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रामदेवी के अनाथ बच्चों का प्रशासन ने थामा हाथ

Wed, 05 Jul 2017 12:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर
अमर उजाला ब्यूरो, शाहजहांपुर Updated Wed, 05 Jul 2017 12:02 AM IST
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Ramdev's Orphaned Children's Administration
पहल - फोटो : शाहजहांपुर ब्यूरो
सर्पदंश से मां की मौत होने पर उसके अंतिम संस्कार के लिए चंदा मांगने वाले बच्चों की मदद के लिए मंगलवार को जिलाधिकारी समेत कई स्वयंसेवी संस्थाएं आगे आ गईं। डीएम ने बच्चों से मुलाकात कर उनका दुखदर्द जाना और तत्काल उन्हें एक लाख रुपये की आर्थिक मदद दी। जिस झोपड़ी में बच्चे रह रहे हैं, उसकी जमीन का बैनामा भी उनके नाम करा दिया है।
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सर्पदंश से मां की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार के लिए बच्चों के चंदा मांगने की खबर को अमर उजाला ने चार जुलाई के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। मंगलवार को तहसील दिवस में जलालाबाद पहुंचे डीएम नरेंद्र सिंह ने सबसे पहले गांव उबरिया से रामदेवी के पांचों बच्चों संतोष, श्रीओम, ऋषीओम, सुमित और लक्ष्मी को बुलवाया। डीएम ने अधिकारियों से सहयोग लेकर एक लाख रुपये की एफडी बच्चों के नाम बनवा दी। बच्चों ने डीएम को बताया कि जिस झोपड़ी में वह रह रहे हैं, उसकी जमीन मां ने खरीद ली थी लेकिन बैनामा नहीं करा सकीं। इस पर डीएम ने जमीन के मालिक गांव दुमुकापुर निवासी हनीफ  और उप निबंधक को तहसील में बुलवाया। डीएम ने उप निबंधक से झोपड़ी की पांच डिस्मिल जमीन का हनीफ से बैनामा बच्चों के हक में बैनामा कराने के निर्देश दिए। कुछ ही देर में बैनामा की कार्रवाई पूरी हो गई। 
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 डीएम ने बच्चों को देखभाल और परवरिश के लिए मिर्जापुर के गांव कील्हापुर में रह रहे उनके ताऊ ओमकार के सुपुर्द कर दिया। उन्होंने बीडीओ सुधीर यादव को बच्चों के लिए तत्काल आवास बनवाने, सोलर लाइट लगवाने और बीईओ इंद्रप्रताप सिंह को उनकी पढ़ाई की मुफ्त व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस मौके पर उन्होंने समर्थ सेवा संस्थान की अध्यक्ष डॉ. संगीता मोहन और सचिव एकता अग्रवाल की ओर से भेजी गई नकद राशि, फ ल, कपड़े और खाने का सामान बच्चों के सुपुर्द किया।
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यह था वाकया 
मूल रूप से मिर्जापुर क्षेत्र के गांव कील्हापुर निवासी भैयालाल अपनी पत्नी रामदेवी और पांच बच्चों को लेकर रोजी-रोटी की तलाश में आठ साल पहले जलालाबाद आए थे। वह गांव उबरिया के बाहर मंदिर के पास झोपड़ी डालकर रहने लगे। पांच साल पहले भैयालाल पत्नी और बच्चों को बेसहारा छोड़कर अपनी साली को लेकर कहीं चला गया। पति के जाने के बाद रामदेवी खुद मेहनत मजदूरी कर बच्चों का पेट पालने लगीं। रविवार को रामदेवी की सांप के काट लेने से मौत हो गई। इस तरह उनके बच्चे अनाथ हो गए।

फोटो-20,बच्चो के पिता भैयालाल 
बाप को मिली हवालात 
पत्नी की मौत के बाद बच्चों को आर्थिक मदद मिलने की खबर जब भैयालाल को मिली तो वह मंगलवार को तहसील पहुंच गया। उसने बच्चों से मिलकर उन्हें अपने विश्वास में लेने की कोशिश की लेकिन बच्चों ने उससे रुख नहीं मिलाया। इस पर भैयालाल बच्चों से बदसलूकी करने लगा। किसी ने यह बात डीएम को बता दी। इसके बाद डीएम ने पुलिस भेजकर उसे पकड़वाकर कोतवाली भिजवा दिया।

बच्चों की हरसंभव मदद करेंगे: डीएम 
डीएम नरेंद्र सिंह ने कहा कि फौरी तौर पर बच्चों के नाम एक लाख रुपये की एफ डी कर दी है। झोपड़ी की जमीन का बैनामा भी उनके नाम करा दिया है। आवास, खाने-पीने की सामग्री और पढ़ाई की व्यवस्था भी कर दी है। इसके अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से भी बच्चों को सहायता दिलाने के लिए पत्र भेजा जा रहा है। इस संबंध में उनकी मुख्यमंत्री के विशेष सचिव से फोन पर बात भी हो गई है। बच्चों की हरसंभव मदद की जाएगी।


इन लोगों ने भी की मदद
भाजपा नेता मनोज कश्यप ने तीन हजार रुपये, शाहजहांपुर से आए भाजपा नेता दयाशंकर शर्मा ने पचास किलो चावल, एक बोरी गेहूं और नकदी, बाबा परशुराम सर्वकल्याण समिति ने दो हजार की नकदी तथा खाने-पीने की सामग्री दी।
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