापुर की बिसवां चीनी मिल के सेवानिवृत्त जीएम सुरेंद्र कुमार सक्सेना (70 वर्ष) को डिजिटल अरेस्ट कर आतंकवादी गतिविधियों से जोड़ने और गिरफ्तारी वारंट का भय दिखाकर 22 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने तत्परता बरतते हुए 10 लाख से ज्यादा की धनराशि होल्ड करा दी है।
सदर बाजार क्षेत्र के ताजूखेल निवासी सुरेंद्र कुमार सक्सेना के अनुसार 17 सितंबर को दोपहर करीब दो बजे उनके मोबाइल नंबर पर व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल करने वाले ने कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल एक आतंकवादी ने केनरा बैंक में खाता खोलने के लिए किया है। उस खाते में आतंकवादी ने 25 लाख रुपये भेजे हैं। पीड़ित ने आधार कार्ड किसी को देने से इनकार किया तो कॉल करने वाले ने कहा कि उनके नाम से गिरफ्तारी वारंट है और उसने वारंट होल्ड कर रखा है।
इसके बाद ठगों ने उनके बैंक खातों की जांच कराने की बात कही और खाते के फोटो लेने को कहा। पीड़ित के मुताबिक 19 सितंबर को उनके एसबीआई के चौक स्थित खाते से 12 लाख रुपये निकाल लिए गए। इसके बाद 21 सितंबर को एसबीआई के दूसरे खाते से 6.50 लाख और आईसीआईसीआई बैंक के खाते से 3.50 लाख रुपये निकाल लिए गए। इस तरह कुल 22 लाख रुपये ठग लिए गए। इसके बाद भी 14 लाख रुपये की मांग की जा रही थी।
पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में तहरीर देकर रकम होल्ड कराने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। मामले की जांच इंस्पेक्टर रजनीश कुमार को सौंपी गई है। पुलिस ने ठगी में प्रयुक्त और संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी जुटाकर संबंधित बैंकों व वित्तीय संस्थानों से समन्वय किया।
कार्रवाई के दौरान दो बैंक खातों में कुल 10.88 लाख रुपये होल्ड करा दिए गए। एसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि शेष धनराशि की रिकवरी और अन्य संदिग्ध खातों के संबंध में वैधानिक कार्रवाई जारी है। जिस नंबर से कॉल आई थी, उसकी भी जांच की जा रही है।
लगातार दहशत में रखा
सुरेंद्र सक्सेना ने पुलिस को बताया कि कॉल करने वाले लोगों ने खुद को अधिकारी बताकर लगातार फोन पर संपर्क में रखते हुए डराया। डिजिटल हाउस अरेस्ट जैसा माहौल बनाया गया। आरोपियों ने बैंक खातों की जानकारी हासिल करने के बाद अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करा ली।
ठगों के झांसे में न आएं
एसपी सौरभ दीक्षित ने अपील की है कि पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी अधिकारी के नाम पर फोन या वीडियो कॉल कर डराने वालों के झांसे में न आएं। कोई भी अधिकारी डिजिटल हाउस अरेस्ट के नाम पर बैंक खाते, ओटीपी, व्यक्तिगत जानकारी या धनराशि नहीं मांगता। साइबर ठगी होने पर बिना देरी किए 1930 पर कॉल करें या नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं।