फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Report on CDPO made without suspension

निलंबित किए बगैर ही करा दी गई सीडीपीओ पर रिपोर्ट

Mon, 24 Jul 2017 08:17 PM IST
तिलहर। 
तिलहर।  Updated Mon, 24 Jul 2017 08:17 PM IST
विज्ञापन
Report on CDPO made without suspension
निलंबित किए बगैर ही करा दी गई सीडीपीओ पर रिपोर्ट - फोटो : निलंबित किए बगैर ही करा दी गई सीडीपीओ पर रिपोर्ट
सात साल से फर्जी आंगनबाड़ी केंद्र संचालित करने के मामले में मौजूदा सीडीपीओ को निलंबित किए बिना ही उनके खिलाफ धोखाधड़ी और गबन की रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। इसमें आंगनबाड़ी वर्कर को भी नामजद किया गया है। यहां सवाल यह उठता है कि सात साल पहले जिस सीडीपीओ ने इस केंद्र को संचालित करने की अनुमति दी थी आखिर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई। 
विज्ञापन

मालूम हो कि छह अप्रैल को गांव बिलहरा निवासी अधिवक्ता अभिषेक शर्मा ने तहसील दिवस में सीडीपीओ तिलहर पर पांच सालों से कछिला उर्फ खजुरिया गांव में फर्जी ढंग से आंगनबाड़ी केंद्र संचालित कर पुष्टाहार हड़पने का आरोप लगाते हुए शिकायत की थी। शिकायत में कहा गया था कि 2010 में केंद्र के संचालन के लिए नियुक्ति की निविदा भी निकाली गई थी। डीएम नरेंद्र सिंह के निर्देश पर मामले की जांच में आरोपों की पुष्टि हुई थी। 
विज्ञापन

इसके बाद डीएम के निर्देश पर जिला कार्यक्रम अधिकारी धर्मेंद्र मिश्रा ने वर्तमान मुख्य सेविका, प्रभारी बाल विकास परियोजना अधिकारी तिलहर कुसुम सरन और शेरपुर उर्फ  शेरगढ़ आंगनबाड़ी केंद्र की वर्कर प्रीति आर्या के विरुद्ध धोखाधड़ी और गबन आदि की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करा दी। यहां बता दें कि 13 मई, 2010 के एक शासनादेश के हवाले से तत्कालीन सीडीपीओ शशि किरण ने आठ जुलाई, 2010 को ब्लॉक क्षेत्र में 15 मिनी केंद्रों के लिए आंगनबाड़ी वर्कर की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें ग्राम पंचायत शेरपुर उर्फ  शेरगढ़ के आगे कोष्ठक में खजुरिया और कछिहा मिनी केंद्र का उल्लेख किया गया था। इससे यह स्पष्ट है कि इस विज्ञापन में ही फर्जी नाम से केंद्र दर्शाया गया था। अब प्रश्न यह उठता है कि तत्कालीन सीडीपीओ शशि किरन को इस मामले में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

इससे भी ज्यादा हैरानी की बात तो यह है कि जांच में केंद्र के फर्जी साबित होने और मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने के बावजूद केंद्र को बंद नहीं किया गया है। इस केंद्र के लिए पुष्टाहार का बाकायदा आवंटन किया जा रहा है। मजेदार बात तो यह है कि विभागीय कार्रवाई में आरोपियों को निलंबित तक नहीं किया गया है। उधर, कोतवाल मनोज कुमार का कहना है की नियमानुसार पहले आरोपियों के विरुद्ध निलंबन ीक कार्रवाई होनी चाहिए थी। इसके बाद एफ आईआर करानी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed