फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shahjahanpur News ›   Reached the border on foot, now waiting to return

पैदल चलकर बार्डर तक पहुंचीं, अब घर वापसी का लंबा इंतजार

Mon, 28 Feb 2022 02:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 28 Feb 2022 02:09 AM IST
विज्ञापन
Reached the border on foot, now waiting to return
अंशिका यादव - फोटो : SHAHJAHANPUR
शाहजहांपुर। समझौता वार्ता की खबरों के बीच यूक्रेन में फंसे छात्र-छात्राओं की कहानी किसी को भी परेशान करने वाली है। कीव और खारकीव में फंसे विद्यार्थी युद्ध पर विराम की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। दूसरी तरफ विनिस्तिया से यूक्रेन बॉर्डर और रोमानिया में भारतीय दूतावास के टेंट तक पहुंचे छात्र-छात्राओं की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। बॉर्डर पर उन्हें फ्लाइट में अपनी बारी आने का लंबा इंतजार करना पड़ रहा। इधर, बच्चों की चिंता में अभिभावकों की नींद उड़ी है। वह ईश्वर से उनकी सकुशल वापसी की प्रार्थना कर रहे हैं।
विज्ञापन

बेटी बोली - पापा, पता नहीं कब गले लगने का मिलेगा मौका
पापा, बस ने काफी दूर उतार दिया था। माइनस डिग्री तापमान में चार किमी तक पैदल चलकर युद्धग्रस्त देश यूक्रेन के बॉर्डर को पार कर भारतीय दूतावास के टेंट में आ गए हैं। सुबह से शाम होने को आई, पर कोई पूछने वाला नहीं है। बिस्किट खाकर और पानी पीकर समय बिता रहे हैं। हजारों बच्चे टेंट में हैं। हर दिन एक फ्लाइट 250 बच्चों को लेकर यहां से जाती है। यही हालत रही तो पता नहीं कब आपसे और मम्मी से गले लगने का मौका मिलेगा। यह मुश्किल भरे सफर की दास्तान अंशिका ने अपने पिता डॉ. अमीर सिंह यादव को सुनाईं तो उनकी आंखें भर आईं।
विज्ञापन

स्वामी धर्मानंद कालेज के प्रधानाचार्य डॉ. अमीर सिंह यादव की बेटी अंशिका यूक्रेन के विनिस्तिया में एमबीबीएस करने गई थी। तनावपूर्ण स्थिति होने पर 26 फरवरी को उसकी वापसी का टिकट बुक कराया था। लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद अंशिका फंस गईं। शनिवार रात अंशिका को भारतीय दूतावास द्वारा बस के जरिये निकाला गया। सुबह छह बजे यूक्रेन के बॉर्डर से पहले चिरनीवेस्टी तक से अंशिका समेत कई छात्र-छात्राओं को लाया गया। बस से उतरने के बाद बॉर्डर को पार करने के लिए चार किलोमीटर तक भीषण सर्दी में सभी को सफर करना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन

