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संतों ने कराया भगवान राम के आदर्शों का आत्मसात
जलालाबाद (शाहजहांपुर)
Updated Tue, 10 Feb 2015 12:13 AM IST
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रामलीला मैदान पर चल रहे संत सम्मेलन के दूसरे दिन संतों ने श्रद्धालुओं को भगवान राम के आदर्शों को आत्मसात कर धर्माचारित आचरण करने की प्रेरणा दी। बताया कि समाज में एक दूसरे के प्रति सद्व्यवहार तथा प्रेम बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।
हरिद्वार के संत स्वामी नारायणानंद ने कहा कि यहां के लोग बहुत भाग्यशाली हैं क्योंकि वह भगवान परशुराम की इस जन्मस्थली में निवास करते हैं। बोले, जहां कोई तीर्थस्थान होता है वहां ईश्वर की कृपा बनी रहती है। मध्यप्रदेश से आए स्वामी सत्य स्वरूपानंद ने कहा कि भक्त के प्रेम में वशीभूत भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाने से भी परहेज नहीं किया। अयोध्या से आए संत प्रीतमदास ने कहा कि मानव की उत्पत्ति पूर्व जीवन के कर्मों के आधार पर होती है। सुसंग, कुसंग के प्रभाव से सुख दुख का निर्धारण मानव जीवन में होता है। वृंदावन के संत स्वामी गीतानंद ने कहा कि अनन्त इच्छाएं मानव के दुखों का कारण बनती हैं। ईश्वर परिश्रम पर विश्वास करने वालों पर कृपा करता है। बोले न कोई किसी को सुख और न कोई किसी को दुख सभी अपने कर्मानुसार ही फल पाते हैं। सम्मेलन में संत सत्यानंद, शुकदेवानन्द ने भी प्रवचन देकर मौजूद भक्तों का मार्गदर्शन किया।
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हरिद्वार के संत स्वामी नारायणानंद ने कहा कि यहां के लोग बहुत भाग्यशाली हैं क्योंकि वह भगवान परशुराम की इस जन्मस्थली में निवास करते हैं। बोले, जहां कोई तीर्थस्थान होता है वहां ईश्वर की कृपा बनी रहती है। मध्यप्रदेश से आए स्वामी सत्य स्वरूपानंद ने कहा कि भक्त के प्रेम में वशीभूत भगवान राम ने शबरी के जूठे बेर खाने से भी परहेज नहीं किया। अयोध्या से आए संत प्रीतमदास ने कहा कि मानव की उत्पत्ति पूर्व जीवन के कर्मों के आधार पर होती है। सुसंग, कुसंग के प्रभाव से सुख दुख का निर्धारण मानव जीवन में होता है। वृंदावन के संत स्वामी गीतानंद ने कहा कि अनन्त इच्छाएं मानव के दुखों का कारण बनती हैं। ईश्वर परिश्रम पर विश्वास करने वालों पर कृपा करता है। बोले न कोई किसी को सुख और न कोई किसी को दुख सभी अपने कर्मानुसार ही फल पाते हैं। सम्मेलन में संत सत्यानंद, शुकदेवानन्द ने भी प्रवचन देकर मौजूद भक्तों का मार्गदर्शन किया।
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