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चेतावनी दिवस मनाकर आरबीआई को किया सचेत
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।
Updated Thu, 24 Nov 2016 11:33 PM IST
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नोटबंदी
- फोटो : अमर उजाला
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सहकारी बैंकों के पास भुगतान के लिए नहीं कैश
केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी लागू होने के बाद पुराने नोट बदलने की प्रक्रिया से प्रथक रखे गए सहकारी बैंकों को भुगतान के लिए कैश देने में भी कंजूसी बरती जा रही है। आरबीआई की इस निर्णय के खिलाफ बैंक कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को चेतावनी दिवस मनाते हुए सरकार को आगाह किया कि हालात नहीं सुधरे तो हड़ताल छेड़ दी जाएगी।
बता दें कि पांच सौ और एक हजार रुपये के पुराने प्रतिबंधित नोट बदले जाने की प्रक्रिया के शुरुआती दौर में सहकारी बैंकों को काला धन व्हाइट मनी में बदलने का साधन बनाए जाने की शिकायतें उठने लगीं। इस पर आरबीआई ने कोऑपरेटिव बैंकों से नोट बदलने का काम छीन लिया। यही नहीं, कृषि ऋण मद में भुगतान के लिए पर्याप्त कैश भी नहीं दिया गया। नतीजा यह हुआ कि इन बैंकों में जमा-निकासी का काम बंद हो गया।
इसी के विरोध में गत शुक्रवार को कोऑपरेटिव बैंक स्टाफ एसोसिएशन ने बैंक मुख्यालय पर प्रदर्शन कर धरना दिया था, लेकिन हालात सुधरने के बजाय बिगड़ गए। एसोसिएशन से जुड़े ओमवीर सिंह, प्रशांत कुमार, एमपी सिंह आदि ने कहा कि चेतावनी पर भी आरबीआई ने सहकारी सेक्टर में बैंकिंग बहाल नहीं की तो हड़ताल के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
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जिला सहकारी बैंक की 22 शाखाओं को भुगतान के लिए रोजाना 22 से 25 करोड़ रुपये की जरूरत है, लेकिन 15-20 लाख रुपये से अधिक कैश नहीं मिल रहा। नोटबंदी से किसान तबका बेहद परेशान है। जो पैसा मिल रहा है, उससे सीमित किसान खातेदार लाभान्वित हो रहे हैं। भुगतान के लिए पर्याप्त कैश मिलने पर ही डीसीबी का कामकाज चल पाएगा।
-प्रदीप पांडेय, अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक
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केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी लागू होने के बाद पुराने नोट बदलने की प्रक्रिया से प्रथक रखे गए सहकारी बैंकों को भुगतान के लिए कैश देने में भी कंजूसी बरती जा रही है। आरबीआई की इस निर्णय के खिलाफ बैंक कर्मचारियों ने बृहस्पतिवार को चेतावनी दिवस मनाते हुए सरकार को आगाह किया कि हालात नहीं सुधरे तो हड़ताल छेड़ दी जाएगी।
बता दें कि पांच सौ और एक हजार रुपये के पुराने प्रतिबंधित नोट बदले जाने की प्रक्रिया के शुरुआती दौर में सहकारी बैंकों को काला धन व्हाइट मनी में बदलने का साधन बनाए जाने की शिकायतें उठने लगीं। इस पर आरबीआई ने कोऑपरेटिव बैंकों से नोट बदलने का काम छीन लिया। यही नहीं, कृषि ऋण मद में भुगतान के लिए पर्याप्त कैश भी नहीं दिया गया। नतीजा यह हुआ कि इन बैंकों में जमा-निकासी का काम बंद हो गया।
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इसी के विरोध में गत शुक्रवार को कोऑपरेटिव बैंक स्टाफ एसोसिएशन ने बैंक मुख्यालय पर प्रदर्शन कर धरना दिया था, लेकिन हालात सुधरने के बजाय बिगड़ गए। एसोसिएशन से जुड़े ओमवीर सिंह, प्रशांत कुमार, एमपी सिंह आदि ने कहा कि चेतावनी पर भी आरबीआई ने सहकारी सेक्टर में बैंकिंग बहाल नहीं की तो हड़ताल के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।
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जिला सहकारी बैंक की 22 शाखाओं को भुगतान के लिए रोजाना 22 से 25 करोड़ रुपये की जरूरत है, लेकिन 15-20 लाख रुपये से अधिक कैश नहीं मिल रहा। नोटबंदी से किसान तबका बेहद परेशान है। जो पैसा मिल रहा है, उससे सीमित किसान खातेदार लाभान्वित हो रहे हैं। भुगतान के लिए पर्याप्त कैश मिलने पर ही डीसीबी का कामकाज चल पाएगा।
-प्रदीप पांडेय, अध्यक्ष, जिला सहकारी बैंक