युद्ध के चलते लड़ाकू विमानों की आवाज के चलते नहीं सो पाने वाली बच्चों से चलना मुश्किल हो रहा था। सुबह नौ बजे रोमानिया बॉर्डर पार कर टेंट में बैठा दिया गया। उसके बाद अंशिका ने अपने पिता को फोन कर पूरी जानकारी दी तो पूरे परिवार ने युद्धग्रस्त क्षेत्र से बाहर आने पर राहत की सांस ली। लेकिन मुश्किलें खत्म नहीं होने वालीं। सुबह से शाम तक अंशिका टेंट में बैठी रही। डॉ. अमीर सिंह ने बताया कि इंटरनेट नहीं चल रहा। मोबाइल के नेटवर्क भी गायब है। बेटी से बात तक नहीं हो पा रही है। कभी-कभी वाई-फाई कनेक्ट होने पर जरूर मोबाइल पर मेसेज आ जाता है।
बॉर्डर तक पार नहीं कराया, बिस्किट खाकर कितने दिन रह लेंगे
यूक्रेन की विनिस्तियां यूनिवर्सिटी की एमबीबीएस की छात्र इंतेसाम उर्फ जिया, सदफ खान और एंजिला रविवार सुबह से शाम तक इंतजार करने के बाद भी बॉर्डर पार नहीं कर पाईं। बिस्किट खाकर व पानी पीकर समय गुजार रहीं हैं। छात्राएं बोलीं-पापा खाने के लिए बिस्किट हैं। कितने दिन तक बिस्किट खाकर रह लेंगे। बच्चियों की यह बात सुनकर उनके मम्मी और पापा की आंखों में आंसू आ गए, बेटियों को हौसला देने के लिए खुद को संभाला। विनिस्तिया यूनिवर्सिटी से शाम में बस में सवार होकर खलीलगर्वी निवासी डॉ. मजीद की बेटी इंतेसाम उर्फ जिया, रंगीन चौपाल निवासी सलीमुद्दीन की बेटी सदफ और मोहम्मद जई के रहबर की बेटी एंजिला रोमानिया बॉर्डर की ओर रवाना हुईं।
हालात पर थोड़ा नियंत्रण होने के चलते लोग रोमानिया के रास्ते वापसी चाह रहे हैं। ऐसे में तमाम गाड़ियां होने के चलते सड़कें जाम हो गईं। डॉ. मजीद ने बताया कि बेटी का सुबह फोन आया था। उसने बताया कि जाम के चलते बस से उतरकर आठ से नौ किमी तक पैदल चलना पड़ा। भीषण सर्दी से हाथ-पैर तक सुन्न पड़ गए। यूक्रेन का बॉर्डर बंद होने के चलते तमाम छात्र-छात्राएं रुके हुए हैं। सुबह से शाम होने के बावजूद अभी तक बॉर्डर नहीं खुला हैं। डॉ.मजीद ने बताया कि बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। बॉर्डर पार टेंट में बैठे बच्चों को जरूर पैकेट में खाना मिल गया। यूक्रेन बॉर्डर वालों को कोई पूछने वाला नहीं है। बच्चे बिस्किट खाकर काम चला रहे हैं। मोबाइल में नेटवर्क नहीं आने के चलते बच्चों से बात तक नहीं हो पा रही है।
दूतावास ने खड़े किए हाथ, कहा-अपने जिम्मेदारी पर बाहर निकलें
-रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद भी हालात नहीं सुधर रहे हैं। कीव में फंसे जिया सकलैन अंसारी ने बताया कि मिसाइलें और बम धमाकों की आवाज आ रही है। सायरन बजते ही बंकर की ओर भाग जाते हैं। अब तो दूतावास ने भी हाथ खड़े कर दिए। कहा-अपनी जिम्मेदारी पर बाहर निकलें। मोहल्ला हदद्दफ निवासी पशुपालन विभाग के वरिष्ठ लिपिक जियाउद्दीन अंसारी के बेटे जिया सकलैन अंसारी ने मैसेज के जरिए अपना हाल-चाल बताया। जिया ने बताया कि सायरन बजने पर सुरक्षा की दृष्टि से बंकर में चले जाते हैं। बाहर लड़ाई चल रही है, पर हम सुरक्षित हैं। दूतावास ने गाइड लाइन जारी कर हाथ खड़े कर दिए कि हमारा अभी फंसे छात्रों को निकालने का कोई प्लान नहीं है। हालात सही होने पर ट्रेन से बाहर निकल सकते हैं। उन्होंने बताया कि दूसरी गाइड लाइन में ट्रेन से जाने पर भी मना कर दिया।
देखते ही गोली मारने के आदेश ने चिंता बढ़ाई
अभी तक हिम्मत दिखाकर पूरे परिवार को सांत्वना दे रहे संजय वर्मा की आवाज भी रविवार शाम को भर्रा गई। दीपांशु और अभिषेक के पिता संजय वर्मा ने बताया कि बच्चों से बात हुई। वहां के हालात काफी ज्यादा खराब हैं। बम धमाकों की आवाजें लगातार आ रही हैं। मिसाइलें दागी जा रही है। पांच बजे के बाद देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए हैं। भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं कि सब कुछ ठीक हो जाएं और बेटों की वापसी हो सके।
