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राम की भक्ति को पाने के लिए उनके नाम का स्मरण ही सबसे सरल माध्यम : विजय कौशल
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शाहजहांपुर के मुमुक्षु आश्रम में दूसरे दिन की श्रीराम कथा सुनाते संत विजय कौशल महाराज । संवाद
- फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। मुमुक्षु महोत्सव का शनिवार को दूसरा दिन रहा। स्वामी सर्वेश्वारानंद के पूजन के बाद श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। व्यास विजय कौशल महाराज ने कहा कि राम की भक्ति पाने के लिए उनके नाम के स्मरण ही सबसे सरल और सुगम माध्यम है। उन्होंने समुद्र लांघने को लेकर प्रभु श्रीराम द्वारा प्रश्न करने और हनुमानजी के उत्तर देने का प्रसंग सुनाया।
व्यास ने कहा कि एक बार भगवान श्रीराम ने हनुमान से पूछा कि यह बताओ तुम समुद्र को कैसे पार कर गए। हनुमान ने उत्तर दिया कि हे प्रभु आपकी मुद्रिका की कृपा से हम समुद्र पार कर गए। श्रीराम ने पुन: प्रश्न किया, उधर से लौटते समय समुद्र कैसे पार कर पाए? तब हनुमान बोले-हे प्रभु मैं मां जानकी की चूड़ामणि की कृपा से समुद्र के इस पार आ गया। यह सुनकर प्रभु श्रीराम मन ही मन मुस्कराने लगे।
कथा व्यास ने कहा कि राम की कृपा को पाने के लिए सबसे पहले हमें हनुमान जी को स्मरण करना चाहिए। हनुमानजी, प्रभु श्रीराम के दूत हैं। दूसरे दिन की कथा का समापन आरती के साथ हुआ। मुख्य यजमान रामचंद्र सिंघल ने आरती उतारी। इस दौरान मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता चिन्मयानंद सरस्वती, उद्यमी अशोक अग्रवाल, कॉलेज सचिव डॉ. अवनीश कुमार मिश्रा, प्राचार्य डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. हरिश्चंद्र श्रीवास्तव, डॉ. आलोक मिश्रा, डॉ. मधुकर श्याम शुक्ल, डॉ. प्रभात शुक्ला, डॉ. आदित्य कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रीय संगोष्ठी व गजल संध्या का हुआ आयोजन
मुमुक्षु महोत्सव के तहत एसएस कॉलेज में वाणिज्य संकाय की ओर से राष्ट्रीय संगोठी हुई। इसका विषय ‘वर्तमान केंद्रीय बजट में आर्थिक विकास की संभावनाएं व अवसर’ रहा। मुख्य अतिथि एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के प्रोफेसर डॉ. पीबी सिंह ने कहा कि आर्थिक विकास एक सतत प्रक्रिया है। बजट यह दर्शाता है कि हम सब कोरोना संकट का सामना करके किस प्रकार मजबूती से आगे बढ़े हैं।
भारतीय उद्योग संघ के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि यह बजट देश को आत्मनिर्भर बनाने का बजट है। इसके बाद गजल संध्या का आयोजन हुआ। डॉ. प्रतिभा सक्सेना के निर्देशन में स्थानीय कलाकारों सुखवंत सिंह, अंजने मिश्रा, आदित्य, अविजिता, ईशान दीप शुक्ला, अजय सक्सेना आदि ने अपनी प्रस्तुति दी। डॉ. कविता भटनागर, डॉ. देवेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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व्यास ने कहा कि एक बार भगवान श्रीराम ने हनुमान से पूछा कि यह बताओ तुम समुद्र को कैसे पार कर गए। हनुमान ने उत्तर दिया कि हे प्रभु आपकी मुद्रिका की कृपा से हम समुद्र पार कर गए। श्रीराम ने पुन: प्रश्न किया, उधर से लौटते समय समुद्र कैसे पार कर पाए? तब हनुमान बोले-हे प्रभु मैं मां जानकी की चूड़ामणि की कृपा से समुद्र के इस पार आ गया। यह सुनकर प्रभु श्रीराम मन ही मन मुस्कराने लगे।
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कथा व्यास ने कहा कि राम की कृपा को पाने के लिए सबसे पहले हमें हनुमान जी को स्मरण करना चाहिए। हनुमानजी, प्रभु श्रीराम के दूत हैं। दूसरे दिन की कथा का समापन आरती के साथ हुआ। मुख्य यजमान रामचंद्र सिंघल ने आरती उतारी। इस दौरान मुमुक्षु आश्रम के अधिष्ठाता चिन्मयानंद सरस्वती, उद्यमी अशोक अग्रवाल, कॉलेज सचिव डॉ. अवनीश कुमार मिश्रा, प्राचार्य डॉ. अनुराग अग्रवाल, डॉ. हरिश्चंद्र श्रीवास्तव, डॉ. आलोक मिश्रा, डॉ. मधुकर श्याम शुक्ल, डॉ. प्रभात शुक्ला, डॉ. आदित्य कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
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राष्ट्रीय संगोष्ठी व गजल संध्या का हुआ आयोजन
मुमुक्षु महोत्सव के तहत एसएस कॉलेज में वाणिज्य संकाय की ओर से राष्ट्रीय संगोठी हुई। इसका विषय ‘वर्तमान केंद्रीय बजट में आर्थिक विकास की संभावनाएं व अवसर’ रहा। मुख्य अतिथि एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के प्रोफेसर डॉ. पीबी सिंह ने कहा कि आर्थिक विकास एक सतत प्रक्रिया है। बजट यह दर्शाता है कि हम सब कोरोना संकट का सामना करके किस प्रकार मजबूती से आगे बढ़े हैं।
भारतीय उद्योग संघ के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने कहा कि यह बजट देश को आत्मनिर्भर बनाने का बजट है। इसके बाद गजल संध्या का आयोजन हुआ। डॉ. प्रतिभा सक्सेना के निर्देशन में स्थानीय कलाकारों सुखवंत सिंह, अंजने मिश्रा, आदित्य, अविजिता, ईशान दीप शुक्ला, अजय सक्सेना आदि ने अपनी प्रस्तुति दी। डॉ. कविता भटनागर, डॉ. देवेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।