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कुटिल सूर्पणखा की नाक काट लक्ष्मण ने सिखाया सबक
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शाहजहांपुर। खिरनी बाग मैदान और ओसीएफ मैदान में चल रही रामलीला और मेला प्रदर्शनी देखने के लिए दर्शकों की भीड़ उमड़ना शुरू हो गई है। ओसीएफ मेला प्रदर्शनी में ग्रामीणों के अलावा शहरी लोगों ने भी जहां खानपान के स्टालों पर फास्ट फूड और चाट-पकौड़ी, गोलगप्पे का आनंद लिया, वहीं घरेलू उपयोगी समान खरीदने में भी रुचि दिखाई।
नगर रामलीला में दर्शकों ने सूर्पणखा नासिका भंग, खरदूषण वध, सीता हरण, सुतीक्ष्ण भक्ति, राम प्रतिज्ञा, जटायु मरण आदि लीलाओं का आनंद लिया। मंचन में कलाकारों ने दिखाया कि राजा दशरथ की आज्ञा का पालन करते हुए वन को गए श्रीराम, लक्ष्मण और सीता चित्रकूट में कुटिया बनाकर रहने लगते हैं। एक दिन रावण की बहन सूर्पणखा आकाश मार्ग से उधर से निकलती है और उसकी नजर दोनों भाइयों पर पड़ती है। उन्हें देखकर वह मोहित हो जाती है और सुंदर स्त्री का रूप धारण कर उनके समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है। श्रीराम के मना करने वह लक्ष्मण की ओर बढ़ती है और अपना प्रस्ताव रखती है। लक्ष्मण के भी मना करने पर सूर्पणखा क्रोधित होकर उन पर हमलावर हो जाती है, तभी लक्ष्मण उसकी नाक काट देते हैं। इससे पूर्व समिति के सदस्यों ने मां दुर्गा की झांकी की आरती उतार कर शुभारंभ कराया। व्यवस्था में मेला प्रबंधक नीरज वाजपेयी, सचिव नरेंद्र मिश्र गुरू, राममोहन वर्मा, मनोज खन्ना आदि का योगदान रहा।
उधर, ओसीएफ रामलीला में माता के विभिन्न स्वरूपों की झांकी के साथ लीला का शुभारंभ किया गया। लीला में दिखाया गया कि चित्रकूट में राम किस प्रकार पत्नी सीता का शृंगार कर खुश होते हैं। इसी बीच जयंत ने प्रभु की परीक्षा लेने के लिए कौवे का वेश धारण कर माता सीता के पैरों पर चोंच से प्रहार किया, तभी राम ने उस पर तीर चला दिया। इसी क्रम में माता अनुसुइया सीता को वस्त्र-आभूषण उपहार में देकर उन्हें उपदेशित करती हैं। इसी क्रम में सूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध आदि लीलाओं का भी मंचन किया गया। मंचन की व्यवस्था में जेपीएन सिंह, कल्याण राम, यशपाल कुकरेजा, महताब, देवेश दीक्षित, मनोज शुक्ला, राम लखन, ओम प्रकाश सक्सेना, महेश, मधुकर मोहन मिश्रा आदि का योगदान रहा।
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रामलीला में आज
0 नगर रामलीला में शबरी भक्ति, राम-सुग्रीव मित्रता, बालि वध आदि लीलाओं का मंचन।
0 ओसीएफ रामलीला में सीता हरण, शबरी भक्ति, श्रीराम-हनुमान, सुग्रीव मिलन, बालि वध आदि लीलाओं का मंचन।
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नगर रामलीला में दर्शकों ने सूर्पणखा नासिका भंग, खरदूषण वध, सीता हरण, सुतीक्ष्ण भक्ति, राम प्रतिज्ञा, जटायु मरण आदि लीलाओं का आनंद लिया। मंचन में कलाकारों ने दिखाया कि राजा दशरथ की आज्ञा का पालन करते हुए वन को गए श्रीराम, लक्ष्मण और सीता चित्रकूट में कुटिया बनाकर रहने लगते हैं। एक दिन रावण की बहन सूर्पणखा आकाश मार्ग से उधर से निकलती है और उसकी नजर दोनों भाइयों पर पड़ती है। उन्हें देखकर वह मोहित हो जाती है और सुंदर स्त्री का रूप धारण कर उनके समक्ष विवाह का प्रस्ताव रखती है। श्रीराम के मना करने वह लक्ष्मण की ओर बढ़ती है और अपना प्रस्ताव रखती है। लक्ष्मण के भी मना करने पर सूर्पणखा क्रोधित होकर उन पर हमलावर हो जाती है, तभी लक्ष्मण उसकी नाक काट देते हैं। इससे पूर्व समिति के सदस्यों ने मां दुर्गा की झांकी की आरती उतार कर शुभारंभ कराया। व्यवस्था में मेला प्रबंधक नीरज वाजपेयी, सचिव नरेंद्र मिश्र गुरू, राममोहन वर्मा, मनोज खन्ना आदि का योगदान रहा।
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उधर, ओसीएफ रामलीला में माता के विभिन्न स्वरूपों की झांकी के साथ लीला का शुभारंभ किया गया। लीला में दिखाया गया कि चित्रकूट में राम किस प्रकार पत्नी सीता का शृंगार कर खुश होते हैं। इसी बीच जयंत ने प्रभु की परीक्षा लेने के लिए कौवे का वेश धारण कर माता सीता के पैरों पर चोंच से प्रहार किया, तभी राम ने उस पर तीर चला दिया। इसी क्रम में माता अनुसुइया सीता को वस्त्र-आभूषण उपहार में देकर उन्हें उपदेशित करती हैं। इसी क्रम में सूर्पणखा प्रसंग, खर-दूषण वध आदि लीलाओं का भी मंचन किया गया। मंचन की व्यवस्था में जेपीएन सिंह, कल्याण राम, यशपाल कुकरेजा, महताब, देवेश दीक्षित, मनोज शुक्ला, राम लखन, ओम प्रकाश सक्सेना, महेश, मधुकर मोहन मिश्रा आदि का योगदान रहा।
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रामलीला में आज
0 नगर रामलीला में शबरी भक्ति, राम-सुग्रीव मित्रता, बालि वध आदि लीलाओं का मंचन।
0 ओसीएफ रामलीला में सीता हरण, शबरी भक्ति, श्रीराम-हनुमान, सुग्रीव मिलन, बालि वध आदि लीलाओं का मंचन।