प्रधानमंत्री जी...फ्लाइट बढ़ाएं, हमारे बच्चों को सकुशल वापसी कराएं
-यूक्रेन के बॉर्डर और रोमानिया में भारतीय दूतावास के टेंट में फंसे छात्र-छात्राओं की वापसी के लिए अभिभावकों ने प्रधानमंत्री से गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि फ्लाइट की संख्या बढ़ाकर बच्चों को सकुशल वापस कराया जाए। इंतेसाम उर्फ जिया के पिता डॉ. मजीद खान ने बताया कि बेटी की बातें सुनकर मन काफी व्यथित है। बिस्किट खाकर बेटी काम चला रही। उससे बात तक नहीं हो पा रही है। भारत सरकार सिर्फ एक फ्लाइट भेज रही है। जबकि वहां पर बच्चों की संख्या ज्यादा है। फ्लाइट को बढ़ाकर बच्चों को वापस लाने के लिए कदम उठाया जाए।
वहीं अंशिका यादव के पिता डॉ. अमीर सिंह यादव ने बताया कि यूक्रेन से बेटी के निकलने से राहत की सांस ली थी, लेकिन चिंता खत्म नहीं हो रहीं हैं। जहां से उसे वापस आना है। वहां पर करीब हजार लोग होंगे। ऐसे में पता नहीं कब बेटी का नंबर आ पाएगा। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की है कि बच्चों के हित में ठोस रणनीति बनाकर भारतीय छात्र-छात्राओं की वापसी कराई जाए।
बेटे की वापसी के लिए प्रार्थना कर रहा परिवार
जलालाबाद। मोहल्ला नौसारा निवासी राकेश भारद्वाज के बेटे पुलकित यूक्रेन की राजधानी कीव में फंसे हैं। कीव स्थित यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कर रहे पुलकित का फोन आने पर परिजन को कुछ देर के लिए तसल्ली मिल जाती है। लेकिन, बेटे की वापसी का कोई रास्ता नहीं दिख रहा। पुलकित पिछले साल छह नवंबर को घर से यूक्रेन गया था। राकेश ने बताया कि मौका मिलते ही पुलकित फोन से बात कर लेता है। शनिवार को आई कॉल में उसने बताया कि वह अपने करीब 200 साथियों के साथ हॉस्टल के निचले हिस्से में बनाए बंकर में है।
आसपास से आने वाली धमाकों की आवाज से वह लोग सहम जाते हैं। वहां खाने-पीने की व्यवस्था भी काम चलाऊ है। बताया कि सभी लोग किसी तरह वहां से निकलकर देश पहुंचना चाहते है। पुलकित के पिता राकेश भारद्वाज, मां सीमा और छोटी बहन नैना दिन रात उसके सकुशल घर लौट आने की ईश्वर से प्रार्थना कर रहे है। राकेश ने बताया कि उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर बेटे के बारे में जानकारी दर्ज करा दी है।
बेटी का बेसब्री से इंतजार कर रहे माता-पिता
तिलहर। यूक्रेन में एमबीबीएस की छात्रा जया की सकुशल वापसी को लेकर परिजन काफी परेशान हैं। भारत के सहयोग से छात्रा रोमानिया पहुंच गई है। वहां से हवाई जहाज से भारत पहुंच रही है। परिजन अपनी पुत्री का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। नगर के मोहल्ला बहिदुल्लागंज निवासी डॉ. चूड़ामणि और महिला स्वास्थ्य कर्मी की पुत्री जया के लिए पूरा परिवार काफी चिंतित है। यूक्रेन और रूस के बीच युद्ध होने के बाद से परिवार वाले पूरी नींद नहीं हुई।

डॉक्टर दंपती ने बताया कि अपनी पुत्री से लगातार फोन पर बात होने पर कुछ राहत मिलती है। बेटी भी अन्य छात्रों के साथ भारत सरकार की मदद से घर लौट रही है। उसने व्हाट्सएप से फोटो भेज कर सूचना दी है कि भारतीय अधिकारी उन्हें अब रोमानिया ले जा रहे हैं। जहां से उसे हवाई जहाज से वापस भारत लाया जाएगा। जया ने भारतीय झंडों के साथ पूरे समूह की तस्वीर भी परिजन से साझा की है। उम्मीद जताई जा रही है कि जया सोमवार या मंगलवार को यहां पहुंच जाएंगी।

छात्र पुलकित

छात्र पुलकित- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

जया

जया- फोटो : SHAHJAHANPUR

